रतलाम जेल में बंद फर्जी नारकोटिक्स टीआई सपना ठाकुर ने प्रॉपर्टी ब्रोकर रुपेश चरपोट से 4.75 करोड़ रुपए ठगने के साथ उसके जीजा को भी झांसे में ले लिया था। पुलिस अधिकारी की तरह बात करने वाली सपना ने कमल मल्हार को मुंबई के एक मामले में सेटलमेंट कराने का भरोसा दिया। इसके बदले 15 लाख 45 हजार रुपए वसूल लिए। इस पूरे मामले से जुड़ी बातचीत की तीन रिकॉर्डिंग सामने आई है। इनमें सपना, कमल मल्हार को लाइन पर रखते हुए मुंबई के इमरान से बात करती सुनाई दे रही है। बातचीत में वह केस दर्ज कराने, आरोपी को उठवाने, रकम की रिकवरी कराने और मामला सेटल कराने की बात कह रही है। उसने कमल से 7-8 पेटी तैयार रखने को कहा। उसने कहा, “अपन पुलिस वाले बने क्यों है… मैं सब बैठा दूंगी। केस की हल्दी-मेहंदी करा देंगे।” रुपए लेकर भागा था हुंडी दलाल रतलाम के तेजा नगर निवासी प्रॉपर्टी ब्रोकर रुपेश चरपोट (48) ने करीब 10 महीने पहले 64 लाख रुपए की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। चरपोट के अनुसार, दिसंबर 2025 में रतलाम का हुंडी दलाल विजय लोढ़ा उसके लाखों रुपए लेकर फरार हो गया था। ये रकम ब्याज पर चलाने के लिए दी गई थी। पुलिस ने विजय लोढ़ा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फिलहाल मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसी मामले में विजय लोढ़ा से रकम वापस दिलाने का भरोसा देकर सपना ठाकुर ने चरपोट से संपर्क किया। 10 से 15 दिसंबर 2025 के बीच उसके मोबाइल पर 9244016847 और 9244216847 नंबरों से कॉल किए। खुद को मंदसौर में नारकोटिक्स टीआई बताया। मकान-फ्लैट की कुर्की से शुरू हुआ खेल सपना ने चरपोट को भरोसा दिलाया कि वह विजय लोढ़ा के मकान और फ्लैट की कुर्की कराकर रकम वापस दिलवा सकती है। उसने मकान और फ्लैट पर बैंक लोन होने की बात कही और दावा किया कि यदि चरपोट लोन क्लियर करा देता है तो हाईकोर्ट के जरिए संपत्ति उसके नाम करवा देगी। इसी भरोसे में चरपोट ने उसे रकम देना शुरू कर दिया। शिकायत के अनुसार, शुरुआत में मकान-फ्लैट की कार्रवाई और अन्य कानूनी काम कराने के नाम पर करीब 70 लाख रुपए नकद लिए गए। बाद में खुद को टीआई बताने वाली सपना ने प्रॉपर्टी ब्रोकर से 3.45 करोड़ रुपए नकद और तेजा नगर स्थित 1.30 करोड़ रुपए का मकान भी अपने कब्जे में ले लिया। इसकी रजिस्ट्री अपने नाम करा ली। मुंबई के केस में मदद करने की बात कही रुपेश चरपोट सपना के झांसे में था। इसी दौरान उसने अपने जीजा कमल मल्हार को मुंबई के एक मामले में मदद के लिए सपना से मिलवाया। कमल मल्हार रतलाम की जैन कॉलोनी में रहते हैं और सिल्वर गिफ्ट आइटम का कारोबार करते हैं। उनका मुंबई में भी ऑफिस है। भाई की दुकान भी है। कमल ने बताया कि उसने 2024 में मुंबई में एक महिला को सामान लाने-ले जाने के काम के लिए रखा था। दोस्त की बेटी की शादी और दामाद के लिए करीब 30 लाख रुपए उस महिला के जरिए भेजे थे। महिला ने इसमें से 22.50 लाख रुपए निकाल लिए और 7.50 लाख रुपए उसके भाई को दिए। पूछने पर महिला ने बताया कि वापी में पुलिस वालों ने रुपए ले लिए हैं। इसके बाद कमल ने महिला ज्योति के खिलाफ मुंबई जीआरपी में शिकायत की थी। सपना ठाकुर ने दावा किया कि मुंबई सीएम हाउस में उसके परिचित हैं और वहां बात हो चुकी है। उसने कमल से गुजरात के वापी में भी शिकायत करने को कहा और भरोसा दिलाया कि वहां उसके पहचान वाले लोग हैं। सीएम हाउस में संपर्क होने का झांसा दिया सपना ने कमल को यह भरोसा दिलाया कि वह मुंबई और वापी में अपने संपर्कों के जरिए पूरा मामला संभाल लेगी। इसके बाद उसने मुंबई में इमरान नाम के व्यक्ति को फोन किया। रिकॉर्डिंग में वह कमल के मामले की पूरी जानकारी इमरान को देती सुनाई देती है और रकम रिकवर कराने की बात करती है। सपना ने कमल से पुलिस और वकील को देने के नाम पर कुल 15 लाख 45 हजार रुपए लिए। लेकिन इसके बाद न तो रकम रिकवर हुई और न ही मामले में कोई काम हुआ। जब कमल ने रुपए वापस मांगे तो सपना ने उन्हें पहचानने से ही इनकार कर दिया। फोन पर बातचीत के तीन ऑडियो कोर्ट में लगाया था धमकी देने का आरोप कोर्ट में पेशी के दौरान सपना ठाकुर ने कमल मल्हार पर मकान खाली कराने के नाम पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था। कमल ने इन आरोपों को झूठा बताया है। कमल के अनुसार, उन्होंने अपने रुपए वापस मांगने के लिए सपना को फोन किए थे, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं किया। 24 सितंबर को फोन करने पर इंदौर के एक युवक ने कॉल रिसीव किया और अपना नाम आशु शक्तावत बताया। कमल का कहना है कि दो दिन बाद फिर कॉल करने पर सपना ने फोन उठाया और अनजान बनकर बात की। कमल ने कहा कि यदि सपना के पास धमकी की कोई रिकॉर्डिंग है तो वह एसपी या पुलिस के सामने पेश करे। उन्होंने मामले की हर जांच में शामिल होने की बात कही है। ये खबर भी पढ़ें… फर्जी IAS तृप्ति ने AI से तैयार कराए जॉइनिंग लेटर फर्जी IAS तृप्ति सिंह मामले की जांच में एक और अहम खुलासा हुआ है। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि तृप्ति और उसके भाई सुधांशु नौकरी के नाम पर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। उनके लिए फर्जी जॉइनिंग लेटर और दस्तावेज साथी प्रखर तैयार करता था। प्रखर इन दस्तावेजों को तैयार करने में AI की मदद लेता था। पढे़ं पूरी खबर…
