राजधानी भोपाल के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर सहित अन्य रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर चल रही कार्रवाई के बीच दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार देर शाम मुख्यमंत्री निवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में फिलहाल व्यापारियों को राहत देने का फैसला किया गया है। बैठक के बाद बंद कराई गई दुकानों के सोमवार से दोबारा खुलने की संभावना है। बैठक में मंत्री विश्वास सारंग, कृष्णा गौर, विधायक रामेश्वर शर्मा और भगवानदास सबनानी सहित अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। साथ ही मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई , आयुक्त नगरीय प्रशासन संकेत भोंडवे, आयुक्त नगर तथा ग्राम निवेश कौशलेन्द्र सिंह, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा, आयुक्त नगर निगम संस्कृति जैन भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने देश की 28 राजधानियों में रिहायशी क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, भोपाल के व्यापारियों में इसे लेकर दहशत का माहौल है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्च स्तरीय समिति गठित की जाए। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर पूरे प्रकरण की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। बैठक के बाद संकेत मिले हैं कि नगर निगम द्वारा जिन दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को हाल ही में बंद कराया गया था, उन्हें सोमवार से दोबारा खोलने की अनुमति दी जा सकती है। इससे रिहायशी क्षेत्रों में व्यवसाय कर रहे हजारों दुकानदारों को फिलहाल बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। समिति में ये होंगे रहवासी सड़कों पर उतरे तब लिया फैसला इससे पहले भोपाल के अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, बावड़ियाकलां समेत कई इलाकों में आवासीय परिसरों में कमर्शियल एक्टिविटी के विरोध में रहवासी सड़क पर उतरे। रविवार को उन्होंने रैली निकाली और नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सीलिंग के बावजूद 10 नंबर समेत कई इलाकों में शॉप खुली रहीं। यह सबूत कोर्ट में दिखाएंगे। एक दिन पहले 19 प्रतिष्ठान किए थे सील शनिवार को नगर निगम ने सख्ती दिखाते हुए 19 प्रतिष्ठान को सील करने की कार्रवाई की थी। हालांकि, 65 प्रतिष्ठान कार्रवाई से पहले ही बंद हो गए थे। कार्रवाई के बाद शाम को कई दुकानें वापस खुल गईं। इसका विरोध अरेरा कॉलोनी के लोगों ने किया। गौतम नगर इलाके में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के तत्वाधान में रहवासियों ने पैदल मार्च भी निकाला था। जिसमें लोगों ने नगर निगम की दिखावटी कार्रवाई पर नाराजगी जताई। गौतम नगर रहवासी समिति के अध्यक्ष मोहन खरपते और सोमकांत उमलकर ने बताया, उनके क्षेत्र में अवैध रूप से बड़ी संख्या में होटल, हॉस्टल और चाय सुट्टा बार संचालित किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में संदिग्ध व्यक्तियों का जमावड़ा देर रात तक लगा होता है। क्षेत्रीय निवासी आदित्य ने बताया, मेरे घर के सामने दिनभर में इतने लोग सिगरेट पीते हैं कि परिवार के सदस्यों के फेफड़े संक्रमित हो गए हैं। जो पार्टी हमारे खिलाफ, हम चुनाव में उनके खिलाफ पैदल मार्च के दौरान रहवासियों ने चेतावनी दी थी कि कई नेता इन अवैध भवनों के संचालकों को समर्थन दे रहे हैं। उन्हें हमारी चेतावनी है कि भोपाल के 95% मतदाता इस समस्या से ग्रसित है। आज जो पार्टी या नेता हमारे खिलाफ है, उनका हम सभी अगले चुनाव में विरोध करेंगे। पैदल मार्च में पूर्व कमिश्नर भी शामिल हुए पैदल मार्च में भोपाल के पूर्व कमिश्नर कवींद्र कियावत भी शामिल हुए। उन्होंने इस अराजकता के खिलाफ सभी को एकजुट होकर लड़ने की अपील की। मार्च में शामिल शाहपुरा समिति की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने बताया कि नगर निगम ने शाहपुरा के अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद रखी है। जिसे हम भी उजागर करेंगे। पैदल मार्च में रचना नगर, शांति निकेतन, शाहपुरा, गुलमोहर, अरेरा कॉलोनी के लोग शामिल हुए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई, पर सिर्फ कागजी प्रयास संस्था की अध्यक्ष अपर्णा वाशिष्ठ ने बताया, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद नगर निगम ने जिन अवैध दुकानों को सील करने का नोटिस जारी किया था, उनके विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके स्थान पर अनेक दुकानों के बाहर एक समान प्रारूप के पोस्टर चस्पा कर दिए गए, जिन पर लिखा था कि ‘भोपाल नगर पालिका निगम के आदेशानुसार इस भवन में व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं। रहवासी कमल राठी का कहना है कि यदि ऐसे पोस्टर लगाए गए तो यह स्वयं इस बात का संकेत है कि संबंधित भवनों में भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता तक सीमित रही। उनका आरोप है कि कुछ व्यापारियों ने अस्थायी रूप से प्रतिष्ठान बंद रखें। पोस्टर लगाकर उनकी तस्वीरें निगम को भेज दीं और उसके बाद अधिकांश संस्थान पुनः खुल गए। इन सभी तथ्यों को याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी एवं लवनीश भाती द्वारा 4 अगस्त को सर्वोच्च न्यायलय की अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाएगा। निगम का असफल प्रयास शिकायतकर्ता त्रिपाठी ने बताया, नगर निगम की इस लाचार कार्रवाई से प्रभावशाली संचालकों के अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बचाने का असफल प्रयास है। तभी इन अवैध भवनों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही। इससे आम नागरिकों एवं रहवासियों का जिला प्रशासन पर विश्वास डगमगा चुका है।
