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संडे एमपी मानसून अपडेट: आधे भी नहीं भरे डैम:जबलपुर-ग्वालियर समेत 43 जिलों में सामान्य से कम बारिश; 5 में 10 इंच से भी कम

मध्य प्रदेश में जुलाई के महीने में मानसून ने 2 बार लंबा ब्रेक लिया। आखिरी सप्ताह में तेज बरसा। बावजूद वह जून की भरपाई नहीं कर पाया। इस वजह से प्रदेश में 13% बारिश कम हुई है। जबलपुर-ग्वालियर समेत 43 जिले ऐसे हैं, जहां सामान्य से कम बारिश हुई है। 5 जिलों में तो 10 इंच पानी भी नहीं बरसा है। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 15.7 इंच बारिश हो चुकी है। यह औसत बारिश 18.1 इंच से 2.4 कम है। यानी, प्रदेश में 13% पानी कम गिरा है। ऐसे में जलस्रोतों में पानी नहीं आया है। कोलार, बाणसागर, कुंडालिया, बरना, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, गांधीसागर, तिघरा समेत कई डैम आधे भी नहीं भरे हैं, जबकि पिछले साल जुलाई में ही डैम फुल हो गए थे। अबकी बार सिर्फ बैतूल स्थित सतपुड़ा डैम के ही 7 गेट खुले हैं। डैमों में पानी नहीं आने से जलसंकट की स्थिति पैदा हो जाएगी। वर्तमान में कई शहरों में पानी की नियमित सप्लाई भी नहीं हो रही है। सोयाबीन के लिए मौसम ठीक
शाजापुर के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एसएस धाकड़ ने बताया कि इंदौर-उज्जैन संभाग के ज्यादातर जिलों में सोयाबीन का उत्पादन होता है। वर्तमान में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो रही है। इसलिए सोयाबीन के लिहाज से यह मौसम ठीक है। जब दाना बनेगा, तब ज्यादा पानी की जरूरत रहेगी। खंडवा, खरगोन-बड़वानी की तरफ भारी बारिश होने से खेतों में पानी भर गया और फसलों को नुकसान पहुंचा है। धान की खेती के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं गिरा है। इस बार 9 दिन लेट आया था मानसून
बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। चौथे सप्ताह में भी भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। अगस्त के पहले दिन प्रदेश में भारी बारिश का दौर थम गया। हालांकि, अगले सप्ताह से प्रदेश में फिर से तेज बारिश शुरू होगी। इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। बालाघाट में 24 इंच पानी गिरा, मुरैना में 6.3 इंच ही
मौसम विभाग की माने तो प्रदेश में सबसे ज्यादा बारिश बालाघाट में करीब 24 इंच हो चुकी है। हालांकि, कोटे की यह आधी भी नहीं है। कोटे की बात करें तो बुरहानपुर सबसे आगे हैं। यहां 77 प्रतिशत यानी, 22.5 इंच पानी गिर चुका है। सबसे कम पानी मुरैना में 6.3 इंच ही हुई है। एमपी में इन जिलों में कम/ज्यादा बारिश इन 43 जिलों में कम बारिश- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, सागर, सतना, सिवनी, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, धार, गुना, हरदा, झाबुआ, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा। इन 12 जिलों में ज्यादा बारिश- भोपाल, शहडोल, बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा, खरगोन, सीहोर, उमरिया और बड़वानी। ऐसे समझें बारिश का गणित… सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले 20 इंच से ज्यादा- सीहोर, बुरहानपुर, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और देवास। 10 से 20 इंच तक- भोपाल, राजगढ़, रायसेन, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, बड़वानी, खंडवा, खरगोन जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, उज्जैन, रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच, आगर-मालवा, भिंड, सिंगरौली, सीधी, सतना, नर्मदापुरम, हरदा, बैतूल, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर। 10 से कम बारिश- आलीराजपुर, दतिया, मुरैना, श्योपुर और रीवा। मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि जुलाई का आखिरी सप्ताह बेहतर रहा है। खासकर पश्चिमी हिस्से में तेज बारिश रिकॉर्ड की गई। इस सप्ताह भी भारी बारिश होने का अनुमान है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम भोपाल: भोपाल में कोटे की आधी बारिश हो गई है। अब तक करीब 19 इंच पानी गिर चुका है। संभाग के सीहोर, राजगढ़, रायसेन और विदिशा में 38 से 48% बारिश हुई है। अगला सप्ताह बारिश के लिहाज से ठीक रहेगा। 4 अगस्त से तेज बारिश होने का अनुमान है। इंदौर: बारिश के मामले में इंदौर की स्थिति फिलहाल बेहतर है। यहां 17.5 इंच बारिश हुई है। बुरहानपुर में कोटे की 77 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जबकि खरगोन, खंडवा और बड़वानी में आधी बारिश हुई है। आलीराजपुर में सबसे कम करीब 10 इंच पानी ही गिरा है। जबलपुर: जबलपुर में अब तक 16.3 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह कोटे की 44 प्रतिशत है। इस सप्ताह यहां भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। डिंडौरी, बालाघाट और सिवनी में भी अच्छा पानी गिरा है। उज्जैन: उज्जैन में कोटे की 45 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। 15.7 इंच बारिश होने से काफी राहत मिली है। देवास में 21.8 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे से 61 प्रतिशत तक है। रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा में 12 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। ग्वालियर: इस बार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे लेट पहुंचा। फिर भी बारिश के आंकड़े राहत दे रहे हैं। दतिया और शिवपुरी को छोड़ दें तो बाकी जिलों में 38 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले सप्ताह से यहां भी तेज बारिश का दौर शुरू होगा।

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