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दमोह में 2 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार:आरोग्य केंद्र में एक साल से कर रहे थे नौकरी, तीसरा जबलपुर से पकड़ाया

दमोह में आरोग्य केंद्र में फर्जी डिग्री के सहारे नौकरी कर रहे दो डॉक्टर्स को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। एसपी आनंद कलादगी ने रविवार शाम को इस पूरे मामले की जानकारी दी। ये दोनों डॉक्टर पिछले करीब एक साल से क्लीनिक में काम कर रहे थे। पुलिस को सीएमएचओ (CMHO) ऑफिस से एक रिपोर्ट मिली थी। इसमें बताया गया कि डॉ. कुमार सचिन यादव (ग्वालियर) और डॉ. राजपाल गौर (सीहोर) ने संजीवनी क्लीनिक, सुभाष कॉलोनी में भर्ती के समय एमबीबीएस की फर्जी डिग्री, मेडिकल काउंसलिंग का रजिस्ट्रेशन और दूसरे जाली कागजात जमा किए थे। इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के दम पर दोनों साल भर से नौकरी कर रहे थे। मामला गंभीर देखते हुए एसपी के निर्देश पर कोतवाली थाने में केस दर्ज किया गया और पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। जबलपुर से पकड़ा गया तीसरा फर्जी डॉक्टर पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ हुई तो एक और नाम सामने आया-अजय मौर्य (मुरैना)। पता चला कि वह जबलपुर के संजीवनी अस्पताल में ढाई साल से तैनात था। पुलिस की टीम ने तुरंत उसे भी जबलपुर से हिरासत में ले लिया है। पैसों के बदले बांटी जा रही थीं डिग्रियां एसपी ने बताया कि फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी संस्थानों में नियुक्तियां होना बहुत ही गंभीर बात है, क्योंकि यह सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला है। इस खेल में भोपाल स्तर की संस्थाओं की भूमिका भी शक के घेरे में है। पूछताछ में पता चला है कि पैसे लेकर कई लोगों को फर्जी डॉक्टर बनाया गया है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो फर्जी एमबीबीएस डिग्री और रजिस्ट्रेशन उपलब्ध कराते थे। पुलिस को शक है कि जिले में और भी ऐसे फर्जी डॉक्टर हो सकते हैं। एक फोन कॉल से खुला सारा राज सीएमएचओ डॉ. राजेश अठया ने बताया कि करीब 10 दिन पहले उनके पास एक अनजान शख्स का फोन आया था। उसने बताया कि दमोह के संजीवनी अस्पताल में दो डॉक्टर फर्जी डिग्री पर काम कर रहे हैं। इसके बाद एक कमेटी बनाकर जब कागजों की जांच की गई, तो डिग्रियां नकली निकलीं। सीएमएचओ ने बताया कि इन डॉक्टर्स की नियुक्ति सीधे ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन’ भोपाल से हुई थी, इसलिए पहले ज्यादा छानबीन नहीं की गई थी। लेकिन जब फोन पर शिकायत मिली और जांच हुई, तो सच सामने आ गया। इसके बाद पुलिस को कार्रवाई के लिए लिखा गया।

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