भोपाल के आवासीय भूखंडों पर संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया। कोर्ट ने 2 अगस्त को गठित उच्चस्तरीय समिति के संचालन पर रोक लगा दी, जिसके गठन के बाद नगर निगम की कार्रवाई रोक दी गई थी। साथ ही नगर निगम के नोटिसों के खिलाफ मप्र हाई कोर्ट से मिले अंतरिम स्थगन आदेश भी समाप्त कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और भोपाल नगर निगम को 5 सप्ताह में अब तक की कार्रवाई व आगे की कार्ययोजना की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। ऑनलाइन सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- अवैध निर्माणों और आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई करना नगर निगम अधिनियम के तहत हमारा वैधानिक दायित्व है। लेकिन अब सरकार बीच में आ गई है। इससे हमारा काम बहुत मुश्किल हो गया है। कृपया सरकार को ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करने से रोकें, जहां हमें अपना वैधानिक दायित्व निभाना है। दस सदस्यीय समिति गठित करने पर उन्होंने कहा, यही हमारी पहली बाधा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग व भवन नियमों के उल्लंघन का मामला खुद उसकी निगरानी में लंबित है, तब सरकार समानांतर समिति बनाकर कार्रवाई की दिशा तय नहीं कर सकती। इसके बाद निगम अपनी कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हो गया है। हालांकि आदेश की विस्तृत प्रति देर रात तक अपलोड नहीं हुई थी। इसलिए पूरी कानूनी स्थिति लिखित आदेश आने के बाद ही स्पष्ट होगी। सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट को भोपाल नगर निगम की अब तक की कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नगर निगम ने 100 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील किया है। आगे क्या : नगर निगम ने कहा- कार्रवाई जारी रहेगी 1. क्या कार्रवाई फिर शुरू होगी? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की समिति पर रोक लगा दी है। हाई कोर्ट के स्टे भी हटा दिए हैं। ऐसे में निगम रुकी कार्रवाई दोबारा शुरू करेगा। निगम उपायुक्त भुवन गुप्ता ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।’
2. फिर खुले प्रतिष्ठानों का क्या? कार्रवाई के बाद जो प्रतिष्ठान फिर खुल गए, क्या उन पर कार्रवाई होगी या नई प्रक्रिया अपनाई जाएगी? इस पर निगम ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों पर कार्रवाई रोकने से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- •मामला हमारी निगरानी में, सरकार अलग व्यवस्था नहीं बना सकती 1. अवमानना की चेतावनी सुप्रीम कोर्ट ने मप्र सरकार की 10 सदस्यीय समिति पर रोक लगाते हुए इसे हस्तक्षेप बताया। चेतावनी दी कि भविष्य में सरकार या किसी अधिकारी ने कोर्ट के आदेशों में दखल दिया तो अवमानना की कार्रवाई की जाएगी। 2. स्टे लेने पर नाराजगी कोर्ट ने कहा कि मामला उसकी निगरानी में है, इसलिए सरकार समानांतर समिति नहीं बना सकती। जरूरत हो तो पहले अदालत से स्पष्टीकरण मांगे। साथ ही, सीधे हाई कोर्ट से स्टे लेने के चलन पर भी नाराजगी जताई। 3. पूरे देश में लागू होंगे आदेश कोर्ट ने कहा- उसके आदेश पूरे देश में लागू होंगे। किसी अन्य प्राधिकरण या हाई कोर्ट का आदेश इनके पालन में बाधा नहीं बनेगा। नगर निगम को बिना देरी कार्रवाई जारी रखने व सभी पक्षों से 3 सप्ताह में हलफनामा मांगा है।
