इंदौर की दो वर्षीय मासूम काशवी यादव अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत के पीछे का सच आज भी दफन है। न्याय की उम्मीद में परिवार ने चार दिन बाद बच्ची का शव कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम कराया, मगर इस पूरी कवायद के बाद भी मौत की वजह सामने नहीं आ सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जितने जवाब देने थे, उससे कहीं ज्यादा सवाल खड़े कर दिए हैं। महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज के तीन डॉक्टरों डॉ. सुनील कुमार सोनी (फोरेंसिक मेडिसिन एण्ड टेक्नोलॉजी), डॉ. सूरज साहू ((पीडियाट्रिक) और डॉ. पूजा प्रपन्ना (पैथालॉजी) की पैनल द्वारा किया गया। आखिर कैसे मिलेगी फाइंडिंग्स? सबसे पीड़ादायक पहलू यह है कि जिस पोस्टमार्टम से परिवार को उम्मीद थी कि बेटी की मौत का सच सामने आएगा, वह उम्मीद अधूरी रह गई। रिपोर्ट में काशवी की मौत और पोस्टमार्टम के बीच का समय निर्धारित नहीं किया जा सका। डॉक्टरों ने अंतिम राय के लिए मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के परीक्षण की जरूरत बताई है। प्राइवेट क्लीनिक में लापरवाही से बिगड़ी थी हालत काशवी के माता-पिता निशा और नितिन यादव पहले ही आरोप लगा चुके हैं कि भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित ‘द हेल्थ केयर क्लिनिक’ में डॉ. अनिल गई द्वारा किए गए गलत इलाज और लापरवाही के कारण उनकी बेटी की जान गई। उनका कहना है कि साधारण उल्टी-दस्त की शिकायत पर बच्ची को क्लिनिक ले जाया गया था, लेकिन ड्रिप चढ़ाने के बाद उसकी हालत बिगड़ती चली गई। अगले दिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे थे परिजन पोस्टमार्टम रिपोर्ट कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं दे पाई है, परिवार की उम्मीदें जांच एजेंसियों और उपलब्ध दस्तावेजों पर टिक गई हैं। परिजन मानते हैं कि इलाज से जुड़े दस्तावेज, हाई कोर्ट द्वारा क्लिनिक को लेकर पूर्व में दिए गए आदेश और स्वास्थ्य विभाग की पुरानी कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं। इसे लेकर मंगलवार को परिजन अपने एडवोकेट कुणाल भंवर के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे थे और कार्रवाई न्याय की मांग की थी। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच ही शुरू नहीं खास बात यह कि दो हफ्ते से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच ही शुरू नहीं हुई है। न किसी पर कार्रवाई हुई और न ही जांच की दिशा स्पष्ट की गई। इससे परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही है। माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन अगर किसी की लापरवाही से उसकी जान गई है तो जिम्मेदारों को सजा मिलनी चाहिए काशवी का परिवार अपनी मासूम बेटी को खोने के बाद भी उसके लिए न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। ये खबर भी पढ़ें… 4 दिन बाद बच्ची का शव कब्र से निकाला इंदौर के जिस घर में कुछ दिन पहले तक दो साल की काशवी की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा है। बच्ची की संदिग्ध हालात में हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है। परिजन का आरोप है कि निजी क्लिनिक में गलत इलाज के कारण उनकी बेटी की जान गई। मामले की सच्चाई जानने के लिए मौत के 4 दिन बाद प्रशासन की अनुमति से मंगलवार को बच्ची का शव श्मशान घाट से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया था।पूरी खबर पढ़ें
