भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के नामांकन के साथ मप्र में राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ गई है। भाजपा का दावा है कि दो सीटों के बाद बचे 48 विधायकों के अलावा उसे 10 अन्य विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है।
राजनीतिक गलियारों में दावा है कि कांग्रेस के 15 विधायक उसके संपर्क में हैं। इनमें ग्वालियर-चंबल के 4, महाकौशल के 2, मालवा-निमाड़ के 5 और विंध्य क्षेत्र के 3 से 4 विधायक हैं। इधर, कांग्रेस ने विधायकों की बाड़ाबंदी का फैसला किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर बैठक में सभी विधायकों को कर्नाटक भेजने का निर्णय लिया गया। मंगलवार दोपहर 2 बजे विशेष विमान से विधायक बेंगलुरु रवाना होंगे। कुछ वरिष्ठ विधायक भोपाल में रहेंगे। सोमवार को पीसीसी में दिनभर बैठक, लंच व डिनर के दौरान रणनीति पर चर्चा हुई। इधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कांतिलाल भूरिया ने आरोप लगाया कि विधायकों को 5-5 करोड़ रु. का ऑफर दिया जा रहा है। हमारे विधायक भाजपा के बहकावे में नहीं आएंगे। अब निर्विरोध नहीं, तीनों सीटों पर होगा मतदान 3 सीटों पर 4 उम्मीदवार होने से कोई भी प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित नहीं होगा। विधायक चारों प्रत्याशियों को पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी वरीयता देंगे। अधिक वोट पाने वाले तीन प्रत्याशी विजेता होंगे। मतदान स्थल पर भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत एजेंट मौजूद रहेंगे। विधायकों को मतपत्र एजेंट को दिखाकर वोट डालना होगा। मतपत्र नहीं दिखाने और तत्काल आपत्ति होने पर वोट निरस्त हो सकता है। यह नियम भारत आदिवासी पार्टी के विधायक पर लागू नहीं होगा। -एपी सिंह, विधानसभा के पूर्व प्रमुख सचिव
