इंदौर में 2019 में हुए चर्चित शिवानी हत्याकांड में हाल ही में जिला कोर्ट ने हत्यारे पति को उम्रकैद की सजा सुनाई है। पत्नी की हत्या करने के लिए बैंक अफसर अमितेष उर्फ शालू पटेरिया ने खौफनाक साजिश रची थी। वह इंदौर से 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर शहर से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का कोबरा सर्प 30 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। उसने उसे 11 दिन तक अपने घर में छिपाकर रखा। फिर मौका पाकर तकिए से पत्नी का गला घोंट दिया। इसके बाद कोबरा को मारकर उसके दांत पत्नी के हाथ में गड़ा दिए, ताकि यह साबित हो सके कि उसकी मौत कोबरा के दंश से हुई है। लेकिन, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उसकी साजिश का पर्दाफाश कर दिया। फोरेंसिक साक्ष्यों और डॉक्टर के बयान ने उसके घिनौने खेल की पूरी कहानी उजागर कर दी। करीब साढ़े छह वर्ष तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमितेष को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, कोबरा की हत्या के मामले में तीन साल के कारावास और 25 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। इसके अलावा, साक्ष्य मिटाने के मामले में भी उसे दो साल की सजा मिली। पढ़िए, पूरी रिपोर्ट… डॉक्टर्स को बताया कि सर्पदंश से मौत हुई
इंदौर के संचार नगर में 1 दिसंबर 2019 को घटना हुई थी। यहां रहने वाली शिवानी पटेरिया (35) को उसका पति अमितेश और किरायेदार निखिल एमवायएच लेकर पहुंचे थे। परिजन ने डॉक्टरों को सर्पदंश से मौत होने की सूचना दी। लेकिन, शिवानी के मायके पक्ष ने पुलिस को घटना संदेहास्पद घटना बताई। कनाडिया टीआई घटनास्थल पर पहुंचे तो घर में एक मरा हुआ कोबरा पड़ा था। तब शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी की हत्या की गई है। घर में वह पलंग पर मृत मिली है। पलंग पर ही सांप भी मृत मिला है। कुछ दिन पहले शिवानी को पति अमितेश ने तलाक के लिए प्रयास किया था। वह दिल्ली में किसी युवती के संपर्क में है, इसलिए इसे तलाक देना चाह रहा था। आरोप था कि पति ने पहले से मारने का प्लान किया था। एक बार गला दबा दिया था। फिर दो दिन पहले जहर देने की कोशिश की थी। घटना वाली सुबह हमें पार्लर में सांप के डसने के कारण अस्पताल ले जाने की बात कही। जब हमने बात कराने के लिए कहा कि बोले- बात नहीं कर सकती। शाम पांच बजे हमें मौत की सूचना दी। घर में ससुर ओमप्रकाश व ननद ऋचा भी थी। शिवानी के पिता ने कहा था- बेटी की हत्या हुई शिवानी के पिता आनंद दीक्षित का कहना था कि दामाद ने ही अपनी बहन के साथ मिलकर बेटी की हत्या की है। प्लानिंग के तहत घटना वाले दिन शिवानी के दोनों बच्चों को लेकर उसकी बहन मॉल घुमाने चली गई थी। शाम को जब बच्चे लौटे तो वह अस्पताल में थी। जब ये उसे अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने बताया कि इसकी मौत 10 से 12 घंटे पहले ही हो चुकी है। मेरी बेटी का शरीर काला पड़ने की जगह पीला था। उसे कौन सा जहर दिया गया, यह कह पाना मुश्किल है, लेकिन सांप के डसने से तो मौत नहीं हुई है। उन्होंने बताया था कि उन्होंने 9 साल पहले बेटी की शादी की थी। दामाद दिल्ली में किसी और लड़की के साथ पति-पत्नी की तरह रहता है। हमने उसकी जानकारी निकाली और दिल्ली पहुंचे तो वह महिला के साथ मिला था, इसके बाद हम उसे पकड़कर लाए थे। 9 साल पहले शादी हुई थी। वह आए दिन दहेज के नाम पर उसे प्रताड़ित करता था। अब तक एक लाख-दो लाख कर मैंने उसे करीब 25 लाख रुपए दे दिए होंगे। पिता ने गुहार की थी कि जिस सांप के डसने से बेटी की मौत की बात कही जा रही है, उसका वेटनरी डॉक्टर द्वारा पोस्टमार्टम करवाया जाए। …और गहराता गया पुलिस का शक इस पर पुलिस को भी उनके बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर शक हुआ। पुलिस ने अमितेष पटेरिया को हिरासत में लेकर दो दिनों पूछताछ की तो पहले तो वह गुमराह रहता लेकिन फिर टूट गया। उसने बताया कि आए दिन उसका शिवानी से विवाद होता था। इसके चलते उसने उसकी तकिए से मुंह दबाकर हत्या कर दी। इसके पूर्व वह राजस्थान के अलवर से एक कोबरा सांप खरीदकर लाया था। उसे मारने के बाद उसने उसे पत्नी के पास रखा दिया था ताकि पुलिस को लगे कि सांप के डसने से मौत हुई। इस मामले में कनाड़िया पुलिस ने जांच के बाद अमितेष, पिता ओमप्रकाश पटेरिया और उसकी बहन ऋचा चतुर्वेदी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और वन्य जीव संरक्षण की धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। बहरहाल, 24 जून 2026 को कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि आरोपी अमितेष ने पत्नी की तकिए से मुंह दबाकर हत्या की और फिर उसे सांप के काटने से हुई प्राकृतिक मौत साबित करने के लिए सुनियोजित साजिश रची थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली पूरी कहानी
मामले में सबसे बड़ा मोड़ पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से आया। मेडिकल बोर्ड ने स्पष्ट किया कि शिवानी की मौत सांप के जहर से नहीं बल्कि तकिए या किसी वस्तु से मुंह दबाकर दम घोंटने के कारण हुई थी। शव पर मिले चोटों के निशान, बिस्तर की स्थिति और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों ने भी हत्या की ओर संकेत किया। जांच के दौरान पुलिस को बिस्तर, तकिए का कवर, मृत कोबरा और अन्य सामग्री से महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य मिले। घटनास्थल पर बिस्तर की चादर अस्त-व्यस्त मिली और तकिए के कवर पर लार जैसे धब्बे पाए गए, जिससे पुलिस का संदेह और गहरा गया। मोबाइल रिकॉर्डिंग और परिस्थितिजन्य साक्ष्य बने अहम कोबरा की हत्या ने बढ़ाई कानूनी मुश्किलें इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू यह भी रहा कि हत्या की साजिश में एक संरक्षित वन्य जीव कोबरा का उपयोग किया गया। जांच में सामने आया कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने और मौत को सर्पदंश दर्शाने के लिए कोबरा का उपयोग किया गया और बाद में उसे भी मार दिया गया। इसी कारण आरोपी अमितेष पर भादंवि की धाराओं के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 51 के तहत भी केस दर्ज किया गया। कोर्ट ने माना कि संरक्षित वन्यजीव की अवैध हत्या और उसका अपराधिक षड्यंत्र में उपयोग गंभीर अपराध है। इसके जवाब में डॉ. उत्तम यादव (वेटरनरी, कमला नेहरू वन्य प्राणी संग्रहालय) ने अपनी रिपोर्ट और बयान में बताया कि सांप कोबरा प्रजाति का होकर विषैला है। उसका एक दांत था और विषैली ग्रंथि भी है। इसके डंसने से जान जा सकती है और व्यक्तिगत लकवाग्रस्त हो सकता है। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सांप के डसने के साक्ष्य नहीं मिले और मौत का कारण गला दबाने से दम घुटने से साबित हुआ। खास यह रहा कि भले ही कोबरा के डंसने से मौत साबित नहीं हुई लेकिन अमितेष द्वारा उसकी हत्या करना जरूर साबित हुआ और तीन साल की सश्रम सजा हुई। एक्सपर्ट के मुताबिक सांप के जीवित व्यक्ति को डसने और मृत व्यक्ति को डसने के वैज्ञानिक साक्ष्यों में काफी अंतर होता है। इस केस में ऐसा कुछ नहीं पाया गया।
