Homeमध्यप्रदेशइंदौर एयरपोर्ट पर 1.28 करोड़ के सोने की तस्करी नाकाम:एयर इंडिया एक्सप्रेस...

इंदौर एयरपोर्ट पर 1.28 करोड़ के सोने की तस्करी नाकाम:एयर इंडिया एक्सप्रेस कर्मचारी समेत 5 गिरफ्तार; DRI ने 1KG विदेशी गोल्ड किया जब्त

डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) की इंदौर जोनल यूनिट ने करीब 1.28 करोड़ रुपए मूल्य के विदेशी सोने की तस्करी का बड़ा खुलासा किया है। टीम ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक अबूधाबी से लाए गए 1000.20 ग्राम सोने को चांदी जैसी दिखने वाली धातु की दो चूड़ियों में छिपाकर इंदौर लाया गया था। एयरपोर्ट पर तैनात एक कर्मचारी की मदद से सोने को सीमा शुल्क जांच से बचाकर बाहर निकालने की पूरी साजिश रची गई थी। गिरफ्तार आरोपियों में संजय मुंजे (48), अमन गहलोत (30), गोविंद पोरवाल (48), वासुदेव बरनाले (32) और अजय कुमार सेन (56) शामिल हैं। सभी को 4 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें बुधवार 5 अगस्त को विशेष आर्थिक अपराध न्यायालय में पेश किया गया है। डीआरआई की ओर से पेश हुए एडवोकेट चंदन ऐरन के अनुरोध पर आरोपियों को 18 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अबूधाबी से फ्लाइट में पहुंचा था सोना डीआरआई के अनुसार 4 अगस्त को एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-248 से अबूधाबी से इंदौर पहुंचे यात्री के जरिए विदेशी मूल का सोना भारत लाया गया। सोने का वजन 1000.20 ग्राम और कीमत करीब 1.28 करोड़ रुपए आंकी गई है। सोने को इस तरह तैयार किया गया था कि वह सामान्य धातु की चूड़ियों जैसा दिखाई दे और जांच एजेंसियों की नजर से बच सके। हर आरोपी की थी अलग जिम्मेदारी
जांच में सामने आया कि इस तस्करी नेटवर्क में प्रत्येक आरोपी की अलग-अलग भूमिका तय थी। संजय मुंजे को पूरे नेटवर्क का मुख्य समन्वयक है, उसने सोना मंगाने और उसे सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई। गोविंद पोरवाल अबूधाबी से सोना लेकर आने वाला कैरियर था। वासुदेव बरनाले, जो एयर इंडिया एक्सप्रेस में कार्यरत है, पर एयरोब्रिज पर सोना लेकर उसे कस्टम जांच से पहले बाहर निकालने की जिम्मेदारी होने का आरोप है। अमन गहलोत पर सोना प्राप्त कर आगे सुरक्षित पहुंचाने की भूमिका निभाने का आरोप है। अजय कुमार सेन यात्रियों और अन्य आरोपियों के बीच समन्वय बनाने का काम करता था। निगरानी की सूचना देने के बदले मिलते थे 10 हजार रुपए
डीआरआई की जांच में यह भी सामने आया है कि तस्करी से जुड़े लोगों को एयरपोर्ट और जांच एजेंसियों की निगरानी संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जाती थी। इसके बदले प्रति यात्रा 10 हजार रुपए पारिश्रमिक दिए जाने की बात सामने आई है। कस्टम जांच से पहले सौंपा जाना था सोना
डीआरआई के अनुसार गोविंद पोरवाल के विमान से उतरने के बाद सोना पूर्व निर्धारित योजना के तहत वासुदेव बरनाले को सौंपा जाना था। इसके बाद उसे सीमा शुल्क जांच से बचाकर एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकालने की तैयारी थी। हालांकि डीआरआई की कार्रवाई से पूरी साजिश नाकाम हो गई। पूरे नेटवर्क की जांच जारी
सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज बयानों में तस्करी से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। डीआरआई का दावा है कि प्रारंभिक जांच में आरोपियों के पहले भी विदेशी सोने की तस्करी से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। एजेंसी अब धन के स्रोत, भुगतान व्यवस्था, यात्रा मार्ग और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
डीआरआई ने जब्त 1000.20 ग्राम विदेशी सोने को सीमा शुल्क अधिनियम के तहत जब्त किया है। आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 135(1)(a), 135(1)(b) एवं सहपठित धारा 135(1)(i)(A) के तहत केस दर्ज किया गया है।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here