मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद तीसरी सीट बीजेपी के खाते में चली गई। लेकिन इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब तीसरी सीट पर मुकाबला इतना महत्वपूर्ण था, तो क्या कांग्रेस को एक वैकल्पिक (डमी) उम्मीदवार का नामांकन भी दाखिल कराना चाहिए था? आखिर नामांकन निरस्त होने के पीछे कौन-कौन सी प्रक्रियागत और रणनीतिक चूक रही? सूत्र बताते हैं कि पूर्व सीएम कमलनाथ ने अपने डॉक्यूमेंट्स तैयार कर लिए थे, लेकिन नटराजन के नाम का ऐलान हुआ, तो क्या पार्टी के भीतर मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी को लेकर मतभेद थे? इन सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने संसदीय मामलों और राजनीति के जानकारों से बात की। पढ़िए मंडे स्टोरी… कांग्रेस की चूक: 4 प्रमुख कारण 1. डमी उम्मीदवार नहीं उतारा
संसदीय मामलों के जानकार और छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव देवेंद्र वर्मा के अनुसार, महत्वपूर्ण चुनावों में पार्टियां अक्सर एक से अधिक नामांकन दाखिल करती हैं ताकि मुख्य उम्मीदवार का पर्चा खारिज होने पर वैकल्पिक उम्मीदवार मैदान में बना रहे। उनका कहना है कि यदि कांग्रेस ने बैकअप उम्मीदवार उतारा होता तो स्थिति बदल सकती थी।जरूरत न पड़ने पर वह उम्मीदवार नाम वापस भी ले सकता था। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद वैकल्पिक उम्मीदवार न होने से चुनाव समाप्त हो गया और बीजेपी के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। 2. नामांकन प्रक्रिया में देरी
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार उम्मीदवार चयन में देरी हुई। मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा 4 जून की रात हुई। इसके बाद विधायक दल की बैठक में प्रस्तावकों का चयन किया गया और 7 जून को जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर 8 जून को नामांकन दाखिल किया गया। देवेंद्र वर्मा का मानना है कि चुनाव की तैयारी पहले से होनी चाहिए थी, जबकि जेपी धनोपिया किसी भी तरह की देरी से इनकार करते हैं।
3. बीजेपी की रणनीति का आकलन नहीं हो सका
मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद बीजेपी ने 7 जून को तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारा। वरिष्ठ पत्रकार आशीष दुबे के अनुसार बीजेपी की रणनीति स्पष्ट थी और मीनाक्षी के नाम के बाद उसने तेजी से कदम उठाए। उनका मानना है कि तीसरे उम्मीदवार के आने के बाद कांग्रेस का फोकस क्रॉस-वोटिंग रोकने और विधायकों को एकजुट रखने पर अधिक रहा, जिससे नामांकन की तकनीकी प्रक्रियाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। 4. तेलंगाना केस की जानकारी लीक होने का सवाल
आशीष दुबे के अनुसार एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि तेलंगाना केस से जुड़ी जानकारी बीजेपी तक कैसे पहुंची? उनका कहना है कि नामांकन दाखिल होने के बाद स्क्रूटनी के दौरान बीजेपी ने इस मुद्दे पर आपत्ति उठाई, जिससे यह संकेत मिलता है कि शपथ पत्र में केस का उल्लेख न होने की जानकारी किसी माध्यम से बीजेपी तक पहुंची थी। बीजेपी नेताओं का दावा है कि यह जानकारी कांग्रेस खेमे से लीक हुई है। कांग्रेस इन आरोपों को खारिज कर रही है। कमलनाथ ने तैयारी पूरी कर ली थी
दिग्विजय सिंह के चुनाव न लड़ने के बाद कमलनाथ के राज्यसभा जाने की चर्चाएं थीं। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार उन्होंने आवश्यक दस्तावेज और एनओसी सहित तैयारियां भी कर ली थीं। आशीष दुबे का मानना है कि यदि कमलनाथ उम्मीदवार होते तो बीजेपी शायद तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारती। साथ ही संगठन और विधायकों में अधिक उत्साह रहता तथा नामांकन प्रक्रिया से जुड़ी गड़बड़ियों की संभावना भी कम होती। इस घटनाक्रम से किसे फायदा, किसे नुकसान
आशीष दुबे के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नुकसान कांग्रेस और मीनाक्षी नटराजन को हुआ। हालांकि उनका मानना है कि यदि चुनाव होता तो क्रॉस-वोटिंग और विधायकों की टूट-फूट की आशंका बनी रहती, जिससे प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठ सकते थे।
