मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार लंबा हो रहा है। सामान्यत: 15-16 जून तक मानसून प्रदेश में एंटर हो जाता है, लेकिन इस बार इसके करीब 10 दिन लेट यानी 25 जून तक आने की संभावना है। मानसून के लेट होने से जून की सामान्य बारिश के आंकड़े में गिरावट आई है। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, प्रदेश में 1 जून से अब तक 39% पानी कम गिरा है। इसमें भी पूर्वी हिस्से की तस्वीर ज्यादा खराब है। प्रदेश में 1 से 18 जून के बीच 46.8 मिमी यानी, करीब 2 इंच पानी गिरता है लेकिन इस बार यह 28.4 मिमी यानी सवा इंच से भी कम है। अनूपपुर, बालाघाट, दमोह, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, आलीराजपुर, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां पर औसत आधा इंच पानी भी नहीं गिरा है। हालांकि, भोपाल, आगर-मालवा, अशोकनगर, बैतूल, बुरहानपुर, देवास, गुना, हरदा, इंदौर, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, सीधी, सतना में 1 से 4 इंच तक पानी गिरा है लेकिन यह भी बोवनी लायक नहीं है। सोयाबीन की बोवनी, बीज खराब होने का खतरा मानसून में देरी और प्री-मानसून में कम बारिश होने की वजह से किसानों की चिंता बढ़ गई है। वे खरीफ सीजन की फसल जैसे- सोयाबीन, उड़द, मूंग, तूअर आदि की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ बताते हैं कि बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश जरूरी है। इससे जमीन में पर्याप्त नमी आती है। इतनी बारिश होने के बाद ही किसान बोवनी करें। प्रदेश के कई जिलों में किसानों ने सोयाबीन की बोवनी कर दी है, लेकिन पानी के अभाव में अब बीज खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। सिवनी में 1 इंच से ज्यादा बारिश, इंदौर में भी पानी गिरा प्रदेश में गुरुवार को भी आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। सिवनी में 1 इंच से ज्यादा बारिश हो गई। वहीं, इंदौर के महू, धार के पीथमपुर और गुना में भी आंधी-बारिश हुई। इस वजह से दिन के तापमान में गिरावट हुई है। 5 बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 37 डिग्री, इंदौर में 36.9 डिग्री, ग्वालियर में 40.1 डिग्री, उज्जैन में 38 डिग्री और जबलपुर में पारा 38.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सबसे कम तापमान सिवनी में 34 डिग्री, बैतूल में 34.2 डिग्री, छिंदवाड़ा में 34.8 डिग्री, पचमढ़ी-शिवपुरी में 35 डिग्री सेल्सियस रहा। खजुराहो में सबसे ज्यादा 41.4 डिग्री, दतिया में 40.8 डिग्री और नौगांव में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। आज इन जिलों में आंधी-बारिश का अनुमान मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश का दौर रह सकता है। दूसरी ओर, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार, अलीराजपुर और झाबुआ में गर्मी वाला माहौल रहेगा। मौसम विभाग ने 17 जून को अगले चार दिन का वेदर फोरकास्ट जारी किया था। जिसमें हीटवेव का अलर्ट भी था, लेकिन सिस्टम एक्टिव होने से अब हीटवेव का असर नहीं रहेगा। एमपी में मानसून की एंट्री कब हुई… साइक्लोनिक-टर्फ की वजह से आंधी-बारिश
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) और आसपास तीन टर्फ एक्टिव है। इस वजह से प्रदेश में आंधी-बारिश का दौर जारी है। गुरुवार को कई जिलों में मौसम बदला रहा। शुक्रवार को भी अधिकांश हिस्से में अलर्ट है। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड भोपाल में 15 जून तक तेज गर्मी
राजधानी में जून महीने में तेज गर्मी और बारिश दोनों का ही ट्रेंड है। पिछले 10 साल में 15 जून से पहले तेज गर्मी का असर दिखा है। 3 साल तो तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। वहीं, रात का टेम्प्रेचर 17.4 डिग्री तक आ गया। साल 2020 में सबसे ज्यादा 16 इंच बारिश हुई थी। वहीं, पिछले साल 2024 में पूरे महीने 10.9 इंच पानी गिरा था। 10 साल में दूसरी बार इतनी बारिश हुई थी। 24 घंटे में करीब 5 इंच पानी बरसा था। इंदौर में पिछले साल हुई थी 4 इंच बारिश
जून में इंदौर में दिन के टेम्प्रेचर में खासी गिरावट होती है। पिछले 7 साल यानी- 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 और 2025 में जून में कम गर्मी पड़ी। पारा 39.6 से 41.6 डिग्री के बीच रहा है। पिछले साल तापमान 41.6 डिग्री तक पहुंचा था। इस महीने कोटे की 20 प्रतिशत तक बारिश हो जाती है। पिछले साल साढ़े 5 इंच पानी गिरा था। बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1980 में यहां जून महीने में 17 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 24 घंटे में सर्वाधिक 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 23 जून 2003 को बना था। 3 जून 1991 में इंदौर में दिन का पारा 45.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। ग्वालियर में 47 डिग्री पार हो चुका टेम्परेचर
ग्वालियर में मई के बाद जून में भी तेज गर्मी रहती है। 10 साल के आंकड़ों की बात करें तो साल 2019 में अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री तक पहुंच चुका है। वहीं, 2024 में पारा 45.7 डिग्री और 2025 में 45.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इस महीने अमूमन तापमान 45 से 46 डिग्री ही रहता है। मौसम विभाग के अनुसार, 11 जून 2019 को पारा 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं, 1952 में पूरे महीने साढ़े 28 इंच बारिश हो गई थी। एक दिन में सर्वाधिक साढ़े 7 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 जून 1952 को बना था। साल 2025 में यहां पूरे महीने 10 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। जबलपुर में 10 साल अच्छी बारिश
मानसून की एंट्री के साथ ही जबलपुर में अच्छी बारिश होती है। यहीं से मानसून की एंट्री होती है, इसलिए अन्य जिलों की तुलना में जबलपुर में अच्छा पानी गिरता है। साल 2016 से 2025 तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो कोटे की 30% तक बारिश जून में ही हुई। पिछले साल साढ़े 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। इस बार भी जबलपुर संभाग के दक्षिण हिस्से से ही मानसून एंटर हो सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, जबलपुर में 1998 में एक महीने में करीब 30 इंच बारिश दर्ज की गई थी। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 16 जून 1882 को 24 घंटे में साढ़े 7 इंच बारिश हुई थी। उज्जैन में भी अच्छी बारिश का ट्रेंड
जून महीने में उज्जैन में भी अच्छी बारिश होने का ट्रेंड है। 2016 से 2025 के बीच उज्जैन में 2.5 से 8 इंच तक बारिश हो चुकी है। उज्जैन में बारिश के ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1970 में पूरे महीने साढ़े 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 15 जून 2001 को बना था। इस दिन करीब साढ़े 6 इंच बारिश हुई थी। साल 2025 में पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
