सिर्फ 11 नंबर… और एक होनहार बेटी की दुनिया अंधेरे में चली गई।
जिस छात्रा को अपनी मेहनत पर भरोसा था, वह अचानक खुद को फेल घोषित होते देख टूट गई। उसने खाना छोड़ दिया, लोगों से बात करना बंद कर दिया, अस्पताल तक पहुंच गई और उसके मन में आत्महत्या जैसे ख्याल आने लगे। करीब डेढ़ महीने बाद जब उसकी कॉपी दोबारा जांची गई तो सामने आया कि अंग्रेजी में उसके 11 नहीं, बल्कि 71 अंक थे। यानी एमपी बोर्ड की एक बड़ी लापरवाही ने बिना गलती एक छात्रा को मानसिक यातना के उस दौर में धकेल दिया, जहां उसका भविष्य और आत्मविश्वास दोनों टूटते नजर आने लगे थे। मामला ग्वालियर के जनकगंज थाना क्षेत्र स्थित गोल पहाड़िया का है। यहां रहने वाली अनामिका रावत ने 12वीं बोर्ड परीक्षा पूरी मेहनत और उम्मीदों के साथ दी थी। परिवार और शिक्षकों को भी उससे अच्छे परिणाम की उम्मीद थी। 10 फरवरी को उसने अंग्रेजी विषय की परीक्षा दी थी और उसे पूरा भरोसा था कि बाकी विषयों की तरह इसमें भी अच्छे अंक आएंगे। रिजल्ट घोषित होते ही पूरी तरह टूट गई 15 अप्रैल को घोषित रिजल्ट में अंग्रेजी विषय में उसे मात्र 11 अंक दिखाए गए और फेल घोषित कर दिया गया। यह देखकर अनामिका पूरी तरह टूट गई। पढ़ाई में हमेशा बेहतर प्रदर्शन करने वाली छात्रा समझ ही नहीं पाई कि आखिर उससे ऐसी कौन सी गलती हो गई। परिजनों के मुताबिक रिजल्ट आने के बाद अनामिका की मानसिक स्थिति लगातार बिगड़ती चली गई। उसने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया, खाना छोड़ दिया और अक्सर अकेले बैठकर रोती रहती थी। हालात इतने खराब हो गए कि परिवार को उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अनामिका ने बताया कि उस दौरान उसके मन में आत्महत्या जैसे ख्याल भी आने लगे थे। री-टोटलिंग में बढ़े अंक इसके बाद 16 अप्रैल को उसने री-टोटलिंग के लिए आवेदन किया। शुरुआती जवाब में “नो चेंज” बता दिया गया, लेकिन परिवार ने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास करता रहा। आखिरकार 29 मई को कॉपी की दोबारा जांच हुई तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। जिस छात्रा को 11 अंक देकर फेल बताया गया था, उसकी उत्तरपुस्तिका में वास्तव में 71 अंक थे। अनामिका की मां हेमलता रावत का कहना है कि बेटी की हालत देखकर पूरा परिवार सहम गया था। उन्हें हर समय डर लगा रहता था कि कहीं वह कोई गलत कदम न उठा ले। परिवार ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दोषियों पर कार्रवाई की मांग वहीं अनामिका ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उसका कहना है कि अगर उसके साथ ऐसा हो सकता है तो न जाने प्रदेश में कितने छात्र-छात्राओं का भविष्य इसी तरह की गलतियों की भेंट चढ़ रहा होगा। यह खबर भी पढ़ें… जबलपुर में सुसाइड पॉइंट पर पुलिस ने निगरानी बढ़ाई माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) ने बुधवार को हाईस्कूल और हायर सेकंडरी का परीक्षा परिणाम जारी कर दिया है। परीक्षा में सफल होने वाले विद्यार्थी जहां खुश हैं तो असफल विद्यार्थी दुखी। ऐसे में टीचर और परिवार उन्हें मोटिवेट कर रहे हैं। उन्हें बताया जा रहा है कि सरकार परीक्षा देने का दूसरा मौका भी दे रही है।पूरी खबर पढ़ें
