केंद्र सरकार द्वारा आदिवासी बहुल इलाकों में समग्र विकास के लिए शुरू किए गए ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (डीएजेजीयूए) के क्रियान्वयन को लेकर संसद में आंकड़े सामने आए हैं। राज्यसभा में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने देश भर के 63,843 जनजातीय बहुल गांवों में चल रही मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की राज्यवार रिपोर्ट पेश की। संसदीय रिपोर्ट के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश को चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में देश में सबसे अधिक 30,865.92 लाख (308.65 करोड़) रुपए की निधि आवंटित की गई है। राज्य में नल-जल योजना, ग्रामीण आवास, एलपीजी वितरण, मत्स्य पालन और पशुधन विकास के क्षेत्र में अच्छा काम हुआ है, जबकि मोबाइल नेटवर्क, सड़क निर्माण और जनजातीय छात्रावासों के निर्माण के मोर्चे पर प्रोग्रेस स्लो है। नल जल योजना में 54% टारगेट पूरा हुआ मध्य प्रदेश में 11,309 लक्षित गांवों में से 6,112 गांवों (54.05%) तक नल-जल सुविधा पहुंच चुकी है, जो 47% के राष्ट्रीय औसत से बेहतर है और राज्य देश में निचले क्रम से 12वें स्थान पर है। वहीं, योजना में सबसे फिसड्डी प्रदर्शन केरल का रहा, जहां 89 में से महज 1 गांव (1.00%) में ही नल से जल पहुंच पाया है। केरल के अलावा त्रिपुरा (11.33%), पश्चिम बंगाल (18.71%), राजस्थान (19.57%) और मणिपुर (22.99%) भी बेहद धीमी गति के साथ देश के सबसे फिसड्डी राज्यों में शामिल हैं। एमपी में 41 फीसदी आवास बने ग्रामीण आवास के मामले में मध्य प्रदेश को देश में सबसे ज्यादा 3,68,395 मकानों की स्वीकृति मिली, जिनमें से 1,52,309 मकान (41.34%) बनकर तैयार हो चुके हैं और राज्य निचले क्रम से 14वें स्थान पर है। इस योजना में पश्चिम बंगाल का प्रदर्शन पूरे देश में सबसे निराशाजनक और फिसड्डी रहा, जहां 48,232 स्वीकृत मकानों में से केवल 61 मकान (0.12%) ही बन सके हैं। केरल (4.24%), आंध्र प्रदेश (13.01%), कर्नाटक (13.32%) और झारखंड (15.41%) भी देश में सबसे कम मकान बनाने वाले फिसड्डी राज्यों में शुमार हैं। 39% आदिवासी परिवारों तक ही बिजली पहुंची ऑन-ग्रिड घरेलू बिजली वितरण में मध्य प्रदेश के 59,822 लक्षित परिवारों में से 23,416 (39.14%) को बिजली से जोड़ा गया, जो 34% के राष्ट्रीय औसत से अधिक है और राज्य निचले क्रम से 9वें स्थान पर है। इस मोर्चे पर जम्मू-कश्मीर (0.00%) और झारखंड (0.00%) सबसे फिसड्डी साबित हुए हैं, जहां स्वीकृत परिवारों में से एक भी घर तक बिजली नहीं पहुंची है। इनके साथ उत्तर प्रदेश (1.74%), राजस्थान (13.97%) और हिमाचल प्रदेश (15.00%) का प्रदर्शन भी बेहद कमजोर दर्ज किया गया है। मोबाइल नेटवर्क में भी एमपी देश में पांचवें नंबर पर मध्य प्रदेश के 776 नेटवर्क विहीन जनजातीय गांवों में से 571 गांवों (73.58%) में ही मोबाइल टावर लग सके हैं, जिससे एमपी और उत्तर प्रदेश (73.58%) संयुक्त रूप से देश में नीचे से 5वें स्थान पर खड़े हैं। इस सुविधा में सबसे फिसड्डी स्थिति जम्मू-कश्मीर की रही, जहां लक्षित गांवों में से केवल 20.00% गांवों में ही मोबाइल टावर स्थापित हो सके हैं। इसके अलावा गोवा (40.00%), कर्नाटक (63.16%) और छत्तीसगढ़ (67.64%) भी मोबाइल कनेक्टिविटी के मामले में सबसे पीछे छूटने वाले राज्यों में शामिल हैं। छात्रावास बनाने में एमपी सबसे फिसड्डी
जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाने में मध्य प्रदेश की स्थिति निराशाजनक है, जहां स्वीकृत 104 छात्रावासों के लिए 10,740 लाख रुपए जारी होने के बावजूद जमीनी स्तर पर 0.00% काम पूरा हुआ है। हालांकि, यह फिसड्डीपन केवल एमपी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 22 राज्यों में निर्माण कार्य 0% पर अटका हुआ है। राजस्थान (58 स्वीकृत), अरुणाचल प्रदेश (45), मणिपुर (44) और छत्तीसगढ़ (42) जैसे राज्य भी 0% निर्माण पूर्णता के साथ सबसे फिसड्डी श्रेणी में खड़े हैं, जबकि देश भर में केवल असम ही एकमात्र राज्य है जहां 4 छात्रावास बनकर तैयार हुए हैं। 345 सड़कें मंजूर हुई, बनी एक भी नहीं जनजातीय बसावटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के मामले में मध्य प्रदेश में 913 किलोमीटर की 345 सड़कें स्वीकृत की गई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर निर्माण पूरा होने की दर शून्य (0.00%) रही है। देश भर में सड़क निर्माण के मामले में 13 राज्य पूरी तरह फिसड्डी साबित हुए हैं, जहां एक किलोमीटर सड़क का निर्माण भी पूरा नहीं हो पाया है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा (629 किमी स्वीकृत), जम्मू-कश्मीर (512 किमी), राजस्थान (291 किमी) और हिमाचल प्रदेश (285 किमी) जैसे राज्य 0 किमी पूर्णता के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वालों में हैं, जबकि पूरे देश में केवल छत्तीसगढ़ ही 3.9 किमी सड़क पूरी कर सका है। आदिवासियों को गैस कनेक्शन देने में पहले नंबर पर धरती आबा योजना के तहत अनुसूचित जनजाति (ST) के परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन वितरित करने में मध्य प्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा है, जहां स्वीकृत 2,00,709 कनेक्शनों में से रिकॉर्ड 39,862 कनेक्शन लाभार्थियों को बांटे जा चुके हैं। वहीं, इस योजना में उत्तर प्रदेश देश का सबसे फिसड्डी राज्य साबित हुआ है, जहां 4,02,807 स्वीकृत कनेक्शनों में से मात्र 856 कनेक्शन (0.21%) ही जनजातीय परिवारों तक पहुंचे हैं। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार (0.51%), आंध्र प्रदेश (3.25%), झारखंड (4.75%) और असम (4.78%) भी सबसे कम प्रतिशत वितरण के साथ फिसड्डी राज्यों की सूची में शामिल हैं।
