Homeमध्यप्रदेशकुत्ते से बचने में कुएं में गिरे 13 हिरण, मौत:कालापीपल में किसान...

कुत्ते से बचने में कुएं में गिरे 13 हिरण, मौत:कालापीपल में किसान ने देखा; मुंडेर का एक हिस्सा टूटा, वन विभाग ने अंतिम संस्कार किया

शुजालपुर अनुभाग की कालापीपल तहसील के खरदौनकलां गांव में एक खेत के कुएं से 13 हिरणों और एक आवारा कुत्ता के शव मिले हैं। रविवार को दुर्गंध आने पर खेत मालिक के परिजनों ने कुएं में झांककर देखा तो बड़ी संख्या में सड़े-गले शव दिखाई दिए। सूचना पर वन विभाग, पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। सोमवार को पंचनामा और पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि कुत्ते से बचने के दौरान हिरण कुएं में गिर गए। किसान ने कुएं में देखा शव खरदौनकलां निवासी कृष्णाबाई पति राजेश पाटीदार के परिजन रविवार को खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने पहुंचे थे। इस दौरान कुएं से तेज दुर्गंध आने पर उन्होंने नीचे देखा तो 13 हिरणों और एक कुत्ते के शव पड़े मिले। शवों की हालत देखकर आशंका जताई जा रही है कि घटना एक-दो दिन पहले हुई होगी। खेत मालिक ने इसकी सूचना सरपंच को दी, जिसके बाद पुलिस और वन विभाग को मौके पर बुलाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, कुएं पर सुरक्षा के लिए मुंडेर बनी हुई थी, लेकिन उसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। आशंका है कि हिरण उसी क्षतिग्रस्त हिस्से से कुएं में गिरे होंगे। घटना का स्पष्ट समय अभी सामने नहीं आया है। कुत्ते से बचने के दौरान कुएं में गिरे हिरण वन विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हिरणों का झुंड किसी आवारा श्वान से बचने के लिए तेजी से भाग रहा था। इसी दौरान सभी हिरण कुएं में गिर गए। जिस कुत्ते से वे बच रहे थे, वह भी कुएं में गिर गया और उसकी मौत हो गई। मृत हिरणों में चार नर और नौ मादा शामिल हैं। ग्रामीणों ने बताया कि कुएं पर सुरक्षा के लिए मुंडेर बनी हुई थी, लेकिन उसका एक हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। आशंका है कि दौड़ते समय हिरण उसी टूटे हिस्से से कुएं में गिर गए। हालांकि, घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी। एसडीओ के नहीं होने से सोमवार को निकाले गए शव वन विभाग के अनुसार, हिरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित वन्यजीव हैं। इसलिए नियमानुसार वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में ही शव निकालने और पंचनामा की कार्रवाई की जाती है। रविवार को सूचना मिलने के बाद एसडीओ विभागीय कार्य से रतलाम में होने के कारण सोमवार को नायब तहसीलदार की उपस्थिति में शव निकाले गए। पोस्टमार्टम के बाद घटनास्थल के पास ही सभी शवों का अंतिम संस्कार किया गया। वन विभाग ने जांच के दौरान आम लोगों और ग्रामीणों को घटनास्थल से दूर रखा। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौत के कारणों की पुष्टि होगी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग ने घटना की जानकारी सार्वजनिक होने से रोकने की कोशिश की। हिरणों की बड़ी आबादी वाला इलाका है कालापीपल कालापीपल-शुजालपुर क्षेत्र हिरणों की बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है। खेतों और खुले इलाकों में अक्सर हिरणों के झुंड दिखाई देते हैं। वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को देखते हुए करीब दो महीने पहले बोमा पद्धति के तहत हेलीकॉप्टर की मदद से लगभग 800 हिरणों को अन्य वन अभयारण्यों में स्थानांतरित किया गया था। ये खबर भी पढ़े… बोमा टेक्निक से तीसरे दिन पकड़े 69 ब्लैक बक: शुजालपुर से अब तक 151 कृष्ण मृग वन क्षेत्र में छोड़े किसानों को कृष्ण मृगों (ब्लैक बक) से होने वाले फसल नुकसान से राहत दिलाने के लिए वन विभाग का वन्यजीव पकड़ने का अभियान जारी है। इन हिरणों को गांधी सागर बांध वन क्षेत्र में छोड़ा गया। अब तक कुल 151 कृष्ण मृगों को सुरक्षित रूप से शिफ्ट किया जा चुका है। पढ़े पूरी खबर…

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here