मध्य प्रदेश में करीब 9 साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर छात्र राजनीति में गर्माहट लौटने वाली है। हाईकोर्ट के सख्त रुख और जबलपुर के छात्र अदनान अंसारी की जनहित याचिका के बाद प्रदेश सरकार ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन देकर रास्ता साफ कर दिया है। इस फैसले के बाद प्रदेश के राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों में क्रेडिट लेने की होड़ मच गई है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली बताया है, वहीं कांग्रेस और NSUI का दावा है कि यह उनके सालों के संघर्ष और कोर्ट के कड़े रुख का नतीजा है। लोकतंत्र की नर्सरी हैं छात्रसंघ चुनाव मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता और पूर्व NSUI नेता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि छात्रसंघ केवल प्रतिनिधि चुनने का जरिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नर्सरी हैं। जब काम आया ‘मुन्नाभाई MBBS’ का आइडिया 2016-17 में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर हुए आंदोलन का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए विवेक त्रिपाठी ने बताया कि तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया से मुलाकात न होने पर छात्रों ने अनोखा रास्ता चुना। भोपाल जिला NSUI अध्यक्ष अक्षय तोमर के मुताबिक, 2016 के उसी ऐतिहासिक आंदोलन, छात्रवृत्ति की मांग और पुलिस लाठीचार्ज के दौर से ही प्रदेश में छात्र नेताओं की एक पूरी नई पीढ़ी तैयार हुई। ABVP ने की लिंगदोह समिति की सिफारिशें लागू करने की मांग हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए ABVP के मध्य भारत प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करते हैं। ABVP ने सरकार से मांग की है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… MP में 9 साल बाद सितंबर में होंगे छात्रसंघ चुनाव मध्य प्रदेश में करीब 9 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। 2017 के बाद से चुनाव नहीं हुए थे। अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया है कि 2026-27 शैक्षणिक सत्र में सितंबर में छात्रसंघ चुनाव कराए जाएंगे। सरकार के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…
