डबरा सिटी थाने में पदस्थ एक आरक्षक ने शुक्रवार देर रात अपने सरकारी क्वार्टर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। घटना की खबर मिलते ही एसडीओपी समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच गए। फिलहाल फॉरेंसिक टीम और ग्वालियर से सीनियर अफसरों के आने का इंतजार किया जा रहा है। डबरा एसडीओपी सौरभ कुमार ने सुसाइड की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि घटना की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे उसका शव फांसी पर लटका मिला है। ग्वालियर से फॉरेंसिक टीम मौके पर बुलाई गई है। आत्महत्या का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। मामले की जांच की जा रही है। भाई के फोन न उठाने पर खुला राज मृतक आरक्षक की पहचान मुरैना जिले के पोरसा के रहने वाले राघवेंद्र तोमर के रूप में हुई है। वे मध्य प्रदेश पुलिस में सिपाही थे और पिछले करीब एक साल से डबरा के सिटी थाने में तैनात थे। वे थाना बिल्डिंग के ठीक पीछे बने सरकारी क्वार्टर में रह रहे थे। यह घटना देर रात तब सामने आई जब राघवेंद्र के भाई मोनू ने उन्हें फोन किया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद मोनू ने डबरा थाने में ही तैनात दूसरे आरक्षक मिंटू परिहार को फोन कर भाई से बात न हो पाने की बात कही। मिंटू परिहार जब सरकारी क्वार्टर पहुंचे, तो उन्होंने राघवेंद्र को फांसी के फंदे पर लटका देखा। दरवाजे के कुंदे से बनाया फंदा इसकी जानकारी तुरंत एसडीओपी सौरभ कुमार को दी गई, जो फौरन घटनास्थल पर पहुंचे। आरक्षक ने सरकारी मकान के गेट के ऊपर लगे कुंदे से रस्सी का फंदा बनाकर खुदकुशी की थी। इस मामले की सूचना पुलिस कप्तान को भी दे दी गई है। अनुकंपा नियुक्ति पर भर्ती हुए थे आरक्षक फिलहाल ग्वालियर से बड़े अधिकारियों और फॉरेंसिक टीम के आने का इंतजार किया जा रहा है। आरक्षक के परिवार वालों को भी मौके पर बुला लिया गया है। इन सभी के पहुंचने के बाद ही शव को फंदे से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाएगा। बताया जा रहा है कि राघवेंद्र तोमर को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी और उनके दो बच्चे भी हैं। एसडीओपी सौरभ कुमार ने बताया कि पुलिस टीम मौके पर मौजूद है और फॉरेंसिक जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
