मध्य प्रदेश के 70 हजार अतिथि शिक्षकों में से करीब आठ हजार ऐसे अतिथि शिक्षक हैं जो अलग-अलग कारणों से अपनी ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत नहीं कर सके हैं। ऐसे अतिथि शिक्षकों को राहत देने का फैसला स्कूल शिक्षा विभाग ने लिया है। लोक शिक्षण आयुक्त ने कहा है कि ऐसे अतिथि शिक्षकों के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में बनाई जाने वाली तीन सदस्यीय समिति तय समय अवधि में फैसला करेगी। यह निर्णय अतिथि शिक्षकों की री-जॉइनिंग को लेकर सामने आ रहे विवाद के बाद लिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने रविवार को जारी आदेश में कहा है कि 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की अनिवार्यता से संबंधित जो आवेदन मिले हैं, उन आवेदनों के परीक्षण एवं निर्णय के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि जिन अतिथि शिक्षकों की शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस पूरी नहीं हो सकी या जिनकी उपस्थिति 90 प्रतिशत से कम रही, वे अपने आवेदन ई-मेल के माध्यम से संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पेश कर सकेंगे। तीन सदस्यीय कमेटी करेगी फैसला लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह द्वारा निर्देश में कहा गया है कि सभी जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति प्राप्त आवेदनों एवं दस्तावेजों की जांच कर नियमानुसार अंतिम निर्णय लेगी। संचालनालय ने यह भी निर्देश दिए हैं कि यदि तय कारणों के अतिरिक्त कोई विशेष परिस्थिति हो, तो जिला समिति उसका भी साक्ष्यों सहित परीक्षण कर निर्णय ले सकेगी। सभी प्रकार के आवेदनों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा में करना अनिवार्य होगा। 2 जुलाई को री जॉइनिंग को लेकर यह निर्देश हुए थे जारी इसके पहले लोक शिक्षण आयुक्त कार्यालय के संचालक ने जारी निर्देश में कहा था कि अतिथि शिक्षक 90 प्रतिशत या इससे अधिक ई अटेंडेंस के आधार पर री जॉइनिंग रिक्वेस्ट कर सकेंगे। इसको लेकर यह स्पष्ट किया गया था कि सत्र से तात्पर्य माह फरवरी 2026 से अप्रेल 2026 तक 90 प्रतिशत या इससे अधिक अटेंडेंस है और इसी अवधि का नियमित रूप से मानदेय प्राप्त होने से है। इसी आधार पर ई अटेंडेंस तय की जाएगी। विभाग के इस फैसले का अतिथि शिक्षकों द्वारा विरोध किया जा रहा है। अतिथि शिक्षक इसलिए कर रहे विरोध अतिथि शिक्षकों का कहना है कि लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारी मनमाने आदेश जारी कर रहे हैं। री-ज्वाइनिंग के लिए यदि रिजल्ट को शर्त बनाया जाए तो समझ में भी आता है, लेकिन अजीब दलील देखिए। यदि 100% रिजल्ट देने वाले अतिथि शिक्षक की अटेंडेंस 89% हो तो उसकी री-ज्वाइनिंग नहीं मिलेगी जबकि 90% अटेंडेंस वाले अतिथि शिक्षक ने यदि 75 प्रतिशत रिजल्ट दिया है तो भी उसकी नौकरी मिल जाएगी।
