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जल जीवन का पैसा ‘विकास यात्रा’ और टेंटों में बहाया:कैग की रिपोर्ट से खुलासा; 25 लाख महिलाओं को गर्म भोजन नहीं मिला

मध्य प्रदेश में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन पर CAG की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साफ पानी, पोषण और सुरक्षित आवास जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए आवंटित करोड़ों रुपए सरकारी आयोजनों, टेंट, धार्मिक गतिविधियों और अधिकारियों की सुविधाओं पर खर्च किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासनिक लापरवाही के कारण प्रदेश की करीब 25 लाख जरूरतमंद महिलाएं ‘टेक होम राशन’ और ‘गर्म भोजन योजना’ के लाभ से वंचित रहीं। वहीं, PHE विभाग ने जल जीवन मिशन के तहत घर-घर पानी पहुंचाने के लिए मिले 12.30 करोड़ रुपए विकास यात्राओं, टेंट, धार्मिक आयोजनों और कर्मचारियों के मकान निर्माण पर खर्च किए। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि करीब 650 करोड़ रुपए की परियोजना का जमीनी सर्वे नहीं कराया गया, जिससे लागत लगभग 50% बढ़ गई। 31 मार्च 2024 को समाप्त वित्तीय वर्ष की CAG रिपोर्ट में आंगनवाड़ी, वर्किंग वूमन हॉस्टल, जल जीवन मिशन और मनरेगा के क्रियान्वयन में खामियां बताते हुए राज्य सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने की सिफारिश की गई है। 1. आंगनवाड़ियों की बदहाल स्थिति: बुनियादी सुविधाओं का अभाव
CAG रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए संचालित आंगनवाड़ियों में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। आंगनवाड़ी भवन निर्माण में वर्षों की देरी
रिपोर्ट के अनुसार, आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण में लंबे समय से देरी बनी हुई है। लॉकडाउन के दौरान बंद केंद्रों को भी ‘मंगल दिवस’ का भुगतान
CAG रिपोर्ट के अनुसार, लॉकडाउन के दौरान आंगनवाड़ियां बंद रहने के बावजूद कागजों पर ‘मंगल दिवस’ के लिए भुगतान जारी रहा। ऑडिट किए गए 13 जिलों में से 5 जिलों के कार्यक्रम अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान 1 से 14 महीने तक बंद रहे 10 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए ‘मंगल दिवस’ के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपए का भुगतान किया। रिपोर्ट के अनुसार, राशि की वसूली के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई। 5 अन्य जिलों में 2022 से 2024 के बीच ‘मंगल दिवस’ के लिए 6 करोड़ रुपए का भुगतान करीब एक साल की देरी से किया गया। CAG के अनुसार, विभाग ने यह भी सत्यापित नहीं किया कि कार्यक्रम वास्तव में आयोजित हुए थे या नहीं। 2. वर्किंग वूमन हॉस्टल: निर्माण में दशकों की देरी, कई भवन जर्जर
CAG ने 2019 से 2024 की अवधि के ऑडिट में कामकाजी महिलाओं के लिए संचालित वर्किंग वूमन हॉस्टल योजना में कई कमियां दर्ज की हैं। 3. जल जीवन मिशन: योजना राशि के उपयोग पर CAG के सवाल
जल जीवन मिशन (हर घर जल योजना) पर CAG की पांच वर्षीय ऑडिट रिपोर्ट में योजना के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी कई अनियमितताएं दर्ज की गई हैं। सर्वे में देरी से परियोजनाओं की लागत बढ़ी
CAG ने छतरपुर, डिंडोरी, ग्वालियर, झाबुआ, नर्मदापुरम, नरसिंहपुर, टीकमगढ़ और विदिशा सहित 8 जिलों की समीक्षा में पाया कि 4,576 योजनाओं में से केवल 3,910 में सर्वेक्षण सहायता एजेंसी नियुक्त की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण एजेंसियों की नियुक्ति में देरी के कारण परियोजनाओं की योजना समय पर तैयार नहीं हो सकी। इससे 8 जिलों की 853 योजनाओं की अनुमानित लागत 668.67 करोड़ रुपए से बढ़कर 997.12 करोड़ रुपए हो गई, यानी लगभग 50% बढ़ गई। योजना के लक्ष्य पूरे नहीं हुए CAG रिपोर्ट के अनुसार, कई परियोजनाएं निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकीं। सितंबर 2024 तक स्वीकृत 147 बहु-ग्राम योजनाओं में से केवल 39 पूरी हुईं। सितंबर 2024 तक 27,336 एकल ग्राम योजनाओं में से 15,739 पूरी हो सकीं। वहीं सरकार ने पांच वर्षों में 1.11 करोड़ परिवारों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा था। सितंबर 2024 तक 60.90 लाख घरों तक ही कनेक्शन पहुंच सके। इनमें 13.93 लाख परिवार पहले से नल कनेक्शन वाले थे। CAG के अनुसार, राज्य का घरेलू नल कनेक्शन कवरेज 69% रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत/लक्ष्य 80% था।

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