सफलता सिर्फ मंजिल तक पहुंचने का नाम नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और अपने सपनों पर अटूट विश्वास का दूसरा नाम है। ग्वालियर की गायिका अंकिता कैलासिया की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें एक समय अपनी पसंदीदा गायकी छोड़कर मात्र 4 हजार रुपए महीने की नौकरी करनी पड़ी थी। आज वही अंकिता देश की प्रतिष्ठित म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज के लिए भजन गा रही हैं और मध्य प्रदेश के स्वच्छता अभियान की सशक्त आवाज बन चुकी हैं। इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण चल रहा है। ऐसे में ग्वालियर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के कई शहरों में सुबह-सुबह लोगों को स्वच्छता का संदेश देने वाले गीत सुनाई देते हैं। इन गीतों की आवाज अंकिता कैलासिया की है। भक्ति संगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुकी अंकिता ने अपनी गायकी को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर एक नई मिसाल पेश की है। उनके लिखे और गाए स्वच्छता गीत आज प्रदेश के दर्जनों शहरों और नगरीय निकायों में नियमित रूप से प्रसारित किए जा रहे हैं। पहली कक्षा से शुरू हुआ संगीत का सफर अंकिता बताती हैं कि संगीत से उनका जुड़ाव बचपन से रहा है। पहली कक्षा में उन्होंने पहली बार मंच पर गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद संगीत के प्रति उनका लगाव लगातार बढ़ता गया। हाईस्कूल पहुंचने पर उन्होंने मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए आठ बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में विजेता रहीं। तभी उन्होंने तय कर लिया था कि संगीत ही उनकी पहचान बनेगा। 2018 में बदली करियर की दिशा साल 2018 अंकिता के जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ। उन्होंने केवल गायकी तक सीमित रहने के बजाय अपनी आवाज और लेखनी को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का फैसला किया। स्वच्छ भारत अभियान के लिए उन्होंने गीत लिखने और गाने शुरू किए। उनका पहला स्वच्छता गीत रायसेन जिले की गैरतगंज नगर परिषद के लिए तैयार किया गया। यह गीत इतना पसंद किया गया कि दूसरे जिलों के कलेक्टरों, नगर निगमों और नगरीय निकायों से भी लगातार प्रस्ताव आने लगे। आज वे 90 से अधिक स्वच्छता गीत लिख और गा चुकी हैं और जल्द ही यह संख्या 100 तक पहुंचने वाली है। इन गीतों को उनके पति अनूप कैलासिया ने संगीतबद्ध किया और कई गीतों में अपनी आवाज भी दी। दोनों की जोड़ी आज मध्य प्रदेश के स्वच्छता अभियान की पहचान बन चुकी है। आज मध्य प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में अंकिता के गीत नगर निगमों और नगरीय निकायों के माध्यम से लोगों तक पहुंच रहे हैं। मुख्यमंत्री से मिला सम्मान अंकिता के योगदान को राज्य सरकार ने भी सराहा। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में उन्हें सम्मानित किया और मध्य प्रदेश के लिए विशेष गीत तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद उन्होंने केवल स्वच्छता ही नहीं, बल्कि दीनदयाल अंत्योदय योजना, हर घर तिरंगा अभियान, मतदाता जागरूकता अभियान और कई जिलों के गौरव गीत भी तैयार किए। ग्वालियर, दतिया, खंडवा सहित कई जिलों में उनके गीत आज भी सुनाई देते हैं। टी-सीरीज तक पहुंचा सफर सरकारी अभियानों के साथ-साथ अंकिता का संगीत सफर भी लगातार आगे बढ़ता गया। पिछले दो वर्षों से वे टी-सीरीज के ‘भक्ति सागर’ सेगमेंट के लिए लगातार भजन रिकॉर्ड कर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने मुंबई में बॉलीवुड गायक शान के साथ एक कॉर्पोरेट गीत भी रिकॉर्ड किया है। कई अन्य कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स में भी वे अपनी आवाज दे चुकी हैं। यह उपलब्धि बताती है कि छोटे शहर की प्रतिभा मेहनत और सही दिशा मिले तो राष्ट्रीय मंच तक पहुंच सकती है। संघर्ष ने बनाई सफलता की नींव अंकिता की सफलता के पीछे लंबा संघर्ष रहा है। आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें अपनी पसंद की गायकी छोड़कर एक निजी कंपनी में 4 हजार रुपए प्रतिमाह की नौकरी करनी पड़ी। इसी दौरान उनकी मुलाकात संगीतकार और साउंड इंजीनियर अनूप कैलासिया से हुई और दोनों ने प्रेम विवाह किया। अनूप भी संगीत की दुनिया में संघर्ष कर चुके थे। मुंबई में करियर बनाने की कोशिश के दौरान पिता के निधन के बाद उन्हें ग्वालियर लौटना पड़ा। पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण दोनों के सपने कुछ समय के लिए जरूर थम गए, लेकिन खत्म नहीं हुए। शादी के बाद अंकिता नौकरी करती रहीं, जबकि अनूप ने एमपीपीएससी की तैयारी की। चयन होने के बाद वे ग्वालियर के एमएलबी कॉलेज में प्रोफेसर बने। इसके बाद दोनों ने फिर से संगीत को अपना पूरा समय दिया और आज उनकी मेहनत रंग ला चुकी है। अब बॉलीवुड की ओर बढ़ रहे कदम अंकिता और अनूप अब केवल भक्ति संगीत या सरकारी अभियानों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशभर में लाइव कॉन्सर्ट कर रहे हैं। वे भजन सम्राट अनूप जलोटा के साथ कई मंच साझा कर चुके हैं और आगे भी संयुक्त प्रस्तुतियों की तैयारी है। साथ ही, बॉलीवुड से भी उन्हें नए प्रोजेक्ट्स के प्रस्ताव मिल रहे हैं। अंकिता कैलासिया की कहानी बताती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, यदि सपनों को जिंदा रखा जाए और लगातार मेहनत की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।
