डिंडोरी की बजाग तहसील में जमीन हड़पने का अनोखा मामला सामने आया है। अनोखा इसलिए, क्योंकि जिस शख्स पर आरोप लगा है, उसने दस्तावेजों में अपने पिता का नाम ही बदल दिया। यही नहीं, जमीन अपने नाम कराने के बाद सरकारी दस्तावेजों में अपने बेटों का नाम लिखवा दिया। दो दिन पहले ही मामले का खुलासा हुआ है। दरअसल, जमीन मालिक जियालाल वनवासी का साल 1996 में निधन हो गया था। सुकुलपुरा गांव में रहने वाले उनके पोते शिवराज ने बताया कि दादा की मौत के वक्त वे और चार भाई छोटे थे। दादा के पास कहां कितनी जमीन थी, इसके बारे में पता नहीं था। दादा जियालाल के चचेरे भाई गणेश वनवासी बजाग में रहते हैं। पिता जी भी बताते थे कि दादा के नाम से जमीन बजाग में है। सोचा- बाद में बंटवारा होगा, तो सभी भाइयों को अपना-अपना हिस्सा मिल जाएगा। लेकिन, अब दस्तावेज कुछ और ही कहानी कह रहे है। 2021-22 में उन्होंने पटवारी के साथ मिलकर दादा के नाम की जमीन अपने नाम करा ली। इसके लिए उन्होंने अपने पिता का नाम ही बदल लिया। पांच पॉइंट्स में समझिए पूरा मामला परिजन बोले– शिकायत करेंगे सुकुलपुरा गांव में जियालाल के पोते शिवराज कहते हैं- 1996 में जब दादा की मौत हुई, तब हम बहुत छोटे थे। बड़े पिता जी भगवान दास के भी एक बेटा रमेश हैं। हम तीन भाई सलीम और राकेश है। पिता दशरथ वनवासी बताते थे कि दादा के नाम से जमीन बजाग में है। सोचते हैं सब परिवार के लोग हैं, जब हिस्सा-बांट होगा तो अपने आप मिल जाएगी। इसलिए ज्यादा ध्यान नहीं दिया। जानकारी निकलवाई तब सामने आया फर्जीवाड़ा गणेश की पत्नी बोली– वो रिश्तेदार, जियालाल दादा बजाग तहसील मुख्यालय में गणेश की पत्नी नन्ही बाई ने बताया कि गणेश की मौत 2025 में हो चुकी है। हमे जमीन के बारे में कोई जानकारी नहीं कब क्या हुआ। लेकिन जियालाल हमारे दादा ससुर थे। मेरी शादी के पहले ही देहांत हो चुका था। सुकुलपुरा वाले भी हमारे ही रिश्तेदार है। जब शादी होकर आई हूं। इसी घर में रह रही हूं। पटवारी ने झाड़ा पल्ला पटवारी नर्मदा मुराली का कहना है कि ग्राम पंचायत से जारी दस्तावेजों के आधार पर ही रिपोर्ट बनाई है। इसके बाद तहसील न्यायालय से फौती नामा कटा है। जमीन का नामांतरण हुआ है। बजाग एसडीएम अक्षय डिगरसे ने बताया कि जमीन के नामांतरण और फौती नामा में गलत तरीके से नाम जुड़ने की शिकायत मिली है। मामले की जांच की जाएगी। गलती हुई है, तो दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
