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ग्लोबल डे ऑफ पैरेंट्स:प्रदेश के 10 में से 6 परिवार न्यूक्लियर; बीमार-लाचार बुजुर्ग घरों में अकेले

सुबह घंटी बजती है, पर दरवाजा खोलने में देर लगती है। घर में बुजुर्ग दंपती हैं या सिर्फ एक बुजुर्ग। बच्चे पुणे, दिल्ली या विदेश में नौकरी कर रहे हैं। दवा लानी हो, बैंक जाना हो, अस्पताल में दिखाना हो तो पहला सवाल यही उठता है, “अब किसे फोन करें?” मप्र के शहरों और कस्बों में यह तस्वीर अब बड़े सामाजिक बदलाव का चेहरा है। ग्लोबल डे ऑफ पेरेंट्स को संयुक्त राष्ट्र ने माता-पिता के त्याग और परिवार में उनकी भूमिका को सम्मान देने के लिए तय किया था, लेकिन मप्र के लिए यह दिन अब चेतावनी का भी है। माता-पिता आखिरी पड़ाव में अपने ही घरों में अकेले क्यों पड़ते जा रहे हैं? राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (NFHS) की मप्र रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश में 57% परिवार न्यूक्लियर हैं। यानी 10 में से 6 घर ऐसे हैं, जहां संयुक्त परिवार वाला पुराना सहारा नहीं है आखिरी दौर में अकेलापन… बुजुर्गों को सिर्फ सम्मान ही नहीं, सामाजिक सुरक्षा भी चाहिए
2036 तक बुजुर्ग आबादी 23 करोड़ हो जाएगी… केंद्र सरकार के अनुसार देश में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2036 तक करीब 23 करोड़ हो सकती है। यानी कुल आबादी में बुजुगों की हिस्सेदारी 15% तक पहुंच जाएगी। मतलब बुजुर्ग ज्यादा होंगे, लेकिन उनके साथ रहने वाले परिवार के सदस्य कम होते जाएंगे। 75% बुजुर्ग किसी न किसी बीमारी से जूझ रहे हैं… भारत में वृद्धावस्था पर हुए बड़े अध्ययन में सामने आया कि देश के 75% बुजुर्ग लंबे समय से चल रही किसी बीमारी से परेशान हैं। 40% बुजुर्ग किसी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हैं। 20% को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी है। यानी, उन्हें नियमित देखभाल चाहिए। 78% बुजुर्गों के पास पेंशन का सहारा ही नहीं… नीति आयोग की वरिष्ठ नागरिक देखभाल सुधार रिपोर्ट कहती है कि देश में 78% बुजुगों के पास पेंशन का सहारा नहीं है। इसका अर्थ यह है कि जिन बुजुगों के बच्चे दूर हैं और नियमित आय नहीं है, उनके लिए दवा, जांच, बिजली बिल, राशन सब संकट बन जाते हैं। एनसीआरबी-2024 : मप्र में बज रहा है बुजुर्गों की सुरक्षा का अलार्म एनसीआरबी रिपोर्ट के मुताबिक बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के मामलों में मप्र फिर देश में सबसे ऊपर है। 2024 में प्रदेश में बुजुर्गों के खिलाफ 5,875 केस दर्ज हुए। 2023 में यह संख्या 5,738 थी। 2024 में बुजुर्गों की हत्या के 144 और गंभीर चोट के 376 केस दर्ज हुए हैं। अकेले रहने वाले बुजुर्ग सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं।

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