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‘नाजायज औलाद’ जैसी धारणा होगी खत्म:यूसीसी को आज मिलेगी कैबिनेट में मंजूरी, जगदीशपुर में जुटेगी एमपी सरकार

मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की आज जगदीशपुर (पुराना इस्लामनगर) में होने वाली बैठक में दो बड़े सुधारों पर फैसला हो सकता है। कैबिनेट के सामने रखे जा रहे समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के ड्राफ्ट में ‘अवैध बच्चा’ या ‘नाजायज औलाद’ जैसी कानूनी अवधारणा समाप्त कर सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा देने का प्रस्ताव है। साथ ही विवाह, तलाक और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नए नियम भी लागू करने की तैयारी है। इसी बैठक में प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा, जिसके बाद भोपाल सहित मध्य और पश्चिम मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन आ जाएंगे। विवाह और तलाक: ये होंगे बड़े बदलाव यूसीसी ड्राफ्ट के अनुसार सभी समुदायों के लिए एक समय में केवल एक ही विवाह मान्य होगा। विवाह और तलाक का पंजीयन अनिवार्य रहेगा, हालांकि केवल पंजीयन नहीं होने के आधार पर विवाह अमान्य नहीं माना जाएगा। यदि पति विवाह के समय किसी दूसरी महिला को गर्भवती कर चुका था तो पत्नी को भी अदालत में विवाह निरस्त कराने का अधिकार मिलेगा। अभी यह अधिकार सीमित परिस्थितियों में ही उपलब्ध है। ड्राफ्ट में मुस्लिम तलाक, सामाजिक पंचायत या अन्य गैर-कानूनी व्यवस्था से विवाह समाप्त करने को मान्यता नहीं देने का भी प्रावधान है। लिव-इन भी कानूनी दायरे में ड्राफ्ट के अनुसार, साथ रहने वाले जोड़े को एक माह के भीतर लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीयन कराना होगा। ऐसा नहीं करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान रहेगा। पंजीयन के बाद संबंध टूटने पर महिला पार्टनर को पत्नी की तरह भरण-पोषण मांगने का अधिकार मिलेगा। पहले से विवाहित व्यक्ति या पहले से किसी पंजीकृत लिव-इन संबंध में रहने वाला व्यक्ति नया पंजीयन नहीं करा सकेगा। एसटी समुदाय रहेगा दायरे से बाहर यूसीसी के मसौदे में अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को देखते हुए इस कानून के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद यूसीसी ड्राफ्ट को विधेयक के रूप में विधानसभा में पेश किया जाएगा। मेडिकल यूनिवर्सिटी का होगा पुनर्गठन कैबिनेट में प्रदेश की एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी को दो हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। नए प्रारूप के अनुसार, महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधीन रहेंगे, जबकि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन सहित मध्य और पश्चिम मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेज उज्जैन मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध होंगे। उज्जैन के अधीन होगा भोपाल प्रस्ताव के अनुसार भोपाल, रायसेन, विदिशा, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, गुना, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, बुरहानपुर और सागर सहित पश्चिम एवं मध्य मध्यप्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज उज्जैन विश्वविद्यालय के दायरे में आएंगे। वहीं जबलपुर, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पन्ना, टीकमगढ़ समेत महाकौशल और विंध्य क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज जबलपुर विश्वविद्यालय के अधीन रहेंगे।

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