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बालाघाट में वर्ल्ड टाइगर डे पर मिला बाघ का शव:लालबर्रा में आपसी संघर्ष की आशंका; चोटों के निशान देख पेंच से बुलाए डॉक्टर

बालाघाट जिले के सोनेवानी वन अभ्यारण्य में बुधवार को विश्व बाघ दिवस के दिन एक नर बाघ का शव मिला। बाघ के शरीर पर कई घाव के निशान मिले हैं, जिससे कयास लगाए जा रहे हैं कि उसकी मौत बाघों की आपसी लड़ाई में हुई होगी। दुर्गंध आने के कारण शव करीब दो से तीन दिन पुराना माना जा रहा है। पोस्टमार्टम के बाद होगा सही कारणों का खुलासा घटना की सूचना मिलते ही बहियाटिकुर बीट (कक्ष क्रमांक 443) में वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा और शव को अपने कब्जे में लिया। प्रोटोकॉल के तहत जांच के लिए पेंच नेशनल पार्क से वन्यजीव चिकित्सक को बुलाया गया है। डीएफओ एल नित्यानंद ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद ही बाघ की उम्र और मौत के सही कारणों का खुलासा होगा। इसी जगह पहले भी मिल चुका शव लालबर्रा वन परिक्षेत्र के इसी स्थान पर 2 अगस्त 2025 को भी एक बाघ मृत मिला था, जिसका बिना सूचना दिए अंतिम संस्कार कर दिया गया था। उस मामले में एसटीएफ जबलपुर ने दो वनकर्मियों समेत आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। बाघों की लगातार मौतों पर वन्यजीव प्रेमियों ने जताई चिंता घटना पर चिंता जाहिर करते हुए वन्यजीव प्रेमी सिकंदर मिश्रा और ज्ञानचंद शर्मा ने कहा कि लालबर्रा क्षेत्र में बाघों की निगरानी व्यवस्था कमजोर है। उन्होंने बताया कि महीनों से लापता बाघिन ‘गौरा’ और उसके शावकों का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। यह खबर भी पढ़ें… टाइगर स्टेट में ही टाइगर को बचाना मुश्किल: 2026 में हो चुकी है 29 बाघों की मौत, आपसी संघर्ष और करंट बना खतरा 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day) मनाया जाएगा, लेकिन देश के सबसे बड़े टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश के लिए यह दिन उत्सव से ज्यादा चिंता का संदेश लेकर आया है। एमपी में सबसे ज्यादा बाघ हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जंगलों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंच रहे बाघ लगातार करंट, संघर्ष, बीमारी और मानवीय गतिविधियों का शिकार हो रहे हैं। इसी साल जनवरी से अप्रैल के बीच प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज हो चुकी है, जिनमें पांच की मौत बिजली के करंट से हुई। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2025 के बीच देशभर में 1,581 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं। यानी देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के साथ-साथ सबसे अधिक टाइगर मॉर्टेलिटी भी मध्यप्रदेश में ही दर्ज की गई है। पढ़ें पूरी खबर

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