मध्य प्रदेश में जुलाई के तीसरे हफ्ते 3.3 इंच बारिश हुई है। इससे कई जिलों की तस्वीर बेहतर हो गई है। भोपाल, इंदौर समेत कुल 41 जिले ऐसे हैं, जहां पर कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है। वहीं, 14 जिलों में आंकड़ा माइनस में है। देवास में सबसे ज्यादा करीब 20 इंच और आलीराजपुर में सबसे कम 4 इंच ही बरसात हुई है। मौसम केंद्र (IMD) के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 13 इंच बारिश हो चुकी है। यह औसत बारिश 14.6 इंच से 1.6 इंच कम है। यानी, प्रदेश में 11% पानी कम गिरा है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा, लेकिन तीसरे सप्ताह मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 3.3 इंच पानी गिर गया। इस वजह से औसत बारिश के आंकड़े में भी सुधार आया। देवास में सबसे ज्यादा, आलीराजपुर में सबसे कम
अबकी बार पश्चिमी हिस्से में बारिश की सबसे अच्छी स्थिति है। खासकर मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग के जिलों में अच्छा पानी बरसा है। उज्जैन संभाग के देवास जिले में सबसे ज्यादा 19.3 इंच बारिश हुई है, जो कोटे की 54 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, आलीराजपुर में सिर्फ 3.9 इंच बारिश ही हुई है। यानी, कोटे की करीब 22 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश के 14 जिलों में तस्वीर बेहतर प्रदेश के 14 जिलों में बारिश का आंकड़ा प्लस और 41 जिलों में माइनस में है। पूर्वी हिस्से में निवाड़ी ही ऐसा जिला है, जहां औसत से ज्यादा पानी गिरा है। कम बारिश वाले 41 जिलों में अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं। वहीं, ज्यादा बारिश वाले 14 जिले- मंदसौर, दमोह, सिवनी, निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, हरदा, इंदौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और है। डैम-नदियों में भी पानी की कमी
प्रदेश के डैम और नदियों में पानी कम है। नर्मदा, लखुदंर समेत कई नदियों में पानी आ गया था, लेकिन दूसरे सप्ताह में सूखे जैसे हालात रहे। अब फिर से नदियों में पानी आ रहा है। हालांकि, लगातार तेज बारिश की दरकार है। ऐसे समझें बारिश का गणित… मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पिछले कुछ दिन से निचले स्तरों पर पर्याप्त नमी, व्यापक बादल, हल्की से मध्यम हवाएं और कई क्षेत्रों में वर्षा के प्रत्यक्ष संकेत इस बात की पुष्टि करते हैं कि मानसूनी परिसंचरण मजबूत था। आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश के संकेत है। जुलाई का आखिरी दिनों में तेज बारिश होने का अनुमान है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम
