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मुस्कान बोली-मुझे बारात नहीं, अपनी पूरी जिंदगी दिख रही थी:कहा- 4 लोग दूल्हे को संभाल रहे थे, मेरा जीवन कैसे संभालता, इसलिए तोड़ी शादी

बारात दरवाजे पर पहुंच चुकी थी। ढोल-नगाड़े बज रहे थे। रिश्तेदार शादी की रस्मों में जुटे थे। हर कोई बस उस पल का इंतजार कर रहा था, जब दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को वरमाला पहनाएंगे, लेकिन जांजगीर-चांपा जिले के कोसमंदा गांव में 23 जून की शाम कुछ ऐसा हुआ, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। द्वार पूजा के लिए जैसे ही दूल्हा पहुंचा, वह अपने पैरों पर ठीक से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था। शराब के नशे में लड़खड़ाते दूल्हे को देखकर दुल्हन मुस्कान प्रधान ने एक पल के लिए भी समझौता नहीं किया। उसने साफ कह दिया- ‘मैं शादी नहीं करूंगी।’ कुछ ही मिनटों में खुशियों का माहौल तनाव में बदल गया। दोनों परिवार आमने-सामने आ गए, लेकिन मुस्कान अपने फैसले से पीछे नहीं हटी। मुस्कान उस दिन को याद करती है तो उसकी आवाज में घबराहट कम और आत्मविश्वास ज्यादा दिखाई देता है। वह कहती है कि उस वक्त उसे सिर्फ एक बात समझ आई थी, अगर आज चुप रही, तो पूरी जिंदगी पछताना पड़ेगा। मुस्कान कहती है कि शादी सिर्फ एक दिन का रिश्ता नहीं होती। यह पूरी जिंदगी का फैसला होता है, इसलिए किसी लड़की को सिर्फ समाज क्या कहेगा, इस डर से गलत इंसान के साथ जिंदगी नहीं बितानी चाहिए। हर लड़की को शादी से पहले लड़के और उसके परिवार के बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए। अगर कहीं कोई ऐसी बात दिखे, जो आगे चलकर परेशानी बन सकती है, तो उस पर खुलकर फैसला लेना चाहिए। वहीं, इस फैसले में सबसे बड़ी ताकत मां बनी। पति के निधन के बाद मजदूरी कर बच्चों को पालने वाली मां ने समाज की बातों से ज्यादा बेटी के भविष्य को महत्व दिया। उन्होंने बिना किसी दबाव के मुस्कान का साथ दिया। पहले देखिए ये तस्वीरें- शादी टूट गई, लेकिन मुस्कान नहीं टूटी इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर मुस्कान की कहानी हजारों लोगों तक पहुंची। लोगों ने इसे सिर्फ एक शादी टूटने की घटना नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान और नशे के खिलाफ मजबूत संदेश बताया। मामले की जानकारी मिलने पर एसपी विजय कुमार पांडेय ने भी मुस्कान को सम्मानित किया। उन्हें नशा मुक्ति अभियान का यूथ आइकन बनाया गया और महिला परिवार परामर्श केंद्र में मानदेय के साथ जिम्मेदारी देने की घोषणा की गई। लेकिन, मुस्कान कहती है कि उसके लिए सबसे बड़ा सम्मान कोई पुरस्कार नहीं है। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर उसकी कहानी सुनकर एक भी लड़की गलत रिश्ते में जाने से बच जाती है, तो उसे लगेगा कि उसका फैसला सही था। क्योंकि उस दिन उसने सिर्फ एक शादी नहीं रोकी थी, उसने अपनी पूरी जिंदगी बचाने का फैसला लिया था। पिता नहीं थे… मां ने मजदूरी कर पाला मुस्कान की कहानी सिर्फ एक शादी टूटने की नहीं है। इसके पीछे संघर्ष के कई साल छिपे हैं। जब वह छोटी थी, तभी पिता का निधन हो गया। घर की पूरी जिम्मेदारी मां के कंधों पर आ गई। मजदूरी कर उन्होंने 3 बेटियों और एक बेटे की परवरिश की। गरीबी थी, लेकिन मां ने बच्चों को इतना जरूर सिखाया कि इज्जत और आत्मसम्मान से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता। शायद यही वजह थी कि जब शादी वाले दिन मुस्कान ने दूल्हे को शराब के नशे में लड़खड़ाते देखा, तो उसने समाज या रिश्तेदारों की परवाह नहीं की। मुस्कान को अपनी मां की बरसों की मेहनत याद आई। वह जानती थी कि जिस मां ने अकेले संघर्ष करके उसे इस मुकाम तक पहुंचाया, उसकी बेटी अपनी पूरी जिंदगी किसी नशेड़ी के भरोसे नहीं छोड़ सकती। खास बात यह रही कि जिस पल पूरे गांव में शादी टूटने की चर्चा हो रही थी, उसी वक्त मां अपनी बेटी के साथ चट्टान बनकर खड़ी रहीं। उन्होंने समाज के तानों से ज्यादा बेटी के भविष्य को चुना। आज मुस्कान कहती है कि अगर उस दिन मां उसका साथ नहीं देतीं, तो शायद इतना बड़ा फैसला लेना आसान नहीं होता। और उसकी मां के लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि बेटी ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान के लिए फैसला लिया। सबसे पहला सवाल था- शराब पीते हो या नहीं? कुछ समय बाद रिश्तेदारों के जरिए संत कुमार का रिश्ता आया। परिवार ने सामान्य तरीके से बातचीत की। मुस्कान ने कहा कि ‘हमने पूछा था कि शराब पीते हो या नहीं। उसने कहा कि नहीं पीता। उस समय लड़का ठीक लगा था, इसलिए परिवार ने रिश्ता तय कर दिया।’ यहीं से शादी की तैयारियां शुरू हो गईं। सगाई वाले दिन पहला शक हुआ, लेकिन उसने एक मौका दिया। मुस्कान बताती है कि सगाई वाले दिन भी लड़का शराब पीकर आया था। हालांकि, उस दिन उसकी हालत ज्यादा खराब नहीं थी। परिवार में इस बात पर चर्चा हुई। यहां तक कि मां ने उसी समय शादी रोकने की बात भी कही।लेकिन मुस्कान ने सोचा कि शायद वह अपनी गलती समझ जाएगा। शादी वाले दिन 4 लोग दूल्हे को पकड़कर ला रहे थे 23 जून को बारात गांव पहुंची। द्वार पूजा की तैयारी चल रही थी, तभी मुस्कान की मां ने आकर बताया कि दूल्हा शराब के नशे में है और चार लोग उसे संभालकर ला रहे हैं। मुस्कान कुछ देर के लिए चुप रही। फिर खुद बाहर निकल गई। सामने जो उसने देखा, उसने उसके सारे सवालों का जवाब दे दिया। मुस्कान ने बताया कि ‘वो अपने पैरों पर भी खड़ा नहीं हो पा रहा था। चार लोग उसे पकड़कर ला रहे थे। मम्मी ने कहा कि जो अपनी शादी में इतना शराब पीकर आया है, उससे शादी नहीं करेंगे। फिर मैं बाहर गई, शादी से मना किया और उसे थप्पड़ भी मारे।’ ‘जो खुद नहीं संभल पा रहा, वो मुझे क्या संभालेगा’ लोगों को मुस्कान का फैसला अचानक लग सकता है, लेकिन उसके लिए यह फैसला एक पल का नहीं था। उसने अपने सामने सिर्फ नशे में खड़ा एक दूल्हा नहीं देखा, उसने अपनी आने वाली पूरी जिंदगी देखी। मुस्कान कहती है, ‘जो इंसान उस दिन खुद को नहीं संभाल पा रहा था, वो बाद में मुझे क्या संभालता? जिसे अपनी इज्जत की परवाह नहीं, मेरी इज्जत की भी परवाह नहीं, वो आगे चलकर क्या करता?’ यही सवाल उसके फैसले की सबसे बड़ी वजह बन गया। ‘अब दूसरा मौका नहीं दूंगी’ जब मुस्कान से पूछा गया कि अगर रिश्ता बचाने का एक और मौका मिले तो क्या वह तैयार होगी? उसका जवाब बिना किसी हिचकिचाहट के आया। ‘एक मौका मैं पहले ही दे चुकी हूं। सगाई वाले दिन सोचा था कि सुधर जाएगा। लेकिन शादी वाले दिन भी वही हालत थी। अब मैं उसे दूसरा मौका नहीं दूंगी।’ उसकी आवाज में गुस्सा कम था, लेकिन अपने फैसले को लेकर पूरा भरोसा था। मां ने बेटी का साथ चुना, समाज का नहीं भारतीय समाज में शादी टूटने का सबसे ज्यादा दबाव अक्सर लड़की और उसके परिवार पर होता है, लेकिन इस कहानी में एक और किरदार है, जिसकी चर्चा उतनी नहीं हुई, मुस्कान की मां। पति के निधन के बाद मजदूरी करके बच्चों को पालने वाली मां ने उस दिन समाज की नहीं, बेटी की जिंदगी की चिंता की। उन्होंने अपनी बेटी से सिर्फ इतना कहा कि अगर लड़का अपनी शादी के दिन इस हालत में है, तो यह रिश्ता नहीं होना चाहिए। शायद यही साथ मुस्कान को इतना मजबूत बना गया। अब फिर से पढ़ाई करना चाहती है मुस्कान दसवीं के बाद मजबूरी में पढ़ाई छोड़ने वाली मुस्कान अब फिर से किताबों की ओर लौटना चाहती है। वह कहती है कि पढ़ाई हमेशा उसकी पहली पसंद रही है। ‘मुझे पढ़ना बहुत पसंद है। मजबूरी में पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। अब अगर प्रशासन मुझे मौका दे रहा है तो मैं जरूर पढ़ूंगी और जितना आगे जा सकूंगी, जाऊंगी।’ मुस्कान के लिए अब जिंदगी की नई शुरुआत शादी से नहीं, शिक्षा से होगी। वह कहती है ‘मेरे जैसी गलती कोई और लड़की न करें’। वहीं, बातचीत के आखिर में मुस्कान दूसरी लड़कियों के लिए एक संदेश देती है। वह कहती है कि शादी तय करने से पहले सिर्फ रिश्तेदारों की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। एक शादी टूटी…लेकिन एक सोच बदल गई मुस्कान की कहानी सिर्फ एक बारात लौटने की कहानी नहीं है। यह उस बेटी की कहानी है, जिसने पिता के बिना संघर्ष में बचपन बिताया, मां की मदद के लिए पढ़ाई छोड़ी, मजदूरी की, लेकिन जिंदगी के सबसे बड़े फैसले पर समझौता नहीं किया। शायद इसलिए आज लोग उसे उस लड़की के रूप में नहीं याद कर रहे, जिसकी शादी टूट गई। बल्कि उस लड़की के रूप में याद कर रहे हैं, जिसने यह तय किया कि एक गलत फैसला पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकता है, और उसने समय रहते अपनी जिंदगी बदलने का साहस दिखाया। …………………. इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… नशे में लड़खड़ाया दूल्हा, दुल्हन ने थप्पड़ मारकर लौटाई बारात:बोली- नशेड़ी से शादी नहीं करूंगी, सगाई में भी पिया था, SP ने किया सम्मानित छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में जैसे ही दूल्हा द्वारपूजा के लिए पहुंचा, दुल्हन ने शादी से इनकार कर दिया। ग्राम कोसमंदा में 23 जून को पहुंची बारात वापस लौट गई। दरअसल, दूल्हा शराब के नशे में था। वह लड़खड़ा रहा था, जिसके बाद वर-वधु पक्ष के बीच झगड़ा हो गया। पढ़ें पूरी खबर…

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