विदिशा जिले के सिरोंज से विधायक उमाकांत शर्मा ने वन भूमि पर धड़ल्ले से हो रहे अतिक्रमण को लेकर आक्रोश जताया है। उन्होंने सोमवार को हुए कार्यक्रम में जिम्मेदार अधिकारियों से पूछा कि आखिर वन विभाग, राजस्व और पुलिस अमले की मौजूदगी के बावजूद प्रतिबंधित वन भूमि पर ट्रैक्टर चलाकर खेती कैसे शुरू कर दी गई। विधायक बोले- इससे सरकार की बदनामी होती है विधायक उमाकांत शर्मा ने लटेरी, मुरवास और बलरामपुर के जंगलों में बड़े पैमाने पर हो रहे अतिक्रमण को रोकने के लिए सभी संबंधित विभागों की उपस्थिति में संयुक्त सीमांकन कराने की मांग की है। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे अवैध कामों और अधिकारियों की साठगांठ से वन विभाग के साथ-साथ राज्य सरकार की भी छवि खराब होती है। प्रदेश का अनोखा मामला, सड़क किनारे 1700 बीघा पर कब्जा यह पूरा विवाद सिरोंज-लटेरी हाइवे क्रमांक 752 बी पर बलरामपुर और रूसिया गांवों के पास का है। यहां मुख्य मार्ग के किनारे कम्पार्टमेंट P 469-470 की करीब 1700 बीघा वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर खेत बना लिए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस व्यस्त हाईवे से दिन-रात वन विभाग और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन किसी को भी यह विशालकाय अतिक्रमण दिखाई नहीं देता। विभाग समय-समय पर कार्रवाई का दिखावा तो करता है, लेकिन मुख्य सड़क की इस जमीन को पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा है। एक साथ इतनी बड़ी सरकारी जमीन पर खेती का यह प्रदेश में अपनी तरह का पहला मामला है। असाड़ी उगाने’ के नाम पर घूस का आरोप सामाजिक कार्यकर्ता फकीर मोहम्मद ने आरोप लगाया कि हर साल आषाढ़ (असाढ़) के महीने में जब बोवनी शुरू होती है, तब विभाग के कर्मचारी कथित तौर पर 3 से 5 हजार रुपए प्रति बीघा के हिसाब से घूस लेकर किसानों को वन भूमि पर खेती करने का मौखिक समझौता (छूट) दे देते हैं। इसे स्थानीय भाषा में ‘असाड़ी उगाना’ कहा जाता है। एक बार पैसे वसूलने के बाद वन विभाग का अमला साल भर तक इन अतिक्रमणकारी किसानों की तरफ मुड़कर भी नहीं देखता। जंगल काटकर नया खेत बनाने की दरें अलग, मामला कोर्ट पहुंचा बताया जा रहा है कि प्रति बीघा घूस की यह तय रकम केवल पुरानी कब्जा की गई जमीन के लिए है। अगर कोई जंगल काटकर नया खेत बनाना चाहता है, तो उसके लिए रिश्वत की दरें और भी अधिक तय हैं। लटेरी क्षेत्र में पदस्थ वन विभाग के अधिकांश नाकेदार, बीट गार्ड और कुछ डिप्टी रेंजर स्थानीय निवासी ही हैं, जो पैसे लेकर अतिक्रमण करवाते हैं। वन कार्यकर्ता फकीर मोहम्मद ने इन मामलों को लेकर वन विभाग के खिलाफ हाई कोर्ट और एनजीटी में भी केस दर्ज कराए हैं। SDO बोले- अकेले वन विभाग इतना अतिक्रमण नहीं हटा सकता इस पूरे मामले पर SDO फॉरेस्ट प्रशांत सांकरे ने माना कि यह अतिक्रमण का एक बहुत बड़ा मामला है। उन्होंने कहा- इतना बड़ा अतिक्रमण अकेले वन विभाग के बूते हटाना संभव नहीं है। हम जल्द ही सभी संबंधित विभागों से तालमेल और सहयोग लेकर एक मजबूत रणनीति बनाएंगे और अतिक्रमणकारियों को बेदखल करने की बड़ी कार्रवाई करेंगे।
