मध्यप्रदेश में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच राज्य सरकार ने पटवारियों पर की जाने वाली एफआईआर के मामलों में कलेक्टरों को पूरे प्रकरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग ने सभी कलेक्टरों से कहा है कि पटवारियों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाए। हालांकि, इस आदेश के बाद भी पटवारी हड़ताल से वापस नहीं लौटे हैं। पटवारियों के खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर को लेकर प्रमुख सचिव, राजस्व ने सभी जिलों के कलेक्टरों को लिखे पत्र में कहा है कि किसी भी पटवारी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पहले पूरे मामले का प्रारंभिक परीक्षण किया जाना चाहिए। प्रमुख सचिव, राजस्व ई. रमेश कुमार ने कहा है कि एमपी पटवारी संघ द्वारा 20 जुलाई को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि अक्सर वसीयत और अन्य राजस्व न्यायालयीन प्रकरणों में पटवारी केवल प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है। इसी प्रतिवेदन के आधार पर गुण-दोष के अनुसार निर्णय लिया जाता है। इसके बावजूद कुछ मामलों में पटवारियों के विरुद्ध सीधे एफआईआर दर्ज कर दी गई है। प्रमुख सचिव, राजस्व ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में यदि पटवारियों द्वारा राजस्व न्यायालयों में प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने का कोई मामला बनता है, तो पहले उसका प्रारंभिक परीक्षण कराया जाए। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
प्रमुख सचिव से मिलने पहुंचे थे पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल कर रहे पटवारियों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंत्रालय में प्रमुख सचिव, राजस्व ई. रमेश कुमार से मिलने पहुंचा था। अपनी मांगों के समाधान के लिए हड़ताल कर रहे पटवारियों की प्रमुख मांगों में यह भी शामिल था कि उनके विरुद्ध बिना जांच के सीधे एफआईआर दर्ज न की जाए और उन्हें विधि के अनुसार संरक्षण दिया जाए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार करते हुए बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज नहीं कराने का निर्णय लिया है और इस संबंध में सभी कलेक्टरों को पत्र भी जारी कर दिया है। 23 हजार पटवारी सामूहिक अवकाश के बाद अनिश्चितकालीन हड़ताल पर प्रदेश के 23 हजार पटवारी अपनी मांगों को लेकर जुलाई से आंदोलन कर रहे हैं। पहले उन्होंने 15 से 17 जुलाई तक तीन दिन का सामूहिक अवकाश लिया। इसके बाद दो दिन के सरकारी अवकाश के कारण भी काम नहीं किया। फिर वे सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप से बाहर हो गए और अधिकारियों के निर्देशों पर त्वरित कार्रवाई (क्विक एक्शन) से भी पीछे हट गए। इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं लिया, जिसके बाद पटवारियों ने 3 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी।
