जबलपुर में 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने अपनी ही बेटी, दामाद और उनके एक साथी पर करीब 22 लाख रुपए, एफडी और जेवर हड़पने का आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि एक साल तक उसे फर्जी लॉकर की चाबी गले में लटकाकर यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उसकी जमा पूंजी और जेवर बैंक लॉकर में सुरक्षित हैं। बैंक पहुंचने पर पता चला कि उसके नाम से कोई लॉकर ही नहीं है। रांझी निवासी 75 वर्षीय लल्ली बाई केवट सोमवार को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) कार्यालय पहुंचीं और बेटी राजकुमारी केवट, दामाद चंद्रभान केवट तथा उनके एक परिचित निकेश मिश्रा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। महिला ने आरोप लगाया कि तीनों ने धोखे से उनकी एफडी, पेंशन की राशि और जेवरात अपने कब्जे में कर लिए। महिला ने पुलिस को वह चाबी भी दिखाई, जिसे बेटी-दामाद ने बैंक लॉकर की चाबी बताकर एक साल पहले उनके गले में पहनवा दिया था। जब वह यूनियन बैंक पहुंचीं तो बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया कि उनके नाम से कोई लॉकर मौजूद ही नहीं है। हर महीने पेंशन निकलवाते रहे लल्ली बाई ने बताया कि बेटी और दामाद हर महीने पेंशन आने पर उन्हें बैंक ले जाते थे। चेक पर अंगूठा लगवाकर रुपये निकाल लेते और कहते कि रकम बैंक लॉकर में जमा की जा रही है। इसी तरह उन्होंने घर के सभी जेवर भी यह कहकर अपने पास रख लिए कि उन्हें सुरक्षित लॉकर में रखा जाएगा। महिला का आरोप है कि बैंक में उनसे दस्तावेजों पर अंगूठा लगवाकर कई एफडी भी तुड़वा ली गईं और पूरी जमा राशि अपने नाम कर ली गई। करीब 22 लाख रुपए की हेराफेरी का आरोप लल्ली बाई ने बताया कि वह जीसीएफ फैक्ट्री में कार्यरत थीं। पति की मृत्यु के बाद उन्हें अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नौकरी और रिटायरमेंट के दौरान जमा की गई पूरी पूंजी, एफडी और लाखों रुपए के जेवर बेटी-दामाद ने धोखे से अपने कब्जे में ले लिए। कुल हेराफेरी करीब 22 लाख रुपए की बताई जा रही है। बहू को हुआ शक, खुला राज मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला की बहू रीना को बैंक संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की बात संदिग्ध लगी। वह यूनियन बैंक पहुंचीं, जहां पता चला कि लल्ली बाई के नाम पर केवल बैंक खाता है, लॉकर नहीं। जांच में यह भी सामने आया कि लॉकर बेटी राजकुमारी के नाम से है। इसके बाद बैंक अधिकारियों ने बताया कि लल्ली बाई के नाम पर कोई एफडी भी शेष नहीं है। तब परिवार को पूरे मामले की जानकारी हुई। फर्जी चाबी देकर करते रहे गुमराह शिकायत के अनुसार, बेटी-दामाद और उनके परिचित निकेश मिश्रा ने महिला को एक चाबी देकर कहा था कि यह बैंक लॉकर की चाबी है और इसे हमेशा गले में पहनकर रखना। महिला करीब एक साल तक उसी चाबी को असली लॉकर की चाबी समझकर अपने गले में लटकाए रही। पुलिस ने शुरू की जांच एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश रांझी थाना प्रभारी को दिए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल की जा रही है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो बेटी, दामाद और अन्य संबंधित व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
