ग्वालियर में लोन पास कराने और कूटचरित दस्तावेजों के नाम पर लाखों रुपए की ठगी का शिकार हुए एक युवक जसपाल सिंह यादव ने ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जान दे दी। उसने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। जिसमें लिखा है कि सिंधिया जी जब आप यह पत्र पढ़ेंगे तो मैं, यह दुनिया छोड़कर जा चुका होऊंगा।’ युवक केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थक बताया जा रहा है। सुसाइड नोट में उसने 3 लोगों का जिक्र किया है, जिन्होंने उसे जमीन पर लोन दिलाने का झांसा देकर 23 लाख रुपए की ठगी की है। जिसका 20 टका ब्याज वह भर चुका है। यह रकम 35 लाख हो गई है। सुसाइड नोट में आरोपियों के नाम, मोबाइल नंबर और उनके फर्जीवाड़े का पूरा ब्योरा दर्ज है। शनिवार से जसपाल सिंह लापता था और रविवार देर रात उसका शव झांसी रोड रेलवे लाइन पर पड़ा मिला था। सोमवार को सुबह परिजन ने शव की पहचान की है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
3.45 करोड़ के लोन का झांसा देकर ऐंठे 23 लाख
सुसाइड नोट के मुताबिक, आरोपियों ने जसपाल सिंह यादव को झांसे में लेकर बताया था कि उनकी 1.5 करोड़ रुपए की जमीन पर पिरामल बैंक से 3 करोड़ 45 लाख रुपए का लोन स्वीकृत हो गया है। आरोपियों ने बैंक का कथित सेंक्शन लेटर दिखाकर पीड़ित को भरोसे में लिया और लोन कराने के एवज में उनसे 23 लाख रुपए ऐंठ लिए। फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक बहाने बनाए
आरोपियों ने फरवरी 2025 में जसपाल सिंह यादव से पैसे लिए थे। जुलाई 2026 तक कोई काम नहीं कराया। जब पीड़ित ने अपने पैसे और लोन के बारे में दबाव बनाया तो आरोपी रुपए लेकर फरार हो गए। जसपाल ने अपने सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि आरोपियों ने केवल उनके साथ ही नहीं, बल्कि इलाके के कई अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी की वारदात को अंजाम दिया है। कुलैथ गांव में जीजा के घर छिपे होने का दावा सुसाइड नोट के आखिरी हिस्से में जसपाल यादव ने लिखा है कि मुख्य आरोपी रवि कुमार भागकर कुलैथ पुरा गांव में छिपा हुआ था, जहां उसके जीजा ने उसे पनाह दे रखी थी। घटना के बाद पुलिस ने हस्तलिखित सुसाइड नोट को जांच में ले लिया है और खत में दर्ज मोबाइल नंबरों व पतों के आधार पर आरोपियों की घेराबंदी और मामले की जांच शुरू कर दी है। 5 पन्नों के सुसाइड नोट में क्या लिखा…
मैं, जसपाल सिंह यादव, अपने पूरे होश-हवास में यह लिख रहा हूं कि मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। मेरी हत्या के जिम्मेदार आशीष गुप्ता, डबरा निवासी रवि जाटव और मुख्य आरोपी टेकनपुर निवासी रवि कुमार हैं। इन लोगों ने मुझे लोन करवाने के लिए मुझसे 23 लाख रुपए लिए थे। कहा कि मेरी 1.5 करोड़ रुपए की जमीन पर 3.45 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत हो गया है। उन्होंने मुझे पिरामल बैंक का सैंक्शन लेटर दिखाकर धोखे से रुपए ले लिए। रवि कुमार ने फरवरी 2025 से जुलाई 2026 तक मेरा कोई काम नहीं कराया और यह भाग गया। इसने काफी लोगों के साथ ऐसा किया है। यह मुझे कुलैथपुरा गांव में मिला, जहां इसके जीजा ने इसे पनाह दी थी। जब मैं वहां पहुंचा तो पंचायत लगवाकर झूठा आश्वासन दिया और वापस भेज दिया। उसने 30 जुलाई को रुपए वापस देने का कहा था। इसके बाद वह 30 जुलाई को गोहद स्थित कुछवा गुर्जर गांव भाग गया। पता चला कि वह इस गांव में उसका जीजा छोटू सरपंच रहता है। उसने इसे अपने पास रखा है। जब हम उसे लेने गए तो पंचनामा बनाकर देने का कहा। लेकिन, फिर वह पलट गया। कल्याणीपुरा और कुथवा गुर्जर गांव में इसके दोनों जीजा रहते हैं। ये भी इतने ही दोषी हैं। जो 23 लाख रुपए मैंने इन्हें दिए हैं, उसका मैंने 20 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज भरा है। 23 लाख रुपए के मैंने 35 लाख रुपए भुगते हैं। मैं अपनी जिंदगी खत्म कर रहा हूं और रवि पर जो मेरे रुपए हैं, वे मेरे मरने के बाद मेरे पिताजी को दिलवाए जाएं। मेरी आत्महत्या की वजह ये सभी लोग हैं। इन लोगों पर उचित कार्रवाई की जाए। इसने लल्ला बलराम से भी 9.80 लाख रुपए लेकर धोखा किया है। मैं जीना चाहता था, लेकिन मेरी जिंदगी रवि कुमार ने बर्बाद कर दी। ये रुपए मैंने उसे अपनी बुलेट, सोना, सफारी और कार गिरवी रखकर 20 प्रतिशत के ब्याज पर दिए थे। इसकी वजह से सब डूब गए। मैं ग्वालियर का निवासी हूं और राजा ज्योतिरादित्य सिंधिया जी तक मेरी मौत का यह पत्र जरूर जाए। इसके पूरे परिवार के लोग धोखेबाज हैं। अतः मेरी विनती है कि मेरे रुपए मेरे पिताजी को दिलवाए जाएं और रवि कुमार को आजीवन कारावास होना चाहिए, ताकि कोई और परिवार अपना बच्चा न खोए, जैसे मेरे परिवार ने मुझे खो दिया है। सिंधिया जी, जब आप यह पत्र पढ़ेंगे, मैं दुनिया से जा चुका होऊंगा। मेरा निवेदन है कि इसको आजीवन कारावास दिया जाए। मैं मरना नहीं चाहता था, लेकिन इस रवि की वजह से मुझे आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा।
