शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। इस्तीफे के बाद BBC ने लिखा कि मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा है। वहीं गार्डियन ने लिखा कि मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार जनता के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अल जजीरा और डॉन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी टॉप स्टोरीज में जगह दी है। BBC: सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया 2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो। इससे पहले मोदी सरकार ने सिर्फ एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था। इस बार सरकार को अंदाजा नहीं था कि छात्र आंदोलन इतना बड़ा और लंबा चलेगा। शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया। धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं को अपनी जीत का अहसास हो रहा है। द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक का इस्तीफा भाजपा के 12 साल के शासन में यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया। NYT: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। भारत में चल रहा छात्र आंदोलन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को ‘कॉकरोच’ कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था। यह संगठन शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रहा था। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया। धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था। अब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी दूसरी मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं। अल जजीरा: भारत में छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई छात्रों के आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया। हाल के वर्षों में यह मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक रहा। इस आंदोलन के जरिए युवाओं ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर अपना गुस्सा जाहिर किया। CNN- एक मीम से शुरू हुए आंदोलन ने शिक्षा मंत्री की कुर्सी छीनी भारत में लगातार बढ़ते छात्र आंदोलन के दबाव में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। पिछले कई दिनों से हजारों छात्र उनके इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। जो आंदोलन शुरुआत में एक मीम के रूप में शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे देशभर में फैल गया। इसने छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को जवाबदेही, बेहतर अवसर और व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर एकजुट कर दिया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमतौर पर आंदोलनों के दबाव में फैसले नहीं बदलते। वहीं, विपक्ष और सरकार के आलोचक लंबे समय से आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार विरोध प्रदर्शनों पर सख्ती से कार्रवाई करती है। यह आंदोलन देश में बढ़ती युवा बेरोजगारी के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठा रहा है। बेंगलुरु स्थित अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में शामिल है। देश में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 36 करोड़ से अधिक युवा हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 25 वर्ष या उससे कम उम्र के करीब 40% ग्रेजुएट बेरोजगार हैं। वहीं, 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 20% युवा नौकरी से वंचित हैं। रिपोर्ट में पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार न मिल पाने को देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। द डॉन: ‘कॉकरोच’ की जीत, छात्र आंदोलन के दबाव में शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की। परीक्षा पेपर लीक मामलों की जिम्मेदारी तय करने की मांग को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच इसे प्रदर्शनकारियों की बड़ी जीत माना जा रहा है। हाल के वर्षों में यह आंदोलन भारत के सबसे बड़े जनआंदोलनों में शामिल हो गया था। विपक्षी दलों के समर्थन और संसद के भीतर विरोध के कारण यह सरकार के सामने एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों में खुशी की लहर दौड़ गई। इसी स्थान पर सोमवार को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया था। प्रदर्शनकारियों ने जय हिंद के नारे लगाए। मौके पर लाउडस्पीकर पर राष्ट्रीय गान बजाया गया और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर जश्न मनाया गया। ———————————- प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
