खंडवा और बुरहानपुर जिले के कोरकू समाज ने 13 जुलाई को खंडवा में महाआंदोलन करने का आह्वान किया है। आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर प्रचार के साथ ही गांव-गांव में बैठकें ली जा रही हैं। उनके द्वारा जंगल क्षेत्र में बाहरी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। वन विभाग की कार्रवाई के समर्थन में बड़ी संख्या में समाजजन जुटेंगे। आंदोलन 13 जुलाई (सोमवार) को सुबह 10 बजे खंडवा में शुरू होगा और आंदोलन समाप्त होने तक जारी रहेगा। इसे कोरकू समाज, खंडवा-बुरहानपुर की ओर से आयोजित होना बताया गया है। दो हजार से ज्यादा लोगों के जुटने का दावा
आंदोलन को सफल बनाने के लिए कोरकू समाज संगठन ने खंडवा और बुरहानपुर जिले के गांव-गांव में बैठकें शुरू कर दी हैं। समाज के पदाधिकारियों के अनुसार, बुरहानपुर जिले से भी बड़ी संख्या में समाजजन आंदोलन में शामिल होने के लिए खंडवा पहुंचेंगे। संगठन का दावा है कि करीब दो हजार समाजजन खंडवा कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करेंगे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपेंगे। ये हैं आंदोलन के प्रमुख मुद्दे
बताया गया कि कोरकू समाज वर्षों से जंगलों की रक्षा करता आया है और जल, जंगल एवं जमीन को अपनी संस्कृति और जीवन का आधार मानता है। समाज का आरोप है कि बाहरी अतिक्रमणकारी जंगलों पर कब्जा कर रहे हैं, जिससे वन संपदा, पर्यावरण और आदिवासी समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर समाज के लोगों को धमकियां दी जाती हैं, झूठे मामलों में फंसाया जाता है और जंगलों की अवैध कटाई की जा रही है। वन विभाग के समर्थन का दावा
समाज ने हाल ही में हुई वन विभाग द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को सही और आवश्यक बताया गया है। इसमें कहा गया है कि वन संरक्षण से ही जल, जंगल और भविष्य सुरक्षित रहेगा तथा समाज वन विभाग की वैधानिक कार्रवाई में पूरा सहयोग करेगा। आंदोलन की प्रमुख मांगें 13 जुलाई को आमने-सामने हो सकते हैं दोनों पक्ष
इधर, जिन लोगों पर अतिक्रमण के आरोप लगाए जा रहे हैं, उनकी ओर से भी 13 जुलाई को प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की बात कही गई हैं। ऐसे में एक ओर वन संरक्षण और अतिक्रमण हटाने के समर्थन में कोरकू समाज प्रदर्शन करेगा, जबकि दूसरी ओर अतिक्रमण कार्रवाई का विरोध करने वाले लोगों के भी प्रदर्शन की संभावना है। इसे देखते हुए 13 जुलाई को खंडवा में दोनों पक्षों के आमने-सामने आने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी। हालांकि अब तक आंदोलन को लेकर जिला प्रशासन या वन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। 13 जुलाई को प्रस्तावित दोनों पक्षों के संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रहेगी।
