मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी एक ऐसे हत्याकांड की, जिसके पीछे रची गई शातिर साजिश ने सभी को हैरान कर दिया था। आरोपियों ने इतनी सुनियोजित योजना बनाई कि महीनों तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। परिवार को लगता रहा कि उनका बेटा अपनी पत्नी के साथ रह रहा है, इसलिए किसी को उस पर जरा भी शक नहीं हुआ।फिर एक दिन एक स्कूल टीचर ने ऐसा खुलासा किया, जिसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। इसके बाद एक-एक कर ऐसी परतें खुलती गईं, जिन्होंने पुलिस की जांच को और भी उलझा दिया। पढ़िए पूरी कहानी… 10 जुलाई 2023। अशोकनगर। दोपहर का समय था। शहर के एक बड़े निजी स्कूल में रोज की तरह कामकाज चल रहा था। तभी एक महिला अपने बेटे का ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेने पहुंची। उसने स्कूल प्रबंधन से कहा कि वह अब दूसरी जगह रहने जा रही है, इसलिए बच्चे की टीसी चाहिए। बातचीत के दौरान उसने एक और बात कही-“मेरे पति की मौत हो चुकी है।” यह बात वहीं मौजूद एक टीचर ने भी सुनी। पहले उसे लगा कि परिवार सदमे में होगा, लेकिन अगले ही पल उसके मन में सवाल उठा। जिस व्यक्ति की मौत की बात महिला कर रही थी, उसका परिवार तो उसी के मोहल्ले में रहता था। वहां तो किसी को ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। स्कूल की छुट्टी होते ही टीचर सीधे उस परिवार के घर पहुंची। उसने सहजता से पूछा, “आपकी बहू स्कूल में कह रही थी कि सौरभ की मौत हो गई है… क्या हुआ था?” यह सुनते ही पूरे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। परिवार को लगा, बेटा पत्नी के साथ रह रहा है 35 वर्षीय सौरभ जैन कई महीनों से घर नहीं आया था। लेकिन परिवार को यही लगता रहा कि वह पत्नी ऋचा के साथ बाहर रह रहा है। दोनों पहले भी अलग रहने लगे थे और सौरभ परिवार से कम ही बात करता था। इसलिए किसी को ज्यादा शक नहीं हुआ। मौत कैसे हुई? हर बार नया जवाब परिवार ने पूछा कि आखिर सौरभ की मौत कैसे हुई? ऋचा ने पहले कहा कि सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हुई है। उसके मुताबिक, सौरभ और उसका मुंहबोला भाई दीपेश राजपुर जा रहे थे, तभी बाइक दुर्घटनाग्रस्त हो गई। सौरभ की मौके पर मौत हो गई और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। दीपेश से यही सवाल पूछा गया, तो उसने बिल्कुल अलग कहानी सुनाई। उसने कहा कि सौरभ की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। एक ही घटना… और दो अलग-अलग कारण। यहीं से परिवार को यकीन हो गया कि दीपेश और ऋचा कुछ न कुछ छिपा रहे हैं। श्मशान घाट पहुंचे तो बढ़ गया संदेह सच्चाई जानने के लिए परिवार शहर के दोनों श्मशान घाट पहुंचा। उन्होंने अंतिम संस्कार के रजिस्टर खंगाले, लेकिन कहीं भी सौरभ जैन के नाम की कोई एंट्री नहीं मिली। न किसी शव के दाह संस्कार का रिकॉर्ड था और न ही कोई मेडिकल दस्तावेज। अब संदेह लगभग यकीन में बदल चुका था। जांच में सामने आई रिश्तों की दरार पुलिस जांच में पता चला कि सौरभ और ऋचा की शादी 2013 में हुई थी। दोनों का एक बेटा भी था। करीब नौ साल तक सब सामान्य चलता रहा, लेकिन 2022 में पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ गया। ऋचा कुछ समय के लिए मायके चली गई थी। बाद में दोनों फिर साथ रहने लगे, लेकिन संयुक्त परिवार छोड़कर गंजबासौदा में रहने लगे। परिवार वालों का कहना था कि सौरभ पहले की तरह उनसे बात नहीं करता था। कई बार फोन भी पत्नी ही संभालती थी। धीरे-धीरे संपर्क इतना कम हो गया कि महीनों तक उसके घर न आने पर भी किसी ने ज्यादा सवाल नहीं किए। इसी दूरी के कारण परिवार चार महीने तक सच्चाई से अनजान रहा। पूछताछ शुरू हुई… और हर बार बदल गई कहानी पुलिस ने ऋचा और दीपेश को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की, लेकिन जैसे ही पुलिस ने पूछा कि शव कहां है, कहानी बदल गई।
उन्होंने बताया कि बालाजी धाम कॉलोनी के एक मकान में सौरभ की धारदार हथियार से हत्या की गई। फिर शव को छत पर जलाकर खत्म कर दिया गया। दूसरी कहानी… शव के टुकड़े किए पहली कहानी कमजोर पड़ते ही दोनों ने नया दावा किया। इस बार कहा कि शव के टुकड़े किए गए। फिर टिन की चादर पर एक-एक हिस्सा जलाया गया, ताकि कोई सबूत न बचे।पुलिस ने पूरी छत छान मारी, लेकिन न टिन की चादर मिली और न जलने के ऐसे निशान, जो इस कहानी की पुष्टि करते। हालांकि जांच के दौरान पुलिस उस दुकान तक जरूर पहुंच गई, जहां से आरोपियों ने हत्या में इस्तेमाल होने वाला धारदार हथियार खरीदने की बात कही थी। दुकानदार ने दोनों की पहचान भी कर ली। तीसरी, चौथी… और फिर नई कहानी पूछताछ आगे बढ़ी तो बयान फिर बदल गया। पहले कहा गया कि शव को जलाकर उसकी राख नदी में फेंक दी। पुलिस वहां पहुंची, लेकिन कुछ नहीं मिला। इसके बाद दावा किया गया कि शव तुलसी सरोवर तालाब में फेंका गया था। जब वहां भी कुछ नहीं मिला, तो कहानी फिर बदली और कहा गया कि शव नदी में बहा दिया गया। बेटे ने दिया सबसे अहम सुराग इसी दौरान पुलिस ने सौरभ और ऋचा के बेटे से बातचीत की। बच्चे ने जो बताया, उसने जांच को नया मोड़ दे दिया। उसने कहा कि मामा दीपेश उसे एक अंतिम संस्कार में लेकर गए थे और कहा था कि ये तुम्हारे पापा हैं। उनकी दुर्घटना में मौत हो गई है। हालांकि बच्चे को भी पूरी सच्चाई पता नहीं थी। फिर भी उसे जिस अंतिम संस्कार में ले जाया गया था उससे पुलिस को कोई सुराग मिल सकता था। अब कई सवाल सामने थे? चार महीने तक परिवार को मौत की खबर क्यों नहीं दी गई?
अगर दुर्घटना हुई थी तो उसका कोई रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला?
अगर हत्या हुई थी तो शव आखिर गया कहां?
हत्या हुई तो चार अलग-अलग कहानियां सुनाने की जरूरत क्यों पड़ी? इन सवालों के जवाब कल पढ़िए ‘मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स’ के पार्ट-2 में… ये भी पढ़ें… 1. चौथी मंजिल से गिरी युवती, सुसाइड या मर्डर में उलझी, क्राइम फाइल्स पार्ट-1 कहते हैं, हर मौत वैसी नहीं होती जैसी पहली नजर में दिखाई देती है। कई बार सच सामने ही होता है, लेकिन उसके ऊपर झूठ की इतनी परतें चढ़ा दी जाती हैं कि हकीकत तक पहुंचने में सालों लग जाते हैं। इंदौर के एक नामी होटल की चौथी मंजिल से एक युवती नीचे गिरी। पढ़ें पूरी खबर… 2. गर्लफ्रेंड के मर्डर को सुसाइड दिखाने की साजिश, क्राइम फाइल्स पार्ट-2 मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पहले भाग में आपने पढ़ा कि इंदौर के एक होटल की चौथी मंजिल से गिरी 23 वर्षीय शिल्पू भदौरिया की मौत को पहले आत्महत्या माना गया। लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बताया कि उनकी मौत गिरने से नहीं, बल्कि पहले दम घुटने से हुई थी। पढ़ें पूरी खबर…
