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आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक:50% आरक्षण विवाद पर राज्य से जवाब तलब, पांच साल नौकरी के बाद भी नहीं मिला लाभ

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने आयुष चिकित्सा अधिकारियों (आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी) की भर्ती प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ ने यह आदेश तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान गुरुवार को पारित किया। खंडपीठ ने राज्य सरकार और एमपीपीएससी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय मांगा है, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 23 जून 2026 को होगी। पांच साल की सेवा पूरी करने वालों को आरक्षण का लाभ नहीं अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए 31 दिसंबर 2025 को जारी तीनों विज्ञापनों के तहत आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती से जुड़ी सभी आगामी कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। यानी फिलहाल नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकेगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमिशन (एमपीपीएससी) द्वारा निकाली गई आयुष चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में उन संविदा चिकित्सकों को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा रहा है, जिन्होंने पांच वर्ष की निरंतर सेवा पूरी कर ली है। राज्य सरकार ने 11 मार्च 2025 की अधिसूचना में प्रावधान किया था कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी विभाग के ऐसे संविदा चिकित्सा अधिकारी, जिन्होंने पांच साल की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें नियमित भर्ती में 50% आरक्षण मिलेगा, बशर्ते वे समकक्ष पद पर कार्यरत हों। कोर्ट में क्या दलील दी गई याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने अदालत को बताया कि सभी संविदा आयुष चिकित्सा अधिकारी उसी पद पर कार्यरत हैं, जिसके लिए भर्ती निकाली गई है। केवल वेतनमान अलग होने के आधार पर उन्हें आरक्षण का लाभ न देना अनुचित है। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि अवमानना प्रकरण क्रमांक 2370/2025 में राज्य सरकार खुद स्वीकार कर चुकी है कि आयुष विभाग ने संविदा चिकित्सकों के वेतनमान को नियमित अधिकारियों के बराबर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग से अनुरोध किया है। हजारों संविदा चिकित्सकों को राहत हाईकोर्ट के इस आदेश से राज्यभर के हजारों संविदा आयुष चिकित्सकों को राहत मिली है। लंबे समय से ये चिकित्सक नियमित भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार के जवाब और अगली सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि संविदा चिकित्सकों को आरक्षण का लाभ किस तरह मिलेगा।

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