सबसे प्रभावशाली ग्रहों में से एक शनि 26 जुलाई से वक्री होने जा रहा है। यानी इस दिन से शनि की उल्टी चाल शुरू होगी। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में शनि को न्याय का देवता माना जाता है। वे धर्म, अध्यात्म और दर्शन से जुड़े विषयों के कारक माने जाते हैं। शनि के वक्री होने पर देश और दुनिया में अलग-अलग तरह की परिस्थितियां देखने को मिल सकती हैं। इसका प्रभाव 12 राशियों पर भी अलग-अलग पड़ेगा। मेष राशि के जातकों में एंग्जाइटी बढ़ने की आशंका है, इसलिए उन्हें अधिक सोचने से बचना होगा। वहीं, मीन राशि के जातकों को शांत चित्त से निर्णय लेने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर, वृषभ, सिंह और मकर राशि के जातकों को लाभ मिलने की संभावना है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, साधना, समाधि और ध्यान से जुड़े कारक माने जाने वाले शनि के वक्री होने का प्रभाव वर्तमान घटनाक्रम पर भी दिखाई दे सकता है। उनका मानना है कि विशेष रूप से युद्ध की स्थिति वाले देशों के बीच होने वाली संधियों और कूटनीतिक घटनाक्रम पर इसका असर देखने को मिल सकता है। भारत के लिए यह वक्र काल शुभकारी रहेगा
पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि हर 140 दिन में शनि अपनी दिशा बदल देता है। मान्यताओं के अनुसार इस बार शनि के वक्री होने पर विश्व राजनीति में विदेश नीतियों का प्रभाव बड़े ही कूटनीतिक ढंग से दिखाई देंगे। सभी राष्ट्र चाहे वह विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में हो या विकासशील राष्ट्र इन सभी राष्ट्रों में सीमाओं की सुरक्षा तथा आंतरिक संवर्धन एवं साधनों की उपलब्धियां को बढ़ाने पर चिंतन किया जाएगा।भारत के लिए यह वक्र काल शुभकारी रहेगा। नए-नए प्रकार के शोध संदर्भ में विशिष्ट आयाम को देने वाला होगा। प्राकृतिक दृष्टिकोण से असंतुलन की स्थिति बनेगी
शनि का वक्रत्वकाल एवं ग्रहों के जल-चर राशि में परिभ्रमण का प्रभाव प्राकृतिक असंतुलन को भी दर्शा रहा है। जिसके अंतर्गत भूस्खलन भूकंप अति वृष्टि आदि के रूप में दिखाई देगा। इसका विशेष प्रभाव दक्षिण पश्चिम दिशा से जुड़े राष्ट्रों एवं मिडिल ईस्ट के पेसिफिक में दिखाई देगा। वक्री शनि के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय
शनि महाराज की अनुकूलता के लिए शनि स्तोत्र का पाठ शनि कवच का पाठ शनि के वस्तुओं का दान और भिक्षकों को भोजन करवाना चाहिए। क्या होता है वक्री होना?
दरअसल, पृथ्वी सूर्य के अधिक निकट होने के कारण शनि की तुलना में तेज गति से अपनी कक्षा में घूमती है। जब शनि को पृथ्वी ओवरटेक करती है, तब करीब साढ़े चार महीने (135 से 140 दिन) तक पृथ्वी से देखने पर शनि तारों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देता है। इस आभासी गति को वक्री गति (Retrograde Motion) कहा जाता है। यह केवल देखने का प्रभाव है, ग्रह की वास्तविक दिशा नहीं बदलती।
