मध्य प्रदेश के बालाघाट में एथेनॉल प्लांट के नाम पर एफसीआई (FCI) गोदाम से निकाला गया सरकारी फोर्टिफाइड चावल अपनी राइस मिलों में खपाने वाले दो बड़े व्यापारियों राजेश उर्फ राजू संचेती और विनोद शर्मा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार को एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि बीते एक साल के दौरान एवीजे एथेनॉल प्लांट के नाम से निकला 5,459 मीट्रिक टन सरकारी चावल इन्हीं मिलर्स के पास पहुंचा था। मामले की जांच में सामने आया है कि संचेती राइस मिल में राजेश संचेती पैसों का लेन-देन और गाड़ियों की आवाजाही संभालता था। वहीं विनोद शर्मा ‘हर्ष राइस मिल’ में 20 प्रतिशत का पार्टनर है। यह मिल पूर्व मंत्री रामकिशोर कावरे के रिश्तेदारों की साझेदारी में चलती है, जिसके अन्य साझेदारों से भी पुलिस पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा, सिवनी के नंदगोपाल राइस इंडस्ट्रीज के मालिक सोनू जैन को भी 3 जून को चावल से भरे दो ट्रकों के पकड़े जाने के बाद आरोपी बनाया गया। इस तरह अंजाम दिया जाता था करोड़ों का खेल पुलिस के मुताबिक, पिछले एक साल में गरीबों के राशन का 16 हजार मीट्रिक टन से भी ज्यादा (कीमत ₹12 करोड़ से अधिक) फोर्टिफाइड चावल एथेनॉल प्लांट भेजने के बजाय दलालों के जरिए इन राइस मिलर्स को बेच दिया गया। राइस मिलर्स इसी सरकारी चावल की मिलिंग और पॉलिश करके इसे वापस सरकार को ही बेच देते थे और मोटा मुनाफा कमाते थे। पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में इस्तेमाल हुए 22 ट्रकों को भी जब्त कर लिया है। 12 लोग बेनकाब, मुख्य आरोपी अब भी फरार शुक्रवार को हुई इन दो गिरफ्तारियों के बाद केस में कुल आरोपियों की संख्या 12 हो गई है। पकड़े गए आरोपियों में ट्रक ड्राइवर, प्लांट प्रतिनिधि, सुपरवाइजर, ट्रांसपोर्टर और कई राइस मिलर्स (जैसे दुर्गेश शेंडे, राहुल प्रताप, राकेश श्रीवास्तव, उबेद खान, बिहारी पटले, अजीत बिसेन, सुरेंद्र राणा, किशनलाल और जुगल खंडेलवाल) शामिल हैं। हालांकि, एवीजे एथेनॉल प्लांट के मालिक अक्षत सिंघल और अभिनव सिंघल (पिता-पुत्र) समेत संचेती राइस मिल के मुख्य संचालक अभी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। एसआईटी (SIT) की टीम फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। ये खबर भी पढ़ें- एथेनॉल के नाम पर 1160 करोड़ का चावल घोटाला: 2320 में खरीदकर 2800 में बेच रहे, मुनाफे में सब हिस्सेदार…‘खुलासे’ से डर रही पुलिस देश में एथेनॉल मिक्स पेट्रोल को पर्यावरण-अनुकूल नीति के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, मध्य प्रदेश में एथेनॉल प्रोडक्शन के नाम पर सरकारी चावल के घोटाले का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि 5 लाख मीट्रिक टन (50 लाख क्विंटल) सरकारी चावल में से ज्यादातर चावल का इस्तेमाल एथेनॉल बनाने में हुआ ही नहीं। यह चावल दोबारा सरकारी गोदाम पहुंच गया। इसकी कीमत करीब 1160 करोड़ रुपए है। पूरी खबर पढ़ें..
