छतरपुर में केन-बेतवा लिंक सहित विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। महिलाएं पिछले 14 दिनों से प्रतीकात्मक रूप से चिताओं पर लेटकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं। वहीं, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर का आमरण अनशन गुरुवार को 11वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारियों का आरोप है कि उन्हें नियमित स्वास्थ्य जांच की सुविधा नहीं मिल रही है। अमित भटनागर ने कहा कि विभिन्न परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और किसानों के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई है। ग्राम सभा की प्रक्रिया, आपत्तियों के निराकरण और अवार्ड की प्रतियां भी प्रभावितों को उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई परियोजनाओं में पात्र परिवारों की जगह अपात्र लोगों को ज्यादा मुआवजा दिया गया। जबकि जिन लोगों की जमीन, घर और आजीविका प्रभावित हुई, वे अब भी उचित मुआवजे से वंचित हैं। मुआवजे की मांग कर रहे
आंदोलनकारियों का कहना है कि केन-बेतवा लिंक, नैगुवा सिंचाई परियोजना, एनटीपीसी, मझगांव और रूंज डैम जैसी परियोजनाओं से प्रभावित हजारों परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिला है। उनका आरोप है कि पूर्ण पुनर्वास और मुआवजा दिए बिना ही कई परिवारों के मकान तोड़ दिए गए। इसके कारण बारिश के मौसम में कई लोग बेघर होकर रहने को मजबूर हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। जिला अध्यक्ष कपूर सिंह यादव, महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष रानी रैकवार, प्रदेश महासचिव विनोद पटेल, जिला उपाध्यक्ष महेंद्र यादव समेत अन्य पदाधिकारी आंदोलन स्थल पहुंचे। उन्होंने प्रभावितों की मांगों का समर्थन करते हुए प्रशासन और सरकार पर अन्याय का आरोप लगाया। आंदोलनकारियों ने कहा कि जब तक उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। खबर लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। तस्वीरों में देखें प्रदर्शन
