कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव में अपना नामांकन खारिज होने के मामले में पहली बार खुलकर चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नामांकन निरस्त होने के लिए कांग्रेस के किसी नेता या फॉर्म भरने वालों की कोई गलती नहीं थी। चुनाव आयोग को बचाने के लिए सुनियोजित तरीके से यह थ्योरी गढ़ी गई कि पार्टी की लापरवाही से नामांकन खारिज हुआ। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तय समय सीमा के भीतर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी और पूरे मामले को कानूनी रूप से चुनौती देगी। नामांकन खारिज करने का आधार ही गलत था मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि जिस आधार पर उनका नामांकन निरस्त किया गया, वह कानूनी रूप से टिकता ही नहीं है। रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा कि उनके खिलाफ लंबित मामले की जानकारी नहीं दी गई, जबकि नामांकन फॉर्म-26 में ऐसी जानकारी भरने का कोई कॉलम ही नहीं है। बाद में हैदराबाद की अदालत ने भी स्पष्ट कर दिया कि उस मामले में अदालत ने संज्ञान ही नहीं लिया था। ऐसे में नामांकन निरस्त करने का पूरा आधार ही गलत साबित होता है। कांग्रेस नेताओं की गलती बताना सुनियोजित प्रचार मीनाक्षी ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि कांग्रेस नेताओं या उनके वकीलों की लापरवाही से नामांकन खारिज हुआ। उन्होंने कहा कि वह स्वयं कई चुनाव लड़ चुकी हैं और पार्टी के वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ वर्षों से नामांकन भरते रहे हैं। ऐसी सामान्य गलती की कोई संभावना ही नहीं थी। यह पूरी कहानी इसलिए फैलाई गई ताकि चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल न उठें। झारखंड और मध्य प्रदेश में अलग-अलग नियम लागू किए गए उन्होंने आरोप लगाया कि एक जैसे मामलों में दो राज्यों में अलग-अलग व्यवहार किया गया। झारखंड में राज्यसभा उम्मीदवार परिमल नाथवानी को नामांकन में सुधार के लिए 24 घंटे का समय दिया गया, जबकि मध्य प्रदेश में उन्हें ऐसा कोई अवसर नहीं मिला। इससे साफ है कि चुनाव आयोग ने समान परिस्थितियों में समान नियम लागू नहीं किए। हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी कांग्रेस मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि कांग्रेस 45 दिन के भीतर हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी। पार्टी का लीगल सेल वरिष्ठ वकीलों की निगरानी में पूरी तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में भी पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा था। अब पूरे मामले की कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट में लड़ी जाएगी। चुनाव आयोग निष्पक्ष संस्था की भूमिका नहीं निभा रहा उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने पूरे मामले में निष्पक्षता नहीं दिखाई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वकील समय पर आयोग पहुंचे और अपना पक्ष रखा, लेकिन आयोग ने समय निकालने की रणनीति अपनाई। उनके अनुसार आयोग चाहता तो रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश बदल सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। NEET और पेपर लीक से युवाओं का भविष्य खतरे में मीनाक्षी ने कहा कि NEET सहित विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने युवाओं का भविष्य अंधकार में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की खामियों के कारण कई छात्रों ने आत्महत्या तक कर ली। कांग्रेस इस मुद्दे को प्रदेशभर में उठाएगी। 14-15 जुलाई को इंदौर से भोपाल तक साइकिल यात्रा निकाली जाएगी और 9 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन होगा। कृषि और ट्रेड नीति से किसानों को नुकसान उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के साथ हुए ट्रेड समझौतों और दालों के आयात संबंधी फैसलों से किसानों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मूंग उत्पादकों को पर्याप्त राहत देने, आयात नीति की समीक्षा करने और सोयाबीन किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की। उनका कहना था कि सरकार की नीतियां किसानों के बजाय बड़े कॉरपोरेट घरानों के हित में दिखाई देती हैं। मुख्यमंत्री परिवार की जमीनों की पारदर्शी जांच हो मीनाक्षी नटराजन ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीनों में हुई वृद्धि का हवाला देते हुए कहा कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को संकट झेलना पड़ रहा है, जबकि दूसरी ओर कुछ लोगों की जमीनों और प्लॉटों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए। दिग्विजय सिंह की यात्रा निजी और गैर-राजनीतिक दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या यात्रा पर उन्होंने कहा कि यह उनका निजी कार्यक्रम है। स्वयं दिग्विजय सिंह इसे गैर-राजनीतिक यात्रा बता चुके हैं, इसलिए इस पर किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
