नगरीय विकास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र विवाद में प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर सतना जिले के नागौद तहसील के ग्राम वसुधा में शुक्रवार को डुगडुगी बजाकर आम लोगों को सूचना दी गई। शनिवार को हरदुआ और मझोल गांवों में भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की कि यदि किसी के पास मंत्री की जाति से संबंधित कोई तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य हों, तो वे उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी किया है। उन्हें 6 जुलाई 2026 को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। समिति ने सतना कलेक्टर को नोटिस की तामील सुनिश्चित करने के विशेष निर्देश दिए थे। जारी निर्देशों के तहत, इश्तहार की प्रतियां तहसील कार्यालय नागौद, जनपद पंचायत कार्यालय और संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई हैं। ग्राम पंचायत वसुधा में डुगडुगी पिटवाकर इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। शनिवार को राजस्व निरीक्षक वृत्त डाम्हा को ग्राम हरदुआ, मझोल और वसुधा में सूचना का सार्वजनिक प्रकाशन कर पंचनामा रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए। कांग्रेस नेता ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में उन्हें राज्य सरकार में मंत्री पद भी मिला। मामले को लेकर कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने उनकी जाति को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में दावा किया गया कि क्षेत्र में बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है तथा प्रतिमा बागरी स्वयं राजपूत/ठाकुर समुदाय से संबंधित हैं, इसलिए उनका एससी प्रमाण-पत्र वैध नहीं है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद छानबीन समिति सक्रिय
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद समिति ने शिकायतकर्ता, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी तथा अन्य संबंधित पक्षों को साक्ष्य और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर देने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में गांव में डुगडुगी पिटवाकर सार्वजनिक सूचना जारी की गई है ताकि स्थानीय लोग भी यदि आवश्यक समझें तो जाति संबंधी साक्ष्य समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। अब 6 जुलाई को होने वाली पेशी पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज और पक्ष समिति के समक्ष रखे जाएंगे।
