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इंदौर में बिना अनुमति संचालित हो रहे 25 आश्रम:वृद्धाश्रम के लिए अनुमति सिर्फ 6 के पास, सीसीटीवी कैमरे नहीं, रिकॉर्ड भी अधूरा

इंदौर के बाणगंगा स्थित प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में 14 वर्षीय बालक द्वारा बुजुर्गों की डंडे से पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद जिले में संचालित आश्रमों की व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। इंदौर में सामाजिक न्याय विभाग से सिर्फ 6 वृद्धाश्रमों को ही विधिवत अनुमति मिली है, जबकि जिले में 25 से अधिक आश्रम बिना अनुमति के संचालित हो रहे हैं। इनमें कई जगह बुजुर्गों के साथ बच्चों को भी रखा जा रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि समाजसेवा के नाम पर कई संस्थाओं ने बड़े-बड़े आश्रम तो बना लिए, लेकिन जरूरी सरकारी अनुमति नहीं ली। सबसे बड़ी बात यह है कि सामाजिक न्याय विभाग के रिकॉर्ड में इन संस्थाओं का नाम तक दर्ज नहीं है। जिसके कारण इन आश्रमों में निगरानी ही नहीं हो पा रही है। जिले के देवगुराड़िया स्थित जानकी वृद्धाश्रम, कालानी नगर के उन्मुक्त आनंद आश्रम और नमो नवकार आश्रम, कुशवाह नगर का नमो नमो आश्रम, नैनोद रोड स्थित राजशांति आशियाना, एलआईजी और चाणक्यपुरी के गोल्ड कॉइन आश्रम, मानवता की पहचान आश्रम और श्रीराम निराश्रित आश्रम सहित कई संस्थाएं बिना सामाजिक न्याय विभाग की अनुमति के संचालित हो रही हैं। इन संस्थाओं ने केवल फर्म एंड सोसायटी में पंजीयन कराया है। नियमानुसार तीन वर्ष संचालन के बाद सामाजिक न्याय विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करने के कारण कई संस्थाओं को अनुमति नहीं मिल पाई है। इसके बावजूद इनका संचालन जारी है। सीसीटीवी कैमरे नहीं, रिकॉर्ड भी अधूरा
पड़ताल में सामने आया कि बिना अनुमति संचालित अधिकांश आश्रमों में सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। कई संस्थाओं में रहने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित नहीं रखा जा रहा। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि आश्रम में कितने लोग रह रहे हैं, उनकी स्वास्थ्य स्थिति क्या है और उनकी देखभाल किस तरह की जा रही है। इन आश्रमों में एमवाय सहित अन्य शासकीय अस्पतालों से लोगों को लेकर जाते हैं। बच्चों का आश्रम भी बिना जरूरी अनुमति
कालानी नगर स्थित नमो नवकार आश्रम में करीब 35 बच्चे रह रहे हैं। आश्रम के पास महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग की आवश्यक अनुमति नहीं है। आश्रम संचालिका पम्मी शाह का कहना है कि संस्था पिछले चार वर्षों से संचालित हो रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यक अनुमति की जानकारी पहले नहीं थी, लेकिन अब अनुमति के लिए आवेदन किया जा रहा है। अभी तक नहीं हुई एफआईआर
प्रेमाश्रय वृद्धाश्रम में बच्चे द्वारा बुजुर्गों के साथ मारपीट करने के बाद कलेक्टर शिवम वर्मा ने FIR दर्ज करवाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शुक्रवार को प्रशासन की टीम आश्रम पहुंची थी और संचालिका नीलम दूबे के बयान लिए। ऐसे मिलती है आश्रम संचालन की अनुमति
किसी भी सामाजिक संस्था की शुरुआत फर्म एंड सोसायटी में कम से कम सात सदस्यों के हस्ताक्षर के साथ पंजीयन आवेदन से होती है। पंजीयन मिलने के बाद संस्था को अपने सामाजिक कार्यों का विवरण देना होता है। तीन वर्ष तक नियमित संचालन के बाद सामाजिक न्याय विभाग में अनुमति के लिए आवेदन किया जाता है। आवेदन के दौरान संस्था को ऑडिट रिपोर्ट, स्टाफ का पूरा विवरण, भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं। सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही विभाग संचालन की अनुमति जारी करता है। आठ में से छह के पास अनुमति
सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त संचालक पवन चौहान ने बताया कि हमें इंदौर में संचालित कुल आठ आश्रमों की जानकारी है। छह के पास अनुमति है और दो आश्रमों के आवेदन हमारे पास आए हैं। हम यहां निरीक्षण करते हैं। इसके अलावा किसी आश्रम की जानकारी नहीं है। फर्म एंड सोसायटी में सिर्फ एनजीओ का रजिस्ट्रेशन होता है। इसके बाद जिस भी विभाग के साथ कार्य करना हो, वहां आवेदन करना होता है। विभाग द्वारा निरीक्षण के दौरान देखा जाता है कि सभी गाइडलाइन का पालन हुआ है या नहीं। इसके बाद ही अनुमति दी जाती है।

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