उज्जैन में बाबा महाकाल की सवारी 3 अगस्त से शुरू होगी। हर साल सवारी में एक टोली ऐसी भी होती है, जो अपनी अनोखी पगड़ियों, राजसी वेशभूषा और सांस्कृतिक संदेशों से श्रद्धालुओं का ध्यान खींचती है। शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ और उनकी टीम पिछले 39 वर्षों से लगातार बाबा महाकाल की सवारी में शामिल हो रही है। हर साल यह टोली अलग-अलग थीम और राजसी अंदाज के साथ बाबा महाकाल की पालकी के आगे चलती है। इस बार सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए विशेष पगड़ी तैयार की गई है। स्वामी मुस्कुराके के मुताबिक, सवारी के दौरान वे करीब 15 किलो वजन की वेशभूषा और श्रृंगार धारण कर लगभग 7 घंटे तक पैदल चलते हैं। सवारी शुरू होने से करीब तीन घंटे पहले, दोपहर 1 बजे से वे टूथपिक की मदद से खुद ही तिलक और श्रृंगार करते हैं। इस पूरी तैयारी में कई घंटे लगते हैं। 200 से ज्यादा पगड़ियों का संग्रह
स्वामी मुस्कुराके के पास 200 से अधिक पगड़ियां, 150 से ज्यादा राजसी वेशभूषाएं और 100 से अधिक मालाओं व अंगूठियों का संग्रह है। वे बताते हैं कि शुरुआत में वेशभूषा उधार लेकर सवारी में शामिल होते थे। समय के साथ मेहनत और साधना से उन्होंने अपना यह अनूठा संग्रह तैयार किया। टोली में 5 सदस्य, हर साल अलग अंदाज
स्वामी मुस्कुराके की टोली में स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिल मिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। पूरी टोली हर साल अलग राजसी वेशभूषा और अनोखी पगड़ियों के साथ सवारी में शामिल होती है। बाबा महाकाल की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहती है। राष्ट्रपति सम्मान समेत 1000 सम्मान
स्वामी मुस्कुराके को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब तक करीब 1000 सम्मान मिल चुके हैं। इनमें राष्ट्रपति सम्मान को वे अपने जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। महाकाल की सवारी में उनकी वर्षों से जारी भागीदारी ने उन्हें उज्जैन की इस धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में अलग पहचान दिलाई है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ब्रह्मोस’ थीम भी रही चर्चा में
पिछले साल स्वामी मुस्कुराके ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘ब्रह्मोस मिसाइल’ थीम की पगड़ी पहनकर देशभक्ति का संदेश दिया था। उनकी यह पगड़ी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी बेहद पसंद आई थी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। इस बार सिंहस्थ महाकुंभ की थीम
इस बार सिंहस्थ महाकुंभ को ध्यान में रखते हुए विशेष सिंहस्थ थीम की पगड़ी तैयार की गई है। इसके अलावा नागपंचमी पर भी स्वामी मुस्कुराके अलग वेशभूषा में नजर आएंगे। हर साल की तरह इस बार भी उनकी तैयारी का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के साथ सांस्कृतिक और सामाजिक संदेश को लोगों तक पहुंचाना है।
