मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई (नॉन-रेजिडेंट इंडियन) कोटे की सीटों पर प्रवेश के नियम इस बार सख्त कर दिए गए हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी ने सभी मेडिकल कॉलेजों और राज्यों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया है कि 2026-27 की नीट-यूजी और पीजी काउंसलिंग में एनआरआई कोटे का लाभ उन्हीं अभ्यर्थियों को मिलेगा, जो सुप्रीम कोर्ट की तय पात्रता शर्तें पूरी करेंगे। अब केवल किसी एनआरआई रिश्तेदार का नाम बताना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी साबित करना होगा कि वही व्यक्ति छात्र का कानूनी अभिभावक है। इसके लिए शपथ-पत्र व गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट, 1890 के अनुरूप अभिभावक होने का प्रमाण देना होगा। यह व्यवस्था ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया श्रेणी व भारतीय से एनआरआई श्रेणी में राष्ट्रीयता बदलने वाले अभ्यर्थियों पर भी लागू होगी। हालांकि, नए नियम मप्र में लागू होने पर संशय है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की डीएमई डॉ. अरुणा कुमार का कहना है कि मप्र में काउंसलिंग 2018 के नियमों से कराई जाती है। नए नियम जारी हुए हैं तो पहले गजट में संशोधन करना होगा। इसके बाद लागू होंगे। बता दें कि मप्र के 6 निजी कॉलेजों में एआरआई कोटे के तहत 15% यानी करीब 100-110 सीटें आरक्षित हैं। एक सीट की सालाना फीस करीब 30 लाख रु. है। पिछले कुछ वर्षों में फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्र के जरिए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के मामले बढ़े हैं… Q. क्यों जारी करने पड़े निर्देश?
– पिछले कुछ वर्षों में फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्र और फर्जी स्पॉन्सर के जरिए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के कई मामले सामने आए। पिछले साल इंदौर के एक निजी मेडिकल कॉलेज में बेलारूस स्थित भारतीय दूतावास के नाम पर जारी एनआरआई प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिला ले लिया गया था। कॉलेज ने सत्यापन कराया तो दूतावास ने प्रमाणपत्र को फर्जी बता दिया। नीट-पीजी में 48 डॉक्टरों के फर्जी एनआरआई प्रमाणपत्र लगाने का मामला भी सामने आया था। Q. एनआरआई कोटे का लाभ किसे मिलेगा?
– सुप्रीम कोर्ट के अनुसार पात्रता तीन स्थितियों में होगी। यदि माता या पिता एनआरआई हों, या प्रथम श्रेणी का रिश्तेदार (सगा भाई या सगी बहन) एनआरआई हो। इसके अलावा सगे चाचा-चाची, मामा-मामी, दादा-दादी, नाना-नानी या प्रथम श्रेणी के चचेरे-ममेरे भाई-बहन भी आधार बन सकते हैं, पर शर्त यह है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं एनआरआई हो, सामान्य रूप से विदेश में रहता हो और वास्तव में छात्र का कानूनी अभिभावक हो।
