छिंदवाड़ा में जिस गोशाला को कभी मध्य प्रदेश की पहली ‘आदर्श गोशाला’ बताकर मॉडल के रूप में पेश किया गया था, आज वही बेजुबान गोवंश के लिए मौत का ठिकाना बन गई है। छिंदवाड़ा नगर निगम के अधीन संचालित पाठाढाना आदर्श गोशाला में अव्यवस्थाओं का ऐसा आलम है कि पिछले 16 दिनों में 43 गोवंश की मौत हो चुकी है। वहीं, बीते एक महीने में यह आंकड़ा 90 से अधिक पहुंच गया है। पड़ताल में सामने आया कि करोड़ों रुपए की योजनाओं और प्रति गाय 40 रुपए प्रतिदिन के सरकारी अनुदान के बावजूद गोशाला में न तो पर्याप्त चारा है, न पीने का पानी और न ही नियमित चिकित्सा व्यवस्था। जिसकी ड्यूटी है- उनका कहना है कि आता तो हूं पर रजिस्टर में एंट्री करना भूल जाता हूं। कागजों में मॉडल कही जाने वाली यह गोशाला जमीन पर पूरी तरह वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। पढ़िए, दैनिक भास्कर की रिपोर्ट… गोशाला में हर तरफ दिखी बदहाली टीम ने गोशाला परिसर में प्रवेश किया तो यहां बदबू, कीचड़ और गंदगी का साम्राज्य दिखाई दिया। मौतों का मामला तूल पकड़ने के बाद यहां मुरम डालकर स्थिति सुधारने की कोशिश की गई। कई शेडों में पानी की टंकियां खाली नजर आईं। गौवंश गंदे पानी और कीचड़ के बीच खड़े रहने को मजबूर दिखे। कई पशु बीमार अवस्था में पड़े मिले, जबकि कुछ बछड़े और सांड हाल ही में दम तोड़ चुके हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन मशीनों से कभी गोबर और गौमूत्र से उत्पाद तैयार करने का सपना दिखाया गया था, वे आज जंग खाकर कबाड़ बन चुकी हैं। कागजों में स्टाफ, मौके पर सिर्फ एक कर्मचारी नगर निगम के रिकॉर्ड में गोशाला के लिए 3 सुपरवाइजर और 2 कर्मचारियों की तैनाती दर्ज है, लेकिन भास्कर की टीम जब मौके पर पहुंची तो केवल एक सुपरवाइजर और एक कर्मचारी ही मौजूद मिला। बाकी कर्मचारी नदारद थे। 17 दिन तक नहीं पहुंचे पशु चिकित्सक गोशाला के विजिट रजिस्टर और कर्मचारियों के बयान से एक और बड़ा खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार 22 जून के बाद लगातार 17 दिनों तक पशु चिकित्सक डॉ. लोकेश बेलवंशी गोशाला नहीं पहुंचे। इस दौरान कई पशु बीमार हुए और कई की मौत हो गई। इतना ही नहीं, मृत गोवंश का नियमित पोस्टमॉर्टम तक नहीं कराया गया। डॉक्टर बोले- रजिस्टर में एंट्री करना भूल जाता हूं टीम ने जब इसे लेकर पशु चिकित्सक डॉ. लोकेश बेलवंशी ने बता की तो उन्होंने कहा- “मैं एक-दो दिन में जाता हूं। कभी-कभी विजिट रजिस्टर में एंट्री करना भूल जाता हूं। कोई गंभीर पशु नहीं था, इसलिए कर्मचारियों ने भी सूचना नहीं दी।” विभाग बोला- नोटिस देंगे, वेतन वृद्धि रोक रोकेंगे उपसंचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. एच.जी.एस. पक्षवार ने कहा कि पशु चिकित्सक को प्रतिदिन विजिट करना होता है। यदि डॉक्टर नहीं पहुंचे हैं तो कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वेतन वृद्धि रोकने जैसी कार्रवाई की जाएगी। सरकार दे रही ₹40 रोजाना, फिर भी भूख-प्यास से मौतें? राज्य सरकार ने हाल ही में गोशालाओं के लिए प्रति गोवंश चारा अनुदान 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए प्रतिदिन कर दिया है। इसके अलावा गोशालाओं के रखरखाव, आधारभूत सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग से बजट जारी होता है। इसके बावजूद पाठाढाना गोशाला में पानी के टैंक खाली हैं, चारा पर्याप्त नहीं है और शेडों में कीचड़ जमा था, जिसके बाद इस स्थान पर मुरम डलवाई गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी पैसा आखिर खर्च कहां हो रहा है? निगम आयुक्त ने दिए निर्देश, पर कार्रवाई किसी पर नहीं निगम आयुक्त सीपी राय ने गोशाला का निरीक्षण कर पीछे की साढ़े तीन एकड़ भूमि पर घास विकसित करने, पर्याप्त भूसा उपलब्ध कराने और साफ-सफाई के निर्देश दिए। हालांकि, अब तक किसी अधिकारी या कर्मचारी पर बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है। नगर निगम अध्यक्ष का आरोप- कोई ध्यान नहीं देता नगर पालिका निगम के अध्यक्ष सोनू मांगो का कहना है- “हमारे द्वारा कई बार निगम कमिश्नर सहित अमले को गोशाला की हालात को लेकर शिकायत की गई थी, लेकिन फिर भी ध्यान नहीं दिया गया। पिछले 15 दिनों से हम लगातार गोशाला जा रहे हैं। जहां पर हमें रोज गौ माता मरती नजर आ रही हैं। कमलनाथ की सरकार थी, उस समय पूरे प्रदेश में आदर्श गोशाला बनाई गई थी, लेकिन भाजपा सरकार उसे सही ढंग से रख नहीं पाई। इसके अलावा हमारे द्वारा मुद्दा उठाया गया था कि गोशाला में 200 गाय वर्तमान में हैं। ऐसे में उनकी देखभाल के लिए कम से कम 10 कर्मचारियों को तैनात करना चाहिए, लेकिन अब तक सिर्फ दो से तीन लोग इस पूरे काम को संभाल रहे हैं।” ये खबर भी पढ़ें… ट्रक ने 17 गाय-बछड़ों को रौंदा, 15 की मौत राजगढ़ में NH-52 पर टोल टैक्स के पास तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क पर बैठे गोवंश को कुचल दिया। हादसे में एक बछड़े सहित 15 गायों की मौके पर ही मौत हो गई। दो गोवंश गंभीर रूप से घायल हो गए। पढ़ें पूरी खबर…
