Homeमध्यप्रदेशघर-ऑफिस की दौड़ में छूट रही ब्रेस्टफीडिंग:MP में 6 माह तक स्तनपान...

घर-ऑफिस की दौड़ में छूट रही ब्रेस्टफीडिंग:MP में 6 माह तक स्तनपान कराने वाली माताएं घटीं, 100 में 44 बच्चे मां के दूध से वंचित

सुबह 6 बजे अलार्म बजते ही नेहा (काल्पनिक नाम) की दौड़ शुरू हो जाती है। 5 साल के बेटे को स्कूल भेजना, टिफिन तैयार करना, घर संभालना और फिर ऑफिस के लिए निकलना। इसी बीच 4 महीने की बेटी को दूध पिलाने के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। वहीं प्रिया (काल्पनिक नाम) की डिलीवरी सीजेरियन से हुई है। कमजोरी ज्यादा है। दूध कम आता है। बच्चे का पेट नहीं भरता, इसलिए उन्हें पैकेट का दूध पिलाना पड़ता है। रिद्धि (काल्पनिक नाम) का कहना है कि दिनभर घर का काम करना पड़ता है। बच्चा छोटा है। घर में कोई मदद करने वाला नहीं है। कई रात से वह ठीक से सो नहीं पाई हैं। दिन-रात जागने से उसकी तबीयत भी बिगड़ गई है, इसलिए रात में बच्चे को बोतल से दूध देना पड़ता है। ये केवल तीन कहानियां नहीं, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के आंकड़े के मुताबिक 100 में से 56 बच्चों को ही 6 माह तक मां का दूध मिल पाता है। यानी 54 मां बच्चों को 6 महीने तक स्तनपान नहीं करा पा रही हैं। 17.6 प्रतिशत घटी ब्रेस्टफीडिंग NFHS-6 के मुताबिक MP में 6 माह तक केवल मां का दूध पाने वाले बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। NFHS-5 (2019-21) में जहां 74% बच्चों को 6 माह तक सिर्फ मां का दूध मिलता था, वहीं NFHS-6 (2023-24) में यह आंकड़ा घटकर 56.4% रह गया। यानी 4 साल में 17.6 प्रतिशत अंक की गिरावट दर्ज हुई है। देश में भी कम हुई ब्रेस्टफीडिंग राष्ट्रीय स्तर पर भी एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है। देश में यह दर 63.7% से घटकर 55.8% रह गई है। हालांकि मध्यप्रदेश में गिरावट अधिक रही है। प्रदेश में 17.6 प्रतिशत अंक की कमी दर्ज हुई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह गिरावट 7.9 प्रतिशत अंक रही। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में यह समस्या राष्ट्रीय औसत से ज्यादा गंभीर है। अब जानिए स्तनपान क्यों जरूरी… महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति देव पुजारी बताती हैं कि बच्चे के लिए मां का दूध उसका पहला टीका (वैक्सीनेशन) होता है। मां के दूध में ऐसे पोषक तत्व और एंटीबॉडी होती हैं, जो बच्चे को कई तरह के संक्रमण और बीमारियों से बचाने में मदद करती हैं। मां अपने दूध को स्टोर कर भी पिला सकती है महिला एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति देव पुजारी कहती हैं कि अगर किसी वजह से मां सीधे बच्चे को स्तनपान नहीं करा पाती, तो वह अपना दूध निकालकर सुरक्षित तरीके से स्टोर कर सकती है। सामान्य तापमान पर ब्रेस्ट मिल्क को करीब 6 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है। बाद में इसे साफ बर्तन, कप या फीडिंग उपकरण की मदद से बच्चे को पिलाया जा सकता है। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान स्तनपान कराने वाली कई महिलाओं को कमर, पीठ, कंधों और हाथों में दर्द की शिकायत होने लगती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि वे लंबे समय तक बच्चे को गोद में लेकर एक ही मुद्रा में बैठी रहती हैं। कई बार बच्चा रोते ही माताएं तुरंत उसे दूध पिलाने लगती हैं, जबकि बच्चे के दूध पीने का एक नियमित अंतराल होना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे को हर 2 से 3 घंटे के अंतराल पर स्तनपान कराना बेहतर होता है। स्तनपान के समय शरीर की सही स्थिति भी बेहद जरूरी है। दूध पिलाते समय पीठ और हाथों को पर्याप्त सहारा देना चाहिए। इसके लिए तकिए का उपयोग किया जा सकता है, जिससे शरीर पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता। साथ ही हर बार स्तनपान के बाद निप्पल की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए और गुनगुने पानी से साफ-सफाई करनी चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम रहे।

Stay Connected
16,985FansLike
2,458FollowersFollow
61,453SubscribersSubscribe
Must Read
Related News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here