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टाइगर स्टेट में ही टाइगर को बचाना मुश्किल:2026 में हो चुकी है 29 बाघों की मौत, आपसी संघर्ष और करंट बना खतरा

29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day) मनाया जाएगा, लेकिन देश के सबसे बड़े टाइगर स्टेट मध्य प्रदेश के लिए यह दिन उत्सव से ज्यादा चिंता का संदेश लेकर आया है। एमपी में सबसे ज्यादा बाघ हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा अब सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। जंगलों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंच रहे बाघ लगातार करंट, संघर्ष, बीमारी और मानवीय गतिविधियों का शिकार हो रहे हैं। इसी साल जनवरी से अप्रैल के बीच प्रदेश में 29 बाघों की मौत दर्ज हो चुकी है, जिनमें पांच की मौत बिजली के करंट से हुई। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012 से 2025 के बीच देशभर में 1,581 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें अकेले 423 मौतें मध्यप्रदेश में हुईं। यानी देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य होने के साथ-साथ सबसे अधिक टाइगर मॉर्टेलिटी भी मध्यप्रदेश में ही दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों का सिकुड़ता दायरा, मानव-बाघ संघर्ष, अवैध करंट, प्राकृतिक कारण और आपसी संघर्ष बाघों की मौत के प्रमुख कारण बन रहे हैं। ऐसे में विश्व बाघ दिवस पर संरक्षण की योजनाओं के साथ जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। चार महीनों में 29 मौतें, पांच की करंट से जान गई वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक 1 जनवरी से 29 अप्रैल 2026 के बीच प्रदेश में 29 बाघों की मौत हुई। इनमें 5 मौतें बिजली के करंट से हुईं। एक मामले में शिकार की पुष्टि हुई, जबकि बाकी मामलों में आपसी संघर्ष, बीमारी, कुएं में गिरना और दूसरे प्राकृतिक कारण सामने आए। करंट से हुई मौतें मंडला, शहडोल, उमरिया और सिवनी वन क्षेत्रों में दर्ज हुईं। देश में सबसे ज्यादा टाइगर मॉर्टेलिटी मध्य प्रदेश में NTCA के आंकड़े बताते हैं कि 2012 से 2025 के बीच देशभर में 1,581 बाघों की मौते दर्ज हुई। इनमें 423 मौतें अकेले मध्यप्रदेश में हुई। खेतों में लगी तार से जा रही बाघों की जान बाघों की सबसे ज्यादा मौतें प्राकृतिक कारणों, खासकर आपसी संघर्ष (टेरिटोरियल फाइट) में होती हैं। लेकिन इंसानों से जुड़े कारणों में बिजली का करंट सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरा है। 2025 में 8 बाघ करंट से मरे, जबकि 2026 के पहले चार महीनों में ही 5 मौतें इसी वजह से हो चुकी हैं। इसके अलावा ट्रेन दुर्घटना, सड़क हादसे और शिकार के मामले भी सामने आए हैं। देश में 2023, मध्य प्रदेश में 2025 सबसे घातक साल NTCA के आंकड़ों के मुताबिक 2023 में पूरे देश में सबसे ज्यादा 182 बाघों की मौत दर्ज हुई। इसके बाद 2024 और 2025 में मौतों का आंकड़ा 2023 से कम रहा। वहीं मध्य प्रदेश में 2025 में सबसे ज्यादा 55 बाघों की मौत दर्ज हुई। इससे पहले 2023 में 45 और 2024 में 47 बाघों की मौत हुई थी। जबकि 2026 के पहले चार महीनों (जनवरी–अप्रैल) में ही मध्यप्रदेश में 29 बाघों की मौत हो चुकी है। यानी औसतन हर चार दिन में एक बाघ की जान गई। हर दूसरी मौत जंगल के बाहर पहले माना जाता था कि बाघ जंगल के भीतर ज्यादा सुरक्षित हैं, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। NTCA के मुताबिक 2012 से अब तक 52.5 प्रतिशत मौतें टाइगर रिजर्व के अंदर और 47.5 प्रतिशत मौतें रिजर्व के बाहर हुई हैं। इतना ही नहीं, बाघों की खाल और शरीर के अंगों की 80.7 प्रतिशत बरामदगी भी रिजर्व के बाहर हुई। सर्दियों में हो रही ज्यादा मौतें राष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि जनवरी बाघों के लिए सबसे घातक महीना रहा। इस महीने 190 टाइगर मॉर्टेलिटी रिकॉर्ड दर्ज हुए। इसके बाद दिसंबर और मई में 165-165, अप्रैल में 148, फरवरी में 145 और मार्च में 138 मामले सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि सर्दियों में बाघों की आवाजाही और क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने से मौतों की संख्या भी बढ़ जाती है। नर बाघ ज्यादा मरे रहे हैं NTCA के 2012 से 2025 के आंकड़ों के मुताबिक 53.9% नर और 46.1% मादा बाघों की मौत हुई है। यानी इस अवधि में मादा बाघों की तुलना में नर बाघों की मौत अधिक दर्ज की गई। बाघ का संरक्षण भी जरूरी- नेता प्रतिपक्ष नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिखा कि केवल बाघों की संख्या बढ़ाना ही संरक्षण नहीं है। बाघों के जंगल, प्राकृतिक आवास और कॉरिडोर सुरक्षित रहेंगे तभी उनकी मौतें और मानव-बाघ संघर्ष कम होगा। उन्होंने मांग की कि टाइगर कॉरिडोर से जुड़ी सभी परियोजनाओं का वैज्ञानिक आकलन सार्वजनिक किया जाए और विकास कार्य पर्यावरणीय संतुलन के साथ किए जाएं। विकास परियोजनाएं ऐसी हों जो जंगल और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना आगे बढ़ें। बाघों के प्राकृतिक आवास और कॉरिडोर प्रभावित होने से मानव-बाघ संघर्ष और बाघों की मौत का खतरा बढ़ रहा है। बाघों की मौतों को कैसे रोका जा सकता है वाइल्डलाइफ एक्टविस्ट अजय दुबे के मुताबिक मध्यप्रदेश में बाघों की मौत रोकने के लिए वाइल्डलाइफ क्राइम अधिकारियों की फील्ड में तैनाती बढ़ाई जाए, मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया जाए और स्थानीय ग्रामीणों के बीच विश्वास कायम किया जाए, ताकि इंसानों और बाघों के बीच संघर्ष भी कम हो और शिकारियों की गतिविधियां भी विफल हों। बिजली के तार, जहर और अन्य तरीकों से बाघों के शिकार पर रोक लगाने के लिए कानून का सख्ती से पालन कराया जाए। वर्तमान में वन्यजीव अपराधों में दोष सिद्धि का प्रतिशत कम है। इसे बढ़ाने के लिए अदालतों में मजबूत पैरवी होनी चाहिए। इससे कानून का डर बढ़ेगा और अपराधी व शिकारी जंगलों से दूर रहेंगे। खिवनी से वन विहार तक: घायल ‘युवराज’ बाघ का संघर्ष लगभग एक दशक पहले खिवनी अभयारण्य में जन्मा ‘युवराज’ बाघ वर्षों तक पर्यटन क्षेत्र का आकर्षण बना रहा। जन्म के दो वर्ष बाद से ही वह पर्यटकों को अक्सर दिखाई देता था। वयस्क होने पर उसने राधा और मीरा नामक बाघिनों के साथ रहकर खिवनी अभ्यारण्य में बाघों की संख्या बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जून 2026 के तीसरे सप्ताह में उसकी टेरिटरी में एक युवा बाघ के आने से दोनों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें युवराज गंभीर रूप से घायल हो गया। चोटें इतनी गंभीर थीं कि वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया। उसकी हालत को देखते हुए वन विभाग ने 27 जून को उसे रेस्क्यू करने का निर्णय लिया। विपरीत परिस्थितियों के बीच वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल की रेस्क्यू टीम ने सफल अभियान चलाकर युवराज को सुरक्षित वन विहार पहुंचाया। वन विहार लाने के छह दिन बाद उसे बेहोश कर विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण और एक्स-रे किया गया। जांच में सामने आया कि उसके आगे के दोनों पंजों में फ्रैक्चर है, जबकि पिछले बाएं पैर में गहरा घाव था, जिस पर छह टांके लगाए गए। इसके अलावा शरीर पर कई गंभीर चोटों का भी उपचार किया गया। वन विभाग की निगरानी में युवराज का लगातार इलाज किया जा रहा है। उपचार के करीब एक महीने बाद उसकी स्थिति में सकारात्मक सुधार दिखाई दे रहा है और स्वास्थ्य में लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है। एमपी टूरिज्म ने की हैं कई पहल डॉ. इलैयाराजा टी. (प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड एवं पर्यटन सचिव) ने राष्ट्रीय बाघ दिवस के पूर्व संदेश के माध्यम से एमपी टूरिज्म बोर्ड की वन संरक्षण के लिए की जा रहीं पहलों को बताया। ये खबर भी पढ़ें… सिवनी में आपसी संघर्ष में बाघ की मौत जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र में शनिवार को दूधिया सर्किल की अर्जुनझिर बीट में एक वयस्क बाघ का शव मिला है। रोजाना की तरह गश्त पर निकले वन कर्मचारियों ने जब बाघ के शव को देखा, तो तुरंत इसकी सूचना अधिकारियों को दी।पूरी खबर पढ़ें

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