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सुप्रीम कोर्ट बोला- नागरिकता का फैसला निष्पक्ष प्रक्रिया से हो:असम में विदेशी घोषित 27 लोगों को राहत; हाईकोर्ट का फैसला रद्द, दोबारा सुनवाई होगी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को असम के 27 लोगों को विदेशी घोषित करने से जुड़े मामलों में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले रद्द कर दिए। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का फैसला निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही होना चाहिए। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता और विदेशी होने का सवाल संविधान और कानून से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण विषय है। सभी मामले दोबारा सुनवाई के लिए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल को भेज दिए गए है। इन लोगों को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। उन्होंने इस फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद सभी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। SC बोला- नागरिकता पर अंतिम फैसला ट्रिब्यूनल करेगा हाईकोर्ट में 23 साल बाद चुनौती दी गई थी 27 लोगों को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित किया था। उन्होंने इस फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ट्रिब्यूनल का फैसला करीब 23 साल बाद चुनौती दी गई। नोटिस मिलने के बावजूद कोई भी याचिकाकर्ता ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और न ही अपनी नागरिकता के समर्थन में कोई दस्तावेज या सबूत दिया। ऐसे में ट्रिब्यूनल के पास उन्हें विदेशी घोषित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा-9 क्या है? अगर किसी व्यक्ति पर सवाल उठता है कि वह भारतीय नागरिक है या विदेशी, तो अपनी नागरिकता साबित करने की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होती है। सरकार को यह साबित नहीं करना पड़ता कि वह विदेशी है। आमतौर पर किसी मामले में आरोप लगाने वाले पक्ष को आरोप साबित करना होता है। लेकिन विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा-9 में नियम अलग है। अगर किसी व्यक्ति को विदेशी होने के संदेह में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल के सामने पेश किया जाता है, तो उसे खुद दस्तावेज और सबूत देकर साबित करना होता है कि वह भारतीय नागरिक है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… वकील ने CJI का नाम लेकर अपशब्द कहे: सुप्रीम कोर्ट में जजों को आदेश देने लगा, फाइल फेंकी; सिक्योरिटी ने बाहर निकाला सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान एक वकील ने हंगामा किया। सीजेआई सूर्यकांत को अपशब्द कहे और फाइल भी फेंकी। इस दौरान सीजेआई कोर्ट रूम में मौजूद नहीं थे। यह घटना जस्टिस केवी विश्वनाथन, जस्टिस आलोक अराधे की बेंच के सामने हुई। हंगामे के बाद कोर्ट के आदेश पर सिक्योरिटी ने वकील को तुरंत बाहर निकाल दिया। पूरी खबर पढ़ें…

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