रामभरोस मीना की रिपोर्ट रातापानी अभयारण्य (टाइगर रिजर्व) के बफर जोन से सटे यारनगर क्षेत्र में मुंबई-भोपाल की कंपनियों का दखल है। कई बड़ी कंपनियों ने लोकल सिंडिकेट और राजस्व अधिकारियों से साठगांठ कर करीब 100 एकड़ से अधिक संवेदनशील वन-समीपवर्ती जमीन पर कब्जा जमा लिया है। रिसोर्ट, होटलें बनाकर जमकर कमाई हो रही है। इसके अलावा रातापानी अभयारण्य से सटे क्षेत्र में करीब 400 एकड़ वन भूमि पर अवैध खेती करने का मामला भी सामने आया है। खेती के लिए सागौन सहित बड़ी संख्या में बहुमूल्य पेड़ काट गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे क्षेत्र का ड्रोन सर्वे, सीमांकन और वन अपराध की जांच कराने की मांग की है। कलेक्टर बालागुरु के. से रातापानी टाइगर रिजर्व में हो रहे कब्जे और खेती पर कार्रवाई के संबंध में चर्चा करनी चाही पर बात नहीं हो सकी। जंगल के इन 4 प्रमुख खसरों के ये मालिक 1. खसरा 49/2/1 (रकबा : 1.2180 हेक्टेयर) : आवासीय का खेल
मालिक- सोनल त्रिवेदी एवं रेवन्तरा हॉस्पिटलिटी प्राइवेट लिमिटेड 2. खसरा 53 (रकबा: 3.3020 हेक्टेयर) – व्यावसायिक डायवर्जन
मालिक- ओशोनिक हॉस्पिटलिटी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड। बेहद संवेदनशील भूमि का उपयोग सीधे व्यावसायिक करवा लिया है। जंगल के बाजू में कमर्शियल अनुमति मिलना राजस्व विभाग की संदिग्ध कार्यप्रणाली को दर्शाता है। 3. खसरा 49/1 (रकबा: 5.3700 हेक्टेयर) – मुंबई कनेक्शन
मालिक- भारती पवार एवं श्री यूटोपियन ऑप्शंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड] अंधेरी वेस्ट, मुंबई 4. खसरा 31 (रकबा: 4.0470 हेक्टेयर) – पुराना नेक्सस
मालिक- जंगल कैंपस इंडिया कोलार प्राइवेट लिमिटेड। सरकारी रिकॉर्ड्स के मुताबिक इसी क्षेत्र के पास से सागौन के सैकड़ों कीमती पेड़ गायब किए जा चुके हैं। कार्रवाई कर रहे हैं वन अमला नियमित गश्त करता है। पेड़ काटने वालों के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। – श्रुति ओसवाल, एसडीओ फॉरेस्ट
