दतिया जिले के उनाव ब्लॉक स्थित आदिवासी डेरा में स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। गुरुवार रात तेज ब्लीडिंग होने पर पांच माह की गर्भवती युवती के परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों को फोन किया, लेकिन मदद नहीं पहुंची। समय पर इलाज न मिलने के कारण शुक्रवार तड़के युवती का घर पर ही गर्भपात (मिसकैरेज) हो गया। अत्यधिक खून बहने से गंभीर हालत में उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले में सीएचओ, एएनएम और आशा पर्यवेक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पीड़ित युवती बड़ौनी क्षेत्र के एक आदिवासी डेरा की रहने वाली है। गुरुवार शाम उसे अचानक तेज ब्लीडिंग शुरू हो गई थी। घबराए पति ने तत्काल क्षेत्र की एएनएम और आशा पर्यवेक्षक को इसकी सूचना दी। परिजनों का आरोप है कि स्थिति की गंभीरता बताने के बावजूद कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचे। वे लगातार फोन करते रहे, लेकिन हर बार सिर्फ जल्द पहुंचने का आश्वासन मिलता रहा। रात भर इंतजार के बाद जब कोई मदद नहीं आई, तो तड़पते हुए युवती का घर पर ही गर्भपात हो गया। एनजीओ की मदद से अस्पताल पहुंची, डीएनसी कर बचाई जान
सरकारी तंत्र से मदद न मिलने पर परिजनों ने क्षेत्र में सक्रिय एक सामाजिक संस्था से संपर्क किया। संस्था के सदस्यों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए पीड़िता को दतिया जिला अस्पताल पहुंचाया। जांच में अत्यधिक खून बह जाने के कारण युवती का हीमोग्लोबिन स्तर गिरकर मात्र 7.5 ग्राम/डीएल पाया गया, जो बेहद जानलेवा स्थिति होती है। डॉक्टरों ने तुरंत जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर डीएनसी (गर्भाशय की सफाई) की और युवती की जान बचाई। तीन स्वास्थ्य कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस
आदिवासी युवती के साथ हुई इस लापरवाही की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) डॉ. राहुल चऊदा ने ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन जिम्मेदारों पर कार्रवाई की है। अगोरा क्षेत्र के कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) डॉ. नितिन कुमार, एएनएम शाहीन बेगम और आशा पर्यवेक्षक खुश्बू यादव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। दस्तावेजों में जन्मतिथि 2009, परिजनों ने उम्र 19 वर्ष बताई
पीड़िता की शादी करीब डेढ़ साल पहले हुई थी और वह 5 माह 15 दिन की गर्भवती थी। दस्तावेजों के अनुसार, युवती के आधार कार्ड में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2009 दर्ज है। इस पर परिजनों ने सफाई देते हुए कहा है कि आधार कार्ड में उम्र गलती से कम दर्ज हो गई है, जिसमें जल्द सुधार कराया जाएगा। परिजनों ने पीड़िता की वास्तविक उम्र 19 वर्ष बताई है। सीएमएचओ बोले- दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई
इस पूरे मामले पर जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने इसे बड़ी लापरवाही माना है। सीएमएचओ डॉ. बीके वर्मा ने कहा, यह एक बड़ी लापरवाही का मामला है। फिलहाल युवती का अस्पताल में उपचार चल रहा है और अब उसका स्वास्थ्य ठीक है। संबंधित सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ता को नोटिस जारी कर दिया गया है। मामले की जांच जारी है और दोषी पाए जाने पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
