समाजवादी पार्टी मध्यप्रदेश ने एमपी सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए एक अनोखी मांग की है। सपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ मनोज यादव ने सरकार की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार किसानों की पूरी मूंग की फसल खरीदने को तैयार नहीं है और MSP पर महज 60% खरीदी का झुनझुना थमा रही है, तो फिर प्रदेश के विधायक, सांसद और मंत्री भी पूरा वेतन क्यों ले रहे हैं? जन प्रतिनिधियों को भी केवल 60% सैलरी ही लेनी चाहिए। किसान अपनी फसल 100% बेचे और नेता वेतन पूरा उठाएं, यह दोहरा मापदंड कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सपा नेता ने कहा कि ढाई महीने तक दिन-रात पसीना बहाकर किसान 100% फसल उगाता है, लेकिन सरकार उसकी मेहनत का केवल एक हिस्सा ही MSP पर खरीदती है और बाकी फसल खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बेचने के लिए मजबूर कर देती है। अगर सरकार के पास किसान की उपज का पूरा दाम देने की क्षमता नहीं है, तो नेताओं को जनता के टैक्स के पैसे से 100% सैलरी उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर सीधा हमला समाजवादी पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को घेरते हुए कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि केंद्रीय कृषि मंत्री खुद मध्य प्रदेश से आते हैं और केंद्र व राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है। इसके बावजूद मूंग उत्पादक किसानों को अपने अधिकार के लिए नर्मदापुरम से भोपाल तक पैदल मार्च करना पड़ रहा है। ‘डबल इंजन’ की सरकार सिर्फ पत्राचार और कागजी घोषणाओं तक सीमित रह गई है। सपा ने तंज कसते हुए कहा कि किसानों के उग्र आंदोलन के बाद सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% की है, जो कि पूरी तरह नाकाफी है। जब तक 100% मूंग ₹10,000 प्रति क्विंटल की MSP पर नहीं खरीदी जाती, तब तक किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। खाद संकट, इथेनॉल चावल घोटाला और केन-बेतवा का मुद्दा प्रेस विज्ञप्ति में समाजवादी पार्टी ने प्रदेश की अन्य प्रमुख समस्याओं पर भी सरकार को आड़े हाथों लिया। खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है, जहां ई-टोकन प्रणाली के कारण किसान 100-150 किलोमीटर दूर भटकने को मजबूर हैं। सरकारी केंद्रों पर खाद गायब है, जबकि खुले बाजार में ₹2000 से ₹2500 प्रति बोरी की दर से कालाबाजारी हो रही है। इसके साथ ही सपा ने बालाघाट सहित 17 जिलों में कुपोषित बच्चों और महिलाओं के लिए आरक्षित ₹1160 करोड़ के फोर्टिफाइड चावल को एथेनॉल बनाने के नाम पर निजी राइस मिलों को बेचने का गंभीर आरोप लगाया है और मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित हो रहे छतरपुर और पन्ना के 24 गांवों के 7,193 परिवारों (विशेषकर आदिवासियों) के लिए ₹25 लाख का पुनर्वास पैकेज और 3 एकड़ जमीन देने की पुरजोर पैरवी की गई है। समाजवादी पार्टी की प्रमुख मांगें समाजवादी पार्टी मांग करती है कि या तो नेताओं का वेतन काटा जाए या फिर प्रदेश के प्रत्येक किसान की पूरी मूंग की उपज ₹10,000 प्रति क्विंटल की MSP पर खरीदी जाए। खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाकर हर समिति स्तर पर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा, ₹1160 करोड़ के इथेनॉल चावल घोटाले की जांच के लिए तत्काल न्यायिक आयोग का गठन हो और केन-बेतवा परियोजना प्रभावितों को ₹25 लाख मुआवजा व 3 एकड़ जमीन दी जाए। समाजवादी पार्टी मध्य प्रदेश के किसानों, आदिवासियों और शोषितों के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ाई जारी रखेगी।
