मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी से बारिश के ओवरऑल आंकड़े में गिरावट आ रही है। प्रदेश में अब तक औसत 9.7 इंच पानी गिरा है, जो सामान्य बारिश से 15% कम है। बीता सप्ताह सूखा रहा। अब अगले सप्ताह से उम्मीद है। बता दें कि इस बार मानसून 9 दिन देरी से 24 जून को पहुंचा था और अगले नौ दिन में पूरे प्रदेश को कवर कर लिया। देरी की वजह से प्रदेश में जून महीने में 30 प्रतिशत बारिश कम हुई थी, लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में ये आंकड़ा प्लस में 8 प्रतिशत पर आ गया। दूसरे सप्ताह में मानसून कमजोर रहा। कहीं भी भारी बारिश नहीं हुई। इस वजह से औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा। इस वजह से जुलाई भी सूखा ही बीत रहा है। 1.7 इंच बारिश कम
IMD (मौसम केंद्र) भोपाल की माने तो प्रदेश में अब तक औसत 11.4 इंच बारिश होनी थी, लेकिन यह 9.7 इंच ही हुई। इस तरह 1.7 इंच पानी कम गिरा है। हालांकि, यह कोटे की कुल 25 प्रतिशत है। देवास में सबसे ज्यादा, आलीराजपुर में सबसे कम
अबकी बार पश्चिमी हिस्से में बारिश की सबसे अच्छी स्थिति है। खासकर मालवा-निमाड़ यानी, इंदौर-उज्जैन संभाग के जिलों में अच्छा पानी बरसा है। उज्जैन संभाग के देवास जिले में सबसे ज्यादा 17.9 इंच बारिश हुई है, जो कोटे की 50 प्रतिशत से ज्यादा है। वहीं, आलीराजपुर में सिर्फ 2.3 इंच बारिश ही हुई है। यानी, कोटे की करीब 7 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों की अच्छी-बुरी स्थिति कम बारिश वाले 39 जिले- अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, झाबुआ, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी और विदिशा। ज्यादा बारिश वाले 16 जिले- निवाड़ी, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, देवास, ग्वालियर, हरदा, इंदौर, खंडवा, खरगोन, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, सीहोर और उज्जैन। डैम-नदियों में भी पानी की कमी
बारिश का दौर थमने से डैम और नदियों में पानी कम हो गया है। पिछले सप्ताह से नर्मदा, लखुदंर समेत कई नदियों में पानी आ गया था। लखुंदर नदी तो आगर जिले में ओवरफ्लो हो रही थी। वहीं, सीहोर से निकली कोलांस नदी भी उफान पर रही, लेकिन बारिश नहीं होने से नदियां फिर से सूख रही है। ऐसे समझें बारिश का गणित… सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले मध्यप्रदेश में कैसा रहेगा यह सप्ताह?
मौसम एक्सपर्ट शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि मौसम विज्ञान की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण संकेत अगले सप्ताह के लिए मिल रहे हैं। वर्तमान निम्न दाब क्षेत्र के कमजोर होने के बाद विभिन्न वैश्विक मौसम मॉडल यह संकेत दे रहे हैं कि 20 से 22 जुलाई के बीच उत्तर या उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक नया निम्न दाब क्षेत्र विकसित होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हो सकती हैं।
इसका मध्य प्रदेश के साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी असर रहेगा। इसके बाद पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश होने के संकेत है। 5 बड़े शहरों में ऐसा रहेगा मौसम भोपाल: भोपाल में कोटे का 34 प्रतिशत यानी, 12.9 इंच पानी गिर चुका है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह से यही स्थिति है, लेकिन बारिश के लिहाज से अगला सप्ताह बेहतर रह सकता है। संभाग के सीहोर और राजगढ़ में भी एक तिहाई बारिश हुई है, जबकि विदिशा में सबसे 24 प्रतिशत पानी गिरा है। इंदौर: बारिश के मामले में इंदौर की स्थिति फिलहाल बेहतर है। यहां करीब 14 इंच बारिश हुई है। बुरहानपुर, खंडवा और खरगोन में भी 10 इंच से ज्यादा पानी गिर चुका है, लेकिन आलीराजपुर प्रदेश में सबसे नीचे है। यहां 2.3 इंच बारिश ही हुई है। जबलपुर: जबलपुर में अब तक 9 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। यह कोटे की 25 प्रतिशत ही है। यहां तेज बारिश का दौर फिलहाल थमा हुआ है। उज्जैन: उज्जैन में कोटे की 33.5 प्रतिशत बारिश हो चुकी है। 11.7 इंच बारिश होने से काफी राहत मिली है। संभाग का देवास प्रदेश में सबसे आगे है। यहां करीब 18 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है, जो कोटे से 50 प्रतिशत तक है। रतलाम, शाजापुर, मंदसौर, नीमच और आगर-मालवा में 9 इंच से ज्यादा पानी गिरा है। ग्वालियर: इस बार भी ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे लेट पहुंचा। फिर भी बारिश के आंकड़े राहत दे रहे हैं। दतिया और शिवपुरी को छोड़ दें तो बाकी जिलों में 25 प्रतिशत से ज्यादा बारिश हो चुकी है। अगले सप्ताह से यहां भी तेज बारिश का दौर शुरू होगा।
