केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एथेनॉल संबंधी बयानों के समर्थन में भारतीय किसान संघ (बीकेएस) खुलकर सामने आ गया है। भोपाल में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी ने कहा- एथेनॉल के खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है। अफवाह फैलाने वाले मिल जाएं तो उन्हें चप्पल से मारेंगे। रेड्डी ने कहा कि एथेनॉल का विरोध किसान और देश, दोनों के हितों के खिलाफ है। एथेनॉल से किसानों की आय बढ़ती है। विदेशी तेल पर देश की निर्भरता कम होती है। प्रदूषण में भी कमी आती है।एथेनॉल में हजारों लीटर पानी खर्च होने का दावा भ्रामक है। रेड्डी ने कहा- गन्ने का पूरा रस निकालने के लिए केवल सीमित मात्रा में पानी मिलाया जाता है। इसके अलावा फैक्ट्रियों में उपयोग किया गया पानी दोबारा री-साइकिल किया जाता है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन में पानी की ज्यादा खपत की बात केवल अफवाह है। 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों की मांग रेड्डी ने कहा कि एथेनॉल गन्ना, मक्का और चावल जैसी फसलों से तैयार किया जाता है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलता है। भविष्य में 100 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाली गाड़ियों को भी बढ़ावा देने की मांग की। देश में 5 साल से एथेनॉल मिला पेट्रोल बिक रहा एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से वाहनों में तकनीकी खराबी आने के सवाल पर रेड्डी ने कहा कि देश में पिछले 5 साल से एथेनॉल मिला पेट्रोल का उपयोग किया जा रहा है। अगर किसी वाहन में तकनीकी समस्या आती है तो उसका समाधान गाड़ी बनाने वाली कंपनियों को करना चाहिए। इसे एथेनॉल के खिलाफ प्रचार का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग भारतीय किसान संघ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- पेट्रोल और डीजल को भी सभी जगहों पर जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए। इससे देशभर में ईंधन की कीमतों में एकरूपता आएगी। आम लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही किसानों से आत्महत्या न करने और प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने की अपील की। कैलारस शुगर मिल किसानों को सौंपने की मांग भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान मुरैना की कैलारस शुगर मिल को निजी हाथों में देने के बजाय सहकारी समिति के माध्यम से किसानों के संचालन में सौंपने की मांग की गई। संघ ने कलेक्टर की अध्यक्षता में किसानों, शेयर धारकों और तकनीकी विशेषज्ञों की समिति बनाने का सुझाव भी दिया। उनके अनुसार मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। अब पढ़िए एथेनॉल पर गडकरी ने क्या-क्या कहा ? गडकरी बोले- एथेनॉल से गाड़ियों को नुकसान का कोई सबूत नहीं देश में ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल, माइलेज और गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भास्कर से बातचीत में कहा कि एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा। प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। उन्होंने कहा- कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होगा, इसका अंतिम फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। मैं पिछले 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहा हूं। देश 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोलियम आयात करता है। दिल्ली के प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन से आता है। इसे कम करना भी हमारी जिम्मेदारी है। अब ग्राफिक्स के जरिए एथेनॉल के बारे में जानिए… देश में 2 जनरेशन एथेनॉल मौजूद, थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल पर सरकार का फोकस फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठे ज्वार और मक्का से बनाया जाता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।
थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल, 5 जून को E85 फ्यूल लॉन्च कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा सरकार के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों को भी फायदा मिला है। भारत पिछले साल ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। एक अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30% करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। …………………………………………… गडकरी बोले-E20 पेट्रोल से गाड़ी खराब, तो पुर्जे मुफ्त बदलें 20% एथेनॉल मिक्स पेट्रोल से गाड़ी खराब होने पर कंपनियां फ्री में पार्ट्स बदलेंगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार ने कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे E20 फ्यूल से प्रभावित पुरानी गाड़ियों (2023 से पहले की) के पार्ट्स को बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बदलें। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा था कि E20 फ्यूल से सोशल मीडिया पर गाड़ियों के खराब होने या नुकसान की खबरें गलत हैं और यह एक झूठा नैरेटिव है। हालांकि, उन्होंने पुरानी गाड़ियों का माइलेज कम होने की बात मानी है। पढ़ें पूरी खबर…
